भोपाल त्रासदी से लेकर इंदिरा गांधी तक... देश की धड़कनें कैद करने वाले मशहूर फोटोग्राफर रघु राय नहीं रहे
मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का 83 वर्ष की आयु में रविवार देर शाम निधन हो गया. उन्होंने 50 साल से अधिक समय तक भारतीय समाज, राजनीति और ऐतिहासिक घटनाक्रमों को अपने कमरे में कैद किया. भोपाल त्रासदी की उनकी तस्वीरें विश्व भर में चर्चित रही. समाचार संपादक देहाती की यह विशेष रिपोर्ट:-
नई दिल्ली, 27 अप्रैल 2026. भारत के मशहूर फोटोग्राफर और दुनिया के प्रतिष्ठित फोटो पत्रकारों में शुमार रघु राय का रविवार शाम को निधन हो गया. वे 83 वर्ष के थे. रघु राय के परिजनों ने निधन की पुष्टि उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल के जरिए दी. परिजनों ने बताया कि सोमवार शाम 4 बजे दिल्ली के लोधी शमशान घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया.
रघु राय को भारतीय फोटोग्राफी और फोटो पत्रकारिता का ' जनक' माना जाता था. उनका करियर 50 वर्षों से अधिक समय तक का रहा, जिसमें उन्होंने भारत और दुनिया की कई महत्वपूर्ण घटनाओं को अपने कैमरे में कैद किया. उनकी ली गई तस्वीर महज फोटोज नहीं बल्कि इतिहास का जीवंत दस्तावेज मानी जाती है. 1971 में भारत ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से नवाजा था. उनकी सबसे चर्चित तस्वीरों में से एक ' भोपाल गैस त्रासदी के बाद की वह तस्वीर है, जिसमें एक मासूम बच्चे का निर्जीव शरीर दिखता है. इस तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान इस त्रासदी की ओर खींचा और कॉर्पोरेट जिम्मेदारी पर वैश्विक बहस छेड़ दी.
रघु राय के निधन पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी गहरा शोक व्यक्त किया है. पीएम मोदी ने उन्हें एक ऐसा रचनात्मक स्तंभ बताया जिन्होंने अपने लेंस के जरिए भारत की जीवंतता और विविधता को दुनिया के सामने रखा. बता दें कि रघु राय ने भारत की कई प्रमुख हस्तियों को भी अपने कैमरे में उतारा. उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ लंबे समय तक काम किया और उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षणों को कैद किया. इसके अलावा, मदर टेरेसा पर उनकी फोटोग्राफी बेहद प्रसिद्ध रही. संत घोषित होने से पहले ही उन्होंने 'संत मदर ' नाम से उन पर एक किताब प्रकाशित की थी.
1942 में अविभाजित भारत के झांग (अब पाकिस्तान) में जन्मे रघु राय ने 1962 में फोटोग्राफी को अपना करियर बनाया. उन्होंने 'द स्टेट्समैन ' से अपनी शुरुआत की और बाद में 'इंडिया टुडे ' के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे. रघु राय दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित फोटोग्राफी संस्था 'मैग्नम फोटोज ' के सदस्य बनने वाले शुरुआती भारतीयों में से एक थे. उन्होंने अपने जीवन में 18 से अधिक किताबें भी लिखी. ओम शांति!