छोटा पैकेट, बड़ा धमाका
-डी. आर. साहू
छोटा रिचार्ज बनाम मिस्टर एटीएम
पिछले दिनों पीएम आवास के मुद्दे पर प्रेस क्लब रायपुर में पूर्व सीएम भूपेश बघेल और डिप्टी सीएम विजय शर्मा आमने-सामने थे। प्रदेश की राजनीतिक इतिहास में पहली बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता ओपन मंच पर खुली चुनौती को स्वीकार कर डिबेट में बैठे थे। प्रदेश में पीएम आवास के आंकड़ों को लेकर बघेल और शर्मा के बीच तीखी नोकझोंक हुई। एक दूसरे को झूठे भी ठहराए गए। प्रेस क्लब के अंदर और बाहर काफी गहमागहमी रही। पत्रकारों के सामने दोनों नेताओं के बीच 80 मिनट चर्चा के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सोशल मीडिया पर पोस्टर वार चालू हो गया। भाजपा ने बघेल पर निशाना साधते हुए लिखा कि "तुम्हारी इनकमिंग भी जनता ने बंद कर दी है मिस्टर एटीएम...।" वहीं भूपेश बघेल ने शर्मा पर तंज कसते हुए लिखा- 'छोटा रिचार्ज' रील के लिए ही ठीक है।
दिल का क्या करें..
सूबे के एक कलेक्टर अपनी पुरानी प्रेमिका को लाख कोशिशों के बावजूद भी भूला नहीं पा रहे हैं। बताते हैं उसी गम में साहब स्थाई जीवन संगिनी भी नहीं ढूंढ़ पा रहे हैं। ऐसा नहीं है कि साहब ने उन्हें भूलने की कोशिश नहीं की। इस बीच वे कई हसीनाओं से दिल लगाने की कोशिश की लेकिन कोई भी उनके दिल की गहराइयों में उतर नहीं पाई। पता चला है कि साहब का पहला प्यार किसी और की पत्नी बन गई और इन दिनों पति से अनबन भी चल रहा है। उधर साहब उसके साथ बिताए लम्हों को याद कर उदास हो जाते हैं। कहते हैं, 'दिल का क्या करें साहिब...।'
पीए नहीं डकैत चाहिए..
इन दिनों प्रदेश के माननीयों के यहां बैन के बावजूद ट्रांसफर, पोस्टिंग, ठेके और टेंडर उद्योग धड़ल्ले से चल रहे हैं। जब कोई गड़बड़ी प्रकाश में आता है तो सारा ठीकरा पीए के सिर पर फोड़ दिया जाता है। साड़ी घोटाला सामने आते ही महिला ओएसडी को हटा दिया गया जबकि वहाँ सारा कुछ बेहद करीबी रिश्तेदार देखते हैं। एक ओएसडी मेफेयर जैसे महंगे होटल में परमानेंट एक कमरा बुक कर पूजा पाठ की सामग्री वहीं लेते थे। क्या बिना मंत्री के सहमति के यह संभव था? किसी भी चीज की अति अच्छी नहीं होती, छलककर बाहर आ ही जाती है। फिर क्या था मंत्री ने उस डिप्टी कलेक्टर की छुट्टी कर दी। कई जगहों पर ऐसा भी होता है कि पीए खुद को मंत्री समझने लगते हैं। हाल ही में एक माननीय ने अपने पुत्र से भी प्रिय रहे पीए को चलता कर दिया। उस रिक्त पद की दौड़ में शामिल एक नुमाइंदे माननीय से मिलकर बाहर निकलते वक्त कहा कि आजकल मंत्रियों को पीए नहीं डकैत चाहिए।
मंत्री जी बारीक फिल्टर लगा रखे हैं..
सूबे के एक माननीय के बारे में कहा जाता है कि संसाधनों का दोहन करने में उनका कोई जवाब नहीं है। आधा दर्जन पीए और कई अघोषित सप्लायरों की भारी भरकम फौज है उनके पास। इससे आगे यह भी बताया जाता है कि सप्लाई के कार्यों में उनकी 50% की हिस्सेदारी भी है। उनके बारीकी से दोहन करने का ही नतीजा है कि प्रदेश भर में उनके विभाग के खिलाफ लोग शिकायत कर रहे हैं। लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने विभागों में अपनी निगरानी का दायरा बढ़ा दिया है छोटी-छोटी कुर्सियों पर बैठे अधिकारियों की जेब तक पर भी उनके लोगों की नजर है। जहां पहले कोई मंत्री ध्यान नहीं देते थे। अब तो वहां आलम यह है कि फेरबदल की आहट सुनते ही विभाग के नुमाइंदे खुश हो जाते हैं।
डिप्टी कलेक्टरों की मनमानी
इन दिनों राज्य में डिप्टी कलेक्टरवाद चरम पर है। आजकल वे अपनी तुलना आईएएस से करने लगे हैं। वे बाकायदा उदाहरण देते हैं कि जैसे आईएएस की पोस्टिंग कहीं भी हो सकती है वैसे वे भी मंत्रियों के यहां और विभागों में पदस्थापित हो रहे हैं। पिछली सरकार की तरह पूरा सिस्टम अपने हाथों में लेने पर आमादा हैं। एक माननीय के यहां डिप्टी कलेक्टर स्वयं को हिमालय पर्वत से भी विराट समझने लगे हैं। बताते हैं कि एक दो पेटी के काम करना तो दूर सुनते भी नहीं है पांच पेटी से उनकी शुरुआत होती है। उनके दरबार में लोक कल्याण तो आप भूल ही जाइए। खरीदी के हर टेंडर में माननीय के अलावा अपना अलग परसेंट तय कर रखे हैं। वहीं दूसरे माननीय के यहां डिप्टी कलेक्टर अपने ड्राइवर के माध्यम से आदान प्रदान करते हैं। हर ट्रांसफर लिस्ट में 20% नाम उनके खुद के कैंडिडेट्स के होते हैं जो ड्राइवर द्वारा फंसाए गए होते हैं।
पुछल्ला
एक कान के कच्चे मंत्री से उनके करीबी बेहद परेशान हैं। बाहर से जाने वाले बहरूपिये किस्म के लोग मंत्री को थोड़ा-मोड़ा सामग्री भेंटकर उनके पुराने लोगों के खिलाफ कान भरकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। बिना पड़ताल किए मंत्री भी उन पर यकीन कर लेते हैं। इससे मंत्री के पुराने लोग एक-एक कर छिटकते जा रहे हैं।
बूझो तो जानें..
0 क्या एक सहकारी नेता को एमडी ने हर बिल पर एक परसेंट लेने और मुंह बंद रखने की ताकीद दी है?
0 किस बैंक के अध्यक्ष चाय नाश्ते के बिल पर भी कमीशन मांग रहे हैं?
0 कम अवधि में 100 खोखे बंटोरने वाले एक डिप्टी कलेक्टर इन दिनों किस मंत्री के यहां हरियाली चट्ट करने में लगे हुए हैं?
0 राजधानी में बढ़ते हत्या की घटनाओं के पीछे क्या पुलिस कमिश्नरेट बनने के बाद नुमाइंदे पुलिसिंग छोड़कर दूसरे कामों में लग गए हैं?