• 42 सीटों की बस में 82 लोग, उधमपुर में 21 मौतों का कौन जिम्मेदार? चंद रूपयों की लालच या लापरवाही?

    जम्मू कश्मीर के उधमपुर में हुए दर्दनाक बस दुर्घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. 21 लोगों की जान चली गई है, जिसमें एक गर्भवती महिला और नवजात बालक भी शामिल है, जबकि 61 लोग घायल हुए हैं. लेकिन यह सिर्फ एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि सिस्टम और लालच की मिली भगत से हुआ 'हत्या ' है. 42 सीटों वाली बस में 82 लोगों को भेड़ - बकरियों की तरह ठूंसा गया था. चंद रूपयों के लालच में बस मालिक और प्रशासन ने मासूमों की जान दांव पर लगा दी. 30 वर्ष पहले भी हुई थी दुर्घटना. आखिर इंसानी जान इतनी सस्ती क्यों है? समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट:-

    उधमपुर/ रामनगर, 20 अप्रैल 2026. सड़क पर बिखरा दूध, किसी का बर्तन, तो किसी नवजात शिशु के कपड़े... उधमपुर में हुए बस दुर्घटना की जगह पर बिखरा हुआ सामान उस खौफनाक मंजर की गवाही दे रहा है. इस दुर्घटना ने  21 हंसते - खेलते परिवारों को हमेशा के लिए उजाड़ दिया. बस के परखच्चे उड़ चुके हैं और छत पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुकी है. इस दुर्घटना में 21 लोगों ने अपनी जान गंवा दी और 61 लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या यह महज एक दुर्घटना है? या चंद रूपयों के लालच में किया गया एक सामूहिक हत्याकांड?

    सोचिए, जिस बस की क्षमता मात्र 42 यात्रियों की थी, उसमें 82 लोग कैसे  ठूंस दिया गया? यह सवाल सीधा बस के मालिक, ड्राइवर, और कांटेक्ट कंडक्टर की नियत पर उठता है. कुछ सौ रुपयों के एक्स्ट्रा किराए के लालच में इन लोगों ने नियमों की धज्जियां उड़ा दी. डबल कैपेसिटी के साथ बस को पहाड़ी के उस खतरनाक रास्तों पर दौड़ाया गया, जहां एक छोटी सी चूक सीधे मौत की खाई में ले जाती है. क्या बस स्टाफ के लिए लोगों की जान से अधिक चंद रूपयों की कमाई अहम थी?

    प्रशासन की आंखें बंद क्यों थी?

    इस खौफनाक लापरवाही में सिर्फ बस वाले ही नहीं, बल्कि हमारा पूरा सरकारी और प्रशासनिक अमला भी बराबर का हिस्सेदार है. जम्मू से लेकर उधमपुर तक हाईवे पर इतनी लंबी दूरी तय करने के दौरान क्या रास्ते में एक भी पुलिस चेक पोस्ट नहीं था? क्या किसी ट्रैफिक पुलिस कर्मी या आरटीओ अधिकारी को यह नहीं दिखा कि बस में लोग डबल संख्या में भरे हुए हैं? हाईवे पर चेकिंग के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति होती है और दुर्घटना को खुले तौर पर आमंत्रण किया जाता है.

    सड़क चौड़ी हुई, सोच नहीं

    स्थानीय लोगों का गुस्सा और दर्द जायज है. उनका कहना है कि 1996 में भी इसी जगह पर ऐसा ही एक भीषण दुर्घटना हुआ था, जिसमें 50 के करीब लोग मारे गए थे. दशकों बाद भी  इस 'ब्लाइंड मोड़ ' का कोई समाधान नहीं निकाला गया. सरकार ने हाइवे को चौड़ा तो कर दिया, लेकिन इस खतरनाक मोड़ को सीधा करने के लिए पहाड़ काटने की जहमत नहीं उठाई. जगह कम होने और मोड़ खतरनाक होने के कारण ओवरलोड  बस अपना संतुलन खो बैठी और पलट गई. सोमवार सुबह अस्पताल में भर्ती घायलों की चीखें और मलबे में दबी वो उम्मीदें सिस्टम से पूछ रही है कि क्या उनके जीवन की कीमत  बस के उस टिकट से भी सस्ती थी?

    सूत्र बताते हैं कि उधमपुर जिले के रामनगर उधमपुर मार्ग पर सोमवार को भीषण सड़क हादसा हुआ. कघोट इलाके में एक मोड़ पर अनियंत्रित होकर यात्री बस सड़क से करीब 70 से 80 फीट गहरी खाई में गिर गई. मिली जानकारी के मुताबिक, बस संख्या जेके 14डी 2121 सोमवार सुबह रामनगर से उधमपुर आ रही थी. दुर्घटना के समय बस में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे, जिनमें शासकीय कर्मचारी, स्कूल और कॉलेज के शिक्षक एवं विद्यार्थी शामिल बताएं जा रहे हैं. यह दुर्घटना सुबह करीब  9:40 बजे घटी. जब बस ड्राइवर ने  कघोट इलाके में मोड़ काटते वक्त बस से अपना नियंत्रण खो दिया. इस हादसे पर दुख जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतक परिवारों को 2-2 लाख मुआवजा देने की घोषणा की है.