• लोक संगीत के पुरोधा खुमान साव; नयी पीढ़ी के कलाकारों के आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहे

    राजनांदगांव, 7 जून 2026। साहित्य संस्था साकेत साहित्य परिषद सुरगी द्वारा राजनांदगांव जिले के ग्राम सुंदरा में वरिष्ठ साहित्यकार कुबेर सिंह साहू की संपादित पुस्तक ' स्मृतियों के सुवासित पुष्प ' पर समीक्षा गोष्ठी आयोजित की गई। यह पुस्तकछत्तीसगढ़ी संगीत के अमर शिल्पी स्वर्गीय खुमान लाल साव की सुदीर्घ संगीत -साधना और उनसे जुड़ी स्मृतियों पर केंद्रित है । सामुदायिक भवन में  हुए इस कार्यक्रम में पहला सत्र वैचारिक (समीक्षा) गोष्ठी का रहा। दूसरे सत्र में कवि गोष्ठी  रखी गई। 

    लोक कलाकार भोलाराम साहू और कवि रूपल साहू के संयोजन में आयोजित कार्यक्रम में वैचारिक सत्र के मुख्य अतिथि दुर्ग के वरिष्ठ साहित्यकार बलदाऊराम साहू थे। पिछले सप्ताह (31 मई को) आयोजित समीक्षा गोष्ठी की अध्यक्षता दुर्ग के वरिष्ठ साहित्यकार और सेवानिवृत्त प्राचार्य  शिवबालक दास साहू ने की। विशेष अतिथि के रूप में  अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा, हिपेंद्र कुमार साहू सरपंच सुंदरा, प्रभात तिवारी, महेंद्र बघेल मधु, अरविंद कुमार लाल,अलख राम यादव, हर्षा देवांगन उपस्थित थे।

    मुख्य अतिथि बलदेव राम साहू ने 'स्मृतियों के सुवासित पुष्प'  की सराहना करते हुए कहा कि खुमान लाल साव की संगीत साधना में शास्त्रीय पक्ष भी बेहद मजबूत रहा। उन्होंने कहा कि खुमान संगीत की मधुरता ही इसका प्रमाण है तथा जनमानस में इसका प्रभाव है।कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए शिव बालक दास साहू ने कहा कि संगीत के प्रति खुमान साव जी का समर्पण और उनकी अनुशासनप्रियता ने उन्हें छत्तीसगढ़ी लोक संगीत की दुनिया में अमर कर दिया।
    साकेत साहित्य परिषद सुरगी के अध्यक्ष ओमप्रकाश साहू 'अंकुर' ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने कहा कि कुबेर सिंह साहू द्वारा स्वर्गीय खुमान लाल साव की संगीत -साधना और उनके व्यक्तित्व पर आधारित यह पुस्तक  एक बड़ी उपलब्धि है। दाऊ रामचंद्र देशमुख के बाद खुमानलाल साव ने चंदैनी गोंदा के माध्यम से छत्तीसगढ़ी लोक संगीत को नयी ऊँचाइयाँ दीं।  

    कवि रुपल साहू ने आधार वक्तव्य में कहा कि लोक संगीत के पुरोधा खुमान सर ने नयी पीढ़ी के कलाकारों को लगातार अपने साथ जोड़कर आगे बढ़ने के लिए अवसर प्रदान किया। लोक संगीत के संवर्धन में उनका योगदान अतुलनीय है। समरस साहित्य संस्थान छत्तीसगढ़ इकाई के प्रांताध्यक्ष अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा 'अकाट्य ' ने कहा कि खुमानलाल साव का व्यक्तित्व अनुशासन प्रिय रहा है,  जिससे नयी पीढ़ी को प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ की कला, संस्कृति और अस्मिता के लिए काम करना चाहिए। 

    कवि गोष्ठी में पढ़ी गईं  विविध  रचनाएँ

    द्वितीय सत्र में सरस कवि गोष्ठी का आयोजन अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा  की अध्यक्षता में किया गया ।प्यारे लाल देशमुख निकुम, देवजोशी गुलाब बालोद, सुरेन्द्र कुमार साहू सुंदरा, विनोद कुमार साहू सुंदरा, देवेश देवांगन राजनांदगांव विशेष अतिथि थे। काव्य पाठ करने वालों में  राजकुमार चौधरी रौना, प्रभात तिवारी, डामनलाल डोंगरे, आनंदराम सार्वा, गुमान सिंह साहू, नंद किशोर साव नीरव, भोला राम साहू, पवन यादव पहुना, फकीर प्रसाद साहू, रूपल साहू, डोहर दास साहू, चंचल साहू, बलराम सिन्हा, धनंजय साहू दौना, एस कुमार साहू मोखला, अरविंद कुमार लाल, अलख राम यादव, ओमप्रकाश साहू अंकुर, लखन लाल साहू लहर, हर्षा देवांगन शामिल है।

    कवि गोष्ठी का संचालन परिषद के उपाध्यक्ष पवन यादव 'पहुना' ने और   आभार प्रदर्शन सचिव राज कुमार चौधरी 'रौना': ने किया। इस अवसर पर  राजेंद्र कुमार देवांगन, भूषण यादव, गैंद लाल साहू, रामस्वरूप साहू, संतराम निर्मलकर, मीना साहू, हेमू साहू, राधा यादव, चुरामन लाल साहू, राजू, हरि राम सिन्हा, राजेन्द्र गोस्वामी सहित बड़ी संख्या काव्य -रसिक उपस्थित थे।