हिंदी पत्रकारिता दिवस पर पुरस्कृत होंगे संपादक विपमा वीर व लेखिका डॉ. कमला गणोरकर
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट:-
हैदराबाद, 29 मई 2026. प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी पंडित गंगाराम स्मारक मंच द्वारा 30 मई (शनिवार) को हिंदी पत्रकारिता दिवस के अवसर पर हैदराबाद स्थित पंडित नरेंद्र भवन सभागार, राजमोहल्ला, नारायणगुड़ा में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में हिंदी दैनिक 'मिलाप ' के मुख्य संपादक विपमा वीर और लेखिका डॉ. कमला गणोरकर पुरस्कृत किया जाएगा.
इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कोल व खान मंत्री जी. किशन रेड्डी होंगे, वहीं भारतीय शिक्षा समिति के विशिष्ट विशेषज्ञ नई दिल्ली प्रो. आर एस सर्राजू विशेष अतिथि एवं सम्माननीय अतिथि बोर्ड ऑफ़ स्टडीस, उस्मानिया विश्वविद्यालय हैदराबाद के चेयरपर्सन डॉ संगीता व्यास प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे.
दरअसल, प्रत्येक आंदोलन के लिए लेखन और वाणी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. क्रांतिवीर पंडित गंगाराम ने 23 वर्ष की उम्र में सन 1939 में राज सत्याग्रह हेतु एक समाचार बुलेटिन प्रकाशित करके रात के अंधेरे में बस्तियों की दीवारों पर चस्पा कर जन-जन में धर्म युद्ध के लिए जोश पैदा करके प्रेरित किया. 1946 में उन्होंने "ऋषि चरित्र प्रकाश" पुस्तक लिखी और उसे शिक्षण संस्थानों में पढ़ने की स्वीकृति आर्य प्रतिनिधि सभा ने दी, लेकिन तत्कालीन निजाम शासन द्वारा इस सरकार के विरुद्ध विद्रोह की एक ज्वाला समझकर इसे जब्त कर लिया गया और बनी पर भी प्रतिबंध लगा दिया.
इसी तरह स्वतंत्र पत्रकारिता और लेखनी आगे चलकर "वर्णाश्रम पत्रिका" का संचालन 30 वर्षों से अधिक समय तक किया गया. उनके आलेख आर्य जगत के पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे. "वेद ईश्वरीय ज्ञान है- कुरान बाइबल नहीं ", "मक्का में हल्ला - हैदराबाद में दंगा ", " बे मां - बाप के 2 करोड़ बच्चे," "मंदिरों की भूमि बेचना पाप है," "हैदराबाद के गणेश उत्सव- करोड़ों रुपए पानी में," "नौबत पहाड़ - मंदिर या मस्जिद" आदि ज्वलंत मुद्दों पर पुस्तकों को आर्यसमाज, सुल्तान बाजार, हैदराबाद ने प्रकाशित किया. ऐसे महान क्रांतिवीर लेखक, पत्रकार की स्मृति में यह सम्मान समारोह आयोजित है.
70 के दशक में विपमा वीर को सर्वश्रेष्ठ गाइड के रूप में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. नीलम संजीव रेड्डी भी उन्हें सम्मान प्राप्त हुआ. 1989 में हैदराबाद के सुप्रसिद्ध पत्रकार युद्धवीर जी (सुपुत्र महात्मा आनंद स्वामी जी) की पुत्रवधू बनी और पति विनय वीर जी के प्रोत्साहन से पत्रकारिता की ओर आकर्षित हुई. संप्रति में "डेली हिंदी मिलाप" जो सन 1950 से हैदराबाद में हिंदी की सेवा में दक्षिण भारत में अपना नाम स्थापित किया है, इसकी मुख्य संपादिका हैं. विपमा जी आधुनिक विषयों का समर्थन कर हिंदी पत्रकारिता के दक्षिणी इतिहास में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.
वहीं, " हिंदी लेखक सम्मान पुरस्कार" "संध्या" पुस्तक की लेखिका डॉ. कमला गणोरकर दिया जा रहा है. सन 1934 में हैदराबाद में जन्मी और भारतीय प्राचीन संस्कृति गुरुकुल की परंपरा में देहरादून से शिक्षा प्राप्त कर विद्यालंकर की उपाधि लेकर हैदराबाद लौटी. यहां नवजीवन बालिका विद्यालय में अध्यापन किया और 1961 में विवाह के उपरांत पति की प्रेरणा से पीएचडी हासिल की.
वनिता महाविद्यालय में हिंदी विभाग की अध्यक्ष बनी और वाइस प्रिंसिपल हुई. साहित्यिक रचनाएं, दुर्गाबाई देशमुख, भारत कोकिला सरोजिनी नायडू, आस्था, जापानी सांस्कृतिक लोक कथा, साहसी महिला- निडर बुढ़िया आदि अनेक पुस्तकें लिखी." जीवन एक अवसर है - जीवन एक यात्रा है- पूरा करो". "यत्र तत्र सर्वत्र " से हैं. 92 वर्ष की उम्र में आज भी आप अपनी कलम चलाती हैं. इस आशय की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से कार्यक्रम के मंत्री श्रुतिकांत भारती ने "आज की आवाज " को दी है.