• भारतीय जनता तिब्बत के साथ लेकिन सरकार चुप, प्रधानमंत्री पेम्पा को दीपक मिश्रा ने दी बधाई

    समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
    नई दिल्ली/ लखनऊ, 31 मई 2026. प्रख्यात समाजवादी चिंतक एवं बौद्धिक सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने तिब्बत के प्रधानमंत्री पेम्पा सीरिंग को दोबारा चुनाव जीतने पर बधाई देते हुए कहा कि इस जीत से भारत और तिब्बत की साझा सांस्कृतिक एवं राजनीतिक विरासत सशक्त होगी. वहीं, भारतीय जनता तिब्बतियों के हर संघर्ष में साथ हैं. चीन की हठवादिता और साम्राज्यवादी नीति के कारण तिब्बती भारत, अमेरिका समेत  कई देशों में निर्वासितों सी लाचार जिंदगी जीने के लिए अभिशप्त हैं. चीन की आजादी एशिया की स्थाई शांति के लिए आवश्यक है.

    दीपक मिश्र के मुताबिक, तिब्बत की स्वतंत्रता से भारत सामरिक रूप से और अधिक सुरक्षित होगा. उन्होंने कहा, भारत के महान राष्ट्र नायकों में डॉ. राममनोहर लोहिया, लोकनायक जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेयी, जॉर्ज फर्नांडिस, रवि राय, जनेश्वर मिश्र और नेताजी मुलायम सिंह यादव सभी तिब्बत, मानसरोवर और कैलाश को चीन से आजाद करने के पक्षधर रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र हिंदी जन अभियान के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने दु:ख व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार की तिब्बत नीति  घुटना टेकु और टालू किस्म की है. तिब्बत, मानसरोवर और कैलाश पर विदेश मंत्रालय की रहस्य चुप्पी दुर्भाग्यपूर्ण है. भारत सरकार पहल कर त्रिपक्षीय कूटनीतिक वार्ता प्रारंभ करे जिसमें चीन, भारत और तिब्बत के प्रतिनिधि शामिल हों.

    दीपक मिश्र ने बताया कि लोहिया - अटल सूत्र से ही तिब्बत की समस्या का समाधान होगा. दीपक मिश्र ने हिंदी जन अभियान के पदाधिकारी  दाबा क्षीरिंग को भी ऐतिहासिक जीत की शुभकामनाएं दी. गौरतलब है कि श्री दाबा संयुक्त राष्ट्र संघ में हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा दिलाने के लिए अनवरत चल रहे वैश्विक अभियान के हिस्सा  हैं और लगातार सातवीं बार चुनाव जीते हैं. उनकी हिंदी और तिब्बती  साहित्य में  अच्छी पकड़ है. दरअसल, दीपक मिश्र तिब्बत की आजादी के प्रबल पैरोंकार हैं और हिंदी  तिब्बती साझा साहित्यिक विरासत को मजबूत करने वाली गतिविधियों से गहराई से जुड़े हैं.