• तेलंगाना जाति सर्वेक्षण ने खोली सच्चाई! 67% आबादी 'अत्यंत पिछड़ी,' पढ़ाई- नौकरी में भी फर्क

    तेलंगाना जाति सर्वे रिपोर्ट ने राज्य की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को उजागर कर दी है. जहां 50% एससी दिहाड़ी मजदूर हैं, तो 60.5% बच्चे सिर्फ इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ रहे हैं. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट:-

    हैदराबाद, 18 अप्रैल 2026. तेलंगाना सरकार ने  15 अप्रैल 2026 को सबसे बड़े सामाजिक - आर्थिक - शैक्षिक- रोजगार- राजनीतिक और जाति सर्वेक्षण 2024 के नतीजे पेश किए. यह सर्वे पूरे देश के लिए एक नई मिसाल बन गया है. इसमें राज्य की करीब 97% आबादी यानी  3.55 करोड़ से अधिक लोग एवं 1.12 करोड़ परिवारों का घर- घर जाकर  डेटा इकट्ठा किया गया. सर्वेक्षण 6 नवंबर 2024 को शुरू किया गया था, जो 50 दिनों में पूरा हुआ और दो महीने तक अतिरिक्त जानकारी जुटाई गई. कुल 242 जाति समूहों पर आय, शिक्षा, रोजगार, स्वच्छ पानी और शौचालय जैसे  42 अलग-अलग पैमानों  को नापा गया है, लेकिन सरकार इस सर्वे को क्या करेगी? जानते हैं इस रिपोर्ट में...

    सवाल 1: तेलंगाना की कुल आबादी में विभिन्न वर्गों और जातियों का सटीक प्रतिशत क्या है?
    जवाब:-- इंटेपेंडेंट एक्सपर्ट वर्किंग ग्रुप( iewg) ने डेटा की परतें खोली हैं. इस ग्रुप की रिपोर्ट में राज्य का औसत पिछड़ापन सूचकांक ( cbi) 81 निकला है. सर्वे के मुताबिक, राज्य की कुल आबादी लगभग 3.55 करोड़ है. इसमें: इस तरह बीसी, एससी और एसटी मिलाकर 74.13% आबादी है, जबकि ओसी सिर्फ 13.31% है. सबसे बड़ी जातियां मदिगा (एससी ), शेख मुस्लिम (बीसी - ई ), मुदिराज  (बीसी ) और लंबाड़ी / बंजारा (एसटी ) हैं.

    जाति सर्वे के मुताबिक, 11, 96, 482 लोग  ( कुल आबादी का 3.4% ) ने नो 'कास्ट' का विकल्प चुना. यह संख्या राज्य की  दसवीं सबसे बड़ी कम्युनिटी बन गई है. इनमें से लगभग आधे से अधिक लोगों के पास जाति प्रमाण पत्र मौजूद हैं. यह कल्याण योजनाओं, नौकरियों और शिक्षा के लिए इस्तेमाल होते हैं. ये लोग ज्यादातर शहरी इलाकों में रहते हैं, खासकर ग्रेटर हैदराबाद के आसपास. यह ग्रुप राज्य के सबसे कम पिछड़े  समूहों में आता है. उनकी शिक्षा का स्तर और आय ज्यादा है. सरकारी नौकरियों में इनकी हिस्सेदारी 7.7 प्रतिशत, प्राइवेट जॉब्स  में 13.3 प्रतिशत, आईएएस और आईपीएस में 22.9%, अन्य केंद्रीय सरकारी पदों में 13.2% एवं न्यायपालिका में 9.3% है. यह साफ दिखता है कि जाति का लेवल छोड़ने का फैसला मुख्य रूप से पढ़े - लिखे, अच्छी आय वाले और शहरी लोगों में ज्यादा है.

    सवाल 2: राज्य में पिछड़ापन कितना गहरा है?
    जवाब:-- कुल 242 जातियों में से 135 जातियां राज्य के औसत cbi स्कोर (81) से अधिक पिछड़े हैं. यह 135 जातियां राज्य की 61% आबादी को कवर करती है. इनमें 69 बीसी जातियां, 41 एससी समूह और 25 एसटी जातियां शामिल हैं. एससी और एसटी वर्ग सामान्य वर्ग (ओसी) से तीन गुना अधिक पिछड़े हैं. बीसी वर्ग  ओसी से 2.7 गुना ज्यादा पिछड़ा है.

    इन 135 जातियों में शिक्षा, रोजगार, घर, साफ पानी, शौचालय और स्वास्थ्य सुविधाएं बहुत कम उपलब्ध हैं. लोग छोटे - भीड़भाड़ वाले घरों में रहते हैं, जमीन कम है, सूदखोरों से महंगे ब्याज पर कर्ज लेते हैं और कर्ज के जाल में फस जाते हैं. सबसे पिछड़ी एससी उपजाति 'डक्कल ' का cbi स्कोर 116 है, जबकि सबसे कम पिछड़ी  कपु जाति का स्कोर सिर्फ 12 है. रिपोर्ट के मुताबिक, 'हर पिछड़ी जाति बराबर पिछड़ी नहीं होती.' यह पहली बार डेटा के साथ साबित हुआ है. 135 जातियां औसत से अधिक पिछड़ी है, जबकि बाकी 107 जातियां औसत से कम पिछड़ी है.