खड़गे की अध्यक्षता में कांग्रेस की बैठक, डीएमके, टीएमसी के तेवर आक्रामक, संसद में रणनीति क्या?
परिसीमन को लेकर सियासत अब सीधी टकराव की राह पर पहुंच गई है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अगुवाई मे कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है, तो इस मामले में डीएमके और टीएमसी भी आक्रामक रूख अपनाए हुए हैं. महिला आरक्षण के साथ जुड़े परिसीमन पर विपक्ष छिपे एजेंडे का आरोप लगा रहा है, जिससे सियासी पारा चरम पर है और संसद में जोरदार भिडंत तय मानी जा रही है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
नई दिल्ली, 16 अप्रैल 2026। शिवसेना ( यूबीटी ) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि केवल वोट बैंक की तरह देखना बंद किया जाए. उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में सभी दलों की सहमति से पारित महिला आरक्षण कानून एक ऐतिहासिक कदम था, जिसका मकसद संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना था. हालांकि, उस समय भी विपक्ष ने यह स्पष्ट किया था कि इस कानून को लागू करने के लिए जनगणना या सीमांकन का इंतजार जरूरी नहीं है, लेकिन सरकार ने इस सुझाव को नजर अंदाज कर दिया.
प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि अब सरकार खुद सीटों की संख्या बढ़ाने की जरूरत स्वीकार कर रही है, जो पहले उठाई गई चिंताओं को सही साबित करता है. उन्होंने जोर देकर कहा कि देश की आधी आबादी को केवल चुनावी गणित का हिस्सा बनाकर नहीं रखा जा सकता, बल्कि उन्हें अपनी बात रखने की वास्तविक ताकत मिलनी चाहिए.
इंडिया गठबंधन की मीटिंग में मंथन
इसी मुद्दे पर रणनीति तय करने के लिए इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के दिल्ली स्थित आवास पर हुई. इस अहम बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी शामिल हुए. संसद के विशेष सत्र से पहले हुई इस बैठक में महिला आरक्षण विधेयक और लोकसभा सीटों के विस्तार पर साझा रूख तैयार करने पर चर्चा हुई.
डीएमके का विरोध, काले कपड़ों में संसद जाने का ऐलान
डीएमके सांसद दयानिधि मारन ने सीमांकन के विरोध में संसद में काले कपड़े पहनकर जाने की घोषणा की है. उन्होंने कहा कि प्रस्तावित सीमांकन से दक्षिण भारत के प्रदेशों का प्रतिनिधित्व घट सकता है, जबकि उत्तर भारत राज्यों की सीटें बढ़ेंगी. मारन ने केंद्र सरकार पर बिना व्यापक चर्चा के संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ने का आरोप लगाया. उन्होंने यह भी कहा कि
सरकार इस बिल को महिला आरक्षण के नाम पर पेश कर रही है, जबकि असली मुद्दा सीमांकन है.
चिदंबरम ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने लोकसभा सीटों के सीमांकन प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने की मांग करते हुए सीटों में 50% बढ़ोतरी के प्रस्ताव को भ्रामक करार दिया. कोयंबतूर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार जल्दबाजी में संसद सत्र बुलाकर यह बिल पास करना चाहती है, जबकि कई विपक्षी सांसद राज्यों में चुनाव के चलते मौजूद नहीं रह पाएंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष सीमांकन के खिलाफ नहीं है, बल्कि न्याय संगत और संतुलित प्रक्रिया चाहता है. चिदंबरम ने यह भी आरोप लगाया कि अगर संसद जल्द बुलाई गई, तो सांसदों को बिल के प्रावधानों को समझने का पर्याप्त समय नहीं मिलेगा.
इंडिया गठबंधन करेगा संयुक्त फैसला
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि इस मुद्दे पर इंडिया गठबंधन सामूहिक रूप से अपना रुख तय करेगा. उन्होंने बताया कि इस संबंध में बुलाई गई बैठक में सभी सहयोगी दल मिलकर रणनीति बनाई है. अब्दुल्ला ने सीमांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि पहले भी जम्मू कश्मीर में चुनाव क्षेत्रों का निर्धारण एक खास पार्टी को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया था.
समझिए क्या है सरकार की योजना
दरअसल, सरकार 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुला रही है. इस दौरान नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन लाकर 2029 से महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी है. इस कानून के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण दिया जाएगा. इसके लिए परिसीमन प्रक्रिया भी की जाएगी, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर करीब 850 तक की जा सकती है. ऐसे में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि परिसीमन से राज्यों के बीच सीटों का संतुलन बदल सकता है, जिससे कुछ राज्यों का राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है.
खड़गे की अध्यक्षता में कांग्रेस की बैठक, डीएमके - टीएमसी के तेवर आक्रामक
देशभर में महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर सियासत 7वें आसमान पर पहुंच गया है. ऐसे में अब इस मामले में सरकार के विरोध में कांग्रेस ने संसद के विशेष सत्र से पहले अपनी रणनीति तेज कर दी है. इसी सिलसिले में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर बुधवार को शीर्ष नेताओं की अहम बैठक हुई, जिसमें महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा की गई. बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तय किया कि संसद में इन दोनों मुद्दों पर सरकार को घेरा जाएगा. कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जो बिल ला रही है, उसकी मंशा ठीक नहीं है और इससे लोकतंत्र को नुकसान हो सकता है.