युवाओं की ऐतिहासिक जीत, लोकतंत्र हुआ ताकतवर!: डॉ. सुनीलम
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ विशेष रिपोर्ट..
भोपाल, 26 जुलाई 2026. किसान संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक डॉ. सुनीलम ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को युवाओं की जीत बताते हुए कहा कि इतिहास बताता है कि जब-जब युवा खड़ा होता है, तब वह जीत हासिल करता है. 1942 में देश के युवाओं ने गांधी जी के 'करो या मरो '
'अंग्रेजों भारत छोड़ो' के आह्वान के बाद देश से अंग्रेजों को खदेड़ दिया था. फिर 1974 में तानाशाही के खिलाफ युवा जब लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में खड़े हुए तब तानाशाही को खदेड़ दिया. अन्ना आंदोलन के दौरान भी जब युवा खड़े हुए तब लोकपाल बिल को पारित कराने में कामयाब हुए, सत्ता भी बदली.
लेकिन मोदी सरकार आने के बाद किसानों के भूमि अधिकार आंदोलन के चलते सरकार भूमि अधिग्रहण बिल में बदलाव नहीं करा सकी. सीएए - एनआरसी के खिलाफ महिला आंदोलन के चलते सरकार सीएए - एनआरसी लागू नहीं करा सकी. वहीं केंद्र सरकार जब तीन किसान विरोधी कानून लाई तब भी सरकार को पीछे हटना पड़ा. इस बार 152 पेपर लीक के खिलाफ और मुख्य न्यायाधीश के द्वारा बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच कहने के बाद छात्र-छात्राएं आंदोलन के लिए मैदान में उतरे, परिणाम स्वरूप धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने को मजबूर होना पड़ा.
डॉ. सुनीलम ने कहा कि हम यह मानते हैं कि आंदोलन से बदलाव आता है तथा गांधी जी के सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के रास्ते पर चलकर बड़ी से बड़ी ताकत को परास्त किया जा सकता है. डॉ सुनीलम ने आशा व्यक्त की है कि सरकार ने जिन शिक्षा सुधारों के लिए छात्र-छात्राओं से फिर से बातचीत करने का वादा किया है, आंदोलन के चलते की गई एफआईआर वापस लेने और पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का आश्वासन दिया है, सरकार अपने वादों को पूरा करेगी एवं जिस तरह का धोखा किसानों के साथ किया गया था, वैसा छात्र-छात्राओं के साथ नहीं होगा.
डॉ सुनीलम ने कहा कि संसद में विपक्ष ने पूरी ताकत के साथ छात्र-छात्राओं का साथ दिया. विपक्षी सांसद सड़कों पर उतरे, इससे भी छात्र-छात्राओं को काफी बल मिला. डॉ सुनीलम ने अभिजीत दीपके, सोनम वांगचुक, आईसा की अध्यक्ष नेहा बोरा, मनीष कुमार, एआईएसएफ, एसएफआई के अनशनकारियों को विशेष तौर पर धन्यवाद देते हुए कहा है कि आंदोलन की जीत का सेहरा 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर मंतर पर एकत्रित हुए, पुलिस बर्बरता के बाद भी डटे रहे छात्र-छात्राओं को तथा 24 जुलाई को देशभर में हुए प्रदर्शनों में शामिल छात्र-छात्राओं को दिया जाना चाहिए.
डॉ. सुनीलम ने कहा कि किसानों के संगठनों ने सरकार को यह बतला दिया था कि वह इन युवाओं के साथ हैं, जिसका असर भी सरकार पर पड़ा. उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने सत्य, अहिंसा और सत्याग्रह के गांधी जी के विचार की ताकत को फिर साबित किया है और देश में व्याप्त भय को खत्म किया है. डॉ सुनीलम ने कहा कि भारत का युवा बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के युवाओं के हिंसक रास्ते पर नहीं गया. यह आंदोलन के नेतृत्वकर्ताओं की सबसे बड़ी उपलब्धि है. यह सरकार के लिए अलार्मिंग है.