कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को सुप्रीम राहत, कुछ शर्तों के साथ मिली अग्रिम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को जालसाजी और मानहानि के मामले में अग्रिम जमानत दे दी है. यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिश्वा सरमा की पत्नी रिकी भुइयां सरमा पर कथित तौर पर झूठे आरोप लगाने से जुड़ा है.
नई दिल्ली, 1 मई 2026. सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को जलसा जी और मानहानि के एक मामले में कुछ शर्तों के साथ अग्रिम जमानत दे दी है. यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिश्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा पर कथित तौर पर झूठे आरोप लगाने से जुड़ा है. फिलहाल, यह फैसला सिर्फ अदालत द्वारा पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रखने के एक दिन बाद आया है.
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सुरक्षित रख लिया था फैसला
सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई के दौरान पवन खेड़ा ने अदालत से कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आप ट्रायल का विषय है. उन्होंने कहा, " मेरे खिलाफ लगाई गई कुछ धाराएं जमानती है, जबकि अन्य में गिरफ्तार करके मुझे अपमानित करने की जरूरत नहीं है." उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें असम में उनके खिलाफ दर्ज मामले में अग्रिम जमानत नहीं मिलती है, तो गिरफ्तारी से पहले जमानत का मकसद ही खत्म हो जाएगा.
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चांदुरकर की बेंच ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. वहीं, पवन खेड़ा की ओर से अदालत में पेश होते हुए, सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है और उन्होंने दोहराया कि गिरफ्तारी अनावश्यक है.
पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत का हुआ विरोध
जबकि असम सरकार की तरफ से अदालत में पेश हुए, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत का पुरजोर विरोध किया. उन्होंने दलील दी कि कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने झूठे दावे करने के लिए पासपोर्ट समेत कई जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था. इसलिए, यह पता लगाने के लिए उनकी हिरासत जरूरी है कि इस काम में उनके साथ कौन-कौन लोग शामिल थे और क्या इसमें कोई विदेशी तत्व भी शामिल है. मेहता ने कहा कि (हिमंत बिश्वा सरमा की पत्नी पर) एंटीगुआ के पासपोर्ट होने का आरोप लगाया गया. एंटीगुआ वह देश है जहां भगोड़े जाते हैं. नागरिकता के बारे में लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से झूठे हैं. पासपोर्ट की कॉपी नकली है, छेड़छाड़ कर बनाई गई है.
सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "एक जांच एजेंसी के तौर पर जानना जरूरी है कि उन्होंने यह डॉक्यूमेंट कैसे नकली बनाया? अगर यह नकली है तो किसने उसे नकली बनाने में मदद की?"
पवन खेड़ा के खिलाफ कब दर्ज हुआ था मामला
बता दें कि मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के आरोप में यह मामला पवन खेड़ा के खिलाफ तब दर्ज किया गया, जब उन्होंने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि मुख्यमंत्री हिमंत बिश्वा सरमा की पत्नी के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्तियां हैं. इस मामले में पवन खेड़ा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी. असम पुलिस 7 अप्रैल को खेड़ा के दिल्ली स्थित घर गई थी, लेकिन वह वहां मौजूद नहीं थे.
पवन खेड़ा को तेलंगाना हाई कोर्ट ने दी थी राहत
● बाद में पवन खेड़ा ट्रांजिट बेल के लिए तेलंगाना हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. तेलंगाना हाई कोर्ट ने 10 अप्रैल को उन्हें एक हफ्ते की राहत दी, लेकिन असम के अदालत का रुख करने का भी निर्देश दिया.
● 15 अप्रैल को असम सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना हाई कोर्ट के 10 अप्रैल के आदेश पर रोक लगा दी.
● 17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांजिट जमानत की अवधि बढ़ाने से इनकार कर दिया.
● कोर्ट ने पवन खेड़ा से कहा कि वह इसके बजाय गुवाहाटी हाई कोर्ट में अर्जी दें. तब खेड़ा ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में अर्जी लगाई थी. लेकिन गुवाहाटी हाई कोर्ट ने 24 अप्रैल को पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी. इसके बाद, खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में मौजूदा याचिका दायर की और उन्हें आज शुक्रवार को अग्रिम जमानत मिल गई. यह कांग्रेस के लिए बहुत बड़ी राहत है.