• बंगाल में गाय की कुर्बानी पर रोक, नाराज हिंदू व्यापारी बोले: बीजेपी ने 2500 करोड़ का धंधा बिगड़ा!

    पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर में रहने वाले सुखदेव मंडल खेती- किसानी करते हैं. इसी से परिवार का खर्च चलता है. इस  साल बेटी की शादी करनी है, इसलिए सालभर पहले बैंक से कर्ज लेकर मवेशी खरीदे. उम्मीद थी कि  बकरीद पर बिक जायेंगे और शादी ब्याह का खर्च निकल जाएगा, लेकिन बंगाल के शुभेंदु सरकार के एक फैसले ने उम्मीद तोड़ दी. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट--

    कोलकाता, 29 मई 2026. 13 मई या नहीं बकरीद से 15 दिन पहले बंगाल सरकार ने एक नोटिस जारी किया और इसमें गोहत्या से जुड़े 1950 के कानून और 2018 के कोलकाता हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया कि बिना ' फिटनेस सर्टिफिकेट' किसी भी गाय और भैंस की कुर्बानी नहीं दी जाएगी. इस फैसले के बाद सुखदेव परेशान है कि वो मवेशी लेकर कहां जाएं. उनका खर्च कैसे उठाएं और बैंक का कर्ज कैसे अदा करें. वे कहते हैं, किसी को फांसी देने से पहले वक्त मिलता है, लेकिन हमें वह भी नहीं मिला.' 28 मई यानी बकरीद पर इस तरह के फैसले से मुस्लिम भी नाखुश हैं. उन्हें कुर्बानी के लिए जानवर नहीं मिले. कोलकाता के खिदिरपुर में बकरीद पर बकरों और भेड़ों का बाजार लगता है. यहां 16 हजार रुपए से लेकर 25 हजार रुपए तक के  बकरे बिके.

    हिंदू व्यापारी बोले.. दीदी से परेशान होकर सरकार बदली, लेकिन बीजेपी सरकार ने धंधा ही चौपट कर दिया 
    बंगाल में पशु हाट - बाजारों से करीब 3.7 करोड़ लोगों की रोजी-रोटी सीधे तौर पर जुड़ी है. बंगाल में बकरीद पर करीब  तीन हफ्ते के लिए पशुओं का बाजार लगता है. इस दौरान करीब 2000 से 2500 करोड़ का व्यापार होता है. सिर्फ कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में रोज एक से दो करोड़ रूपयों का कारोबार होता है. इस काम से जुड़े सुखदेव गुस्से में रहते हैं, 'बीजेपी सरकार के फैसले ने हमारा व्यापार ठप कर दिया है. इस उम्मीद में बैंकों से कर्ज लिया था कि कुर्बानी के बाद पैसा भर देंगे. सालभर गाय और भैंस को खिलाया. और जब बेचने की बारी आई, तो नया नियम आ गया. अब सरकार ही बताएं कि कर्ज कैसे चुकाएं. बच्चों की पढ़ाई लिखाई और परिवार का खर्च कहां से निकालें.'

    दीदी के 15 साल की खराब नीतियों के चलते सरकार बदली. जय श्री राम बोलकर राज्य में नई सरकार  लाए, लेकिन अब बीजेपी सरकार की नीतियों ने हमारी परेशानी बढ़ा रखी है. अब लगता है कि शुभेंदु अधिकारी की सरकार भी बदलनी पड़ेगी.' वहीं, पूर्व मेदिनीपुर के शहीद महतो मिनी ब्लॉक में पशु व्यापार से जुड़े परिवार सरकार के फैसले को लेकर भारी गुस्से में दिखे.

    इसी इलाके के सिलिपल्ली मोहल्ले में रहने वाले सुखदेव अकेले नहीं है. यहां के श्याम मंडल भी  रुंधे गले से यही दिक्कतें गिनाते हैं, बैंक वाले घर पर पैसा लेने आ रहे हैं. गहने गिरवी रखकर पशुओं को पाला. अब इस फैसले से सड़क पर आ गए हैं. यदि सरकार ने साथ नहीं दिया, तो जहर खाने के सिवाय हमारे पास दूसरा कोई रास्ता नहीं बचेगा.' 

    पास में ही खड़े कृष्णा बदर गुस्से में कहते हैं,' सरकार मुसलमानों को सबक सिखाने के चक्कर में हिंदुओं को बुरा कर रही है. कुर्बानी मुसलमान देते हैं, लेकिन इसका व्यापार तो हिंदू ही कर रहे हैं. गांव में सभी दलित हिंदुओं ने कुर्बानी के वक्त पशु बेचने के लिए 8 से 10 गायों और बकरियों को पाल रखी है. सालभर उन्हें दाना- पानी दिया, ताकि मुनाफा कमा सकें.' ' पशु खरीदने और पालने के लिए बैंक से 10 लख रुपए कर लिया था. अब सरकार बताएं कि यह रकम कैसे भरें. पशुओं को दाना पानी कहां से खिलाएं.'