महंगाई का महा विस्फोट, थोक महंगाई, ईंधन और खाने-पीने की चीजों ने बिगड़ा बजट
मई 2026 में थोक महंगाई दर बढ़कर 9.68 प्रतिशत पर पहुंच गई. यह दर 43 महीने में सबसे अधिक है. यह बाजार के 9.1 प्रतिशत के अनुमान और अप्रैल के 8.3 प्रतिशत के आंकड़े से बहुत अधिक है. मई में थोक महंगाई दर बढ़ने के मुख्य वजह ईंधन और खाद्य वस्तुओं का महंगा होना है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
नई दिल्ली, 15 जून 2026. वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सोमवार को थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई के आंकड़े जारी किए. आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022 -23 कर दिया गया है. ईंधन और बिजली में थोक मूल्य महंगाई मई में 30.33 प्रतिशत पर पहुंच गई. अप्रैल में यह 24.89 प्रतिशत थी. कच्चे पेट्रोलियम में महंगाई मई में 61.51 प्रतिशत रही. वहीं, खाद्य वस्तुओं में महंगाई मई में 3.60 प्रतिशत दर्ज की गई. जबकि अप्रैल में यह 2.43 प्रतिशत थी. विनिर्मित उत्पादों में महंगाई अप्रैल के 6.68 से बढ़कर मई में 7.48 फ़ीसदी हो गई. खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई भी मई में 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई.
आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 4.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया है. वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से
मई के दूसरे पखवाड़े में पेट्रोल और डीजल के दाम 7.50 रुपए प्रति लीटर बढ़े थे. दरअसल, थोक स्तर पर कीमतों में इस तेजी के पीछे कच्चे माल, ईंधन, ऊर्जा और विनिर्मित वस्तुओं की लागत में बढ़ोतरी मुख्य वजह मानी जा रही है. अपेक्षा से अधिक महंगाई के आंकड़ों ने यह संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में
उद्योगों की लागत और उपभोक्ताओं पर मूल्य दबाव बढ़ सकता है.
थोक महंगाई दर क्या है?
थोक महंगाई सूचकांक एक मूल्य सूचकांक है जो कुछ चुनी हुई वस्तुओं के सामूहिक औसत मूल्य का प्रतिनिधित्व करता है. थोक मूल्य सूचकांक को आधार मानकर महंगाई दर की गणना होती है. हालांकि, थोक मूल्य और खुदरा मूल्य में काफी अंतर होने के कारण इस विधि को कुछ लोग सही नहीं मानते हैं. थोक मूल्य सूचकांक में 697 पदार्थो को शामिल किया गया है. इनमें खाधान्न, धातु, ईंधन, रसायन आदि हर तरह के पदार्थ शामिल हैं.
मान लीजिए 10 मार्च को खत्म हुए हफ्ते में थोक मूल्य सूचकांक 120 है और 17 मार्च को यह बढ़कर 122 हो गया. प्रतिशत में अंतर लगभग 1.6% हुआ और यही महंगाई दर मानी जाती है. सामानों के थोक भाव लेने और सूचकांक तैयार करने में समय लगता है, इसलिए मुद्रास्फीति की दर हमेशा 2 हफ्ते पहले की होती है एवं हर हफ्ते ठोक मूल सूचकांक का आकलन किया जाता है. इसलिए महंगाई दर का आकलन भी हफ्ते के दौरान कीमतों में हुए परिवर्तन दिखाता है. पहले डब्ल्यूपीआई मापने का बेस ईयर 2004 -- 2005 था लेकिन अप्रैल 2017 में सरकार ने इसे बदलकर 2011- 12 कर दिया.
डब्ल्यूपीआई में सामग्रियों की तीन श्रेणियां
इन सामग्रियों की तीन श्रेणियां होती है -- प्राइमरी आर्टिकल्स, ईंधन उत्पादित सामग्रियां. प्राइमरी आर्टिकल्स की भी दो उप -- श्रेणियां है. पहली खाद्य उत्पाद. दूसरी गैर खाद्य उत्पाद. खाद उत्पादों में अनाज, धान, गेहूं, दालें, सब्जियां, फल, दूध, अंडा, मांस और मछली जैसी चीजें शामिल है. गौर खाद उत्पाद में तेल के बीज, खनिज संसाधन और कच्चा पेट्रोलियम शामिल है.
आम जनता पर क्या असर?
थोक महंगाई दर बढ़ने का सीधा असर आम आदमी पर पड़ता है. थोक में अगर किसी वस्तु के दाम बढ़ते हैं तो आम आदमी को रिटेल में भी इसके अधिक दाम चुकाने होते हैं. लेकिन थोक दाम घटने पर बाजार में चीजें कम कीमत पर मिल जाती है.