कोयले की काली कमाई, हाथ में कट्टा और बम! सिंडिकेट टूटने के बाद डेंजर जोन बना धनबाद
झारखंड का धनबाद शहर धरती के नीचे जल रहे कोयले से नहीं, बल्कि छोटे गैंग के बढ़ते प्रभाव से तप रहा है. धनबाद में सिंडिकेट खत्म हो गए, लेकिन अवैध कोयले से होने वाली कमाई ने छोटे गैंग्स को पैदा कर दिया है. ये अवैध कोयले की कमाई से कट्टा और हथियार खरीद रहे हैं. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
धनबाद, 11 जून 2026.पिछले दिनों हुई घटनाओं में यह स्पष्ट हुआ है कि धनबाद का पुराना 'माफिया राज ' अब बिखर चुका है और उसकी जगह छोटे-छोटे स्थानीय गिरोहों यानी ' टुकड़े-टुकड़े गैंग्स ' ने ले ली है. एक दौर था जब धनबाद के अपराध तंत्र का एक निश्चित पदानुक्रम था. कोयला माफिया या वासेपुर जैसे बड़े सिंडिकेट पूरे कोयलांचल को नियंत्रित करते थे. उनके अपराध करने के अपने नियम और सीमाएं थी. लेकिन अब यह सीमाएं टूट चुकी है. बड़े माफिया सरगनाओं के जेल जाने या नेपथ्य में चले जाने के बाद जो ' पॉवर वैक्यूम' पैदा हुआ, उसे भरने के लिए नए रंगरुटों और छोटे अपराधियों ने सिर उठा लिया है.
नए गैंग का जलवा
ये नई लड़की किसी एक आका के प्रति वफादार नहीं है. ये तात्कालिक मुनाफे और वर्चस्व के लिए कुछ भी करने को तैयार है, जिससे कोयलांचल का अपराध अधिक हिंसक और अप्रत्याशित हो गया है. इस पूरी अराजकता के पीछे अवैध कोयला उत्खनन से हो रहे करोड़ों रुपए का काला खेल चल रहा है. रातों-रात अमीर बनने की चाहत, अवैध कोयला खनन से जो काली कमाई हो रही है, उसे स्थानीय दबंग रातों-रात "धन- पशु" बन रहे हैं. इसी पैसे का एक बड़ा हिस्सा बिहार के सीमावर्ती जिलों से अत्याधुनिक अवैध हथियार खरीदने में किया जा रहा है.
क्या कहते हैं ग्रामीण?
कतरास और घनुडीह की घटनाओं से स्पष्ट है कि ग्रामीण अब अपने अस्तित्व और सुरक्षा के लिए इस अवैध धंधे का विरोध कर रहे हैं. लेकिन, मुनाफे के अंधे खेल में डूबे दबंग इस विरोध को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और ग्रामीणों की आवाज दबाने के लिए सरेआम गोलियां बरसाई जा रही है या बम फोड़े जा रहे हैं ताकि ग्रामीण दहशत में आए और अवैध कोयला खनन या कारोबार को प्रभावित न करें.
निशाने पर पुलिस
मंगलवार को कतरास के सोनरडीह में स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अपराधियों ने पुलिस तक को निशाने पर ले लिया, इसके बाद कई पुलिस थानों की फोर्स बुलानी पड़ी. वहीं, बुधवार को घनुडीह में 'सिंह नेचुरल आउटसोर्सिंग परियोजना' के विस्तार को लेकर हुआ बवाल कॉर्पोरेट लापरवाही का बड़ा प्रमाण है.
घनी आबादी वाली चीना कोठी बस्ती के पास नियम के विरुद्ध की जा रही ओबी डंपिंग का विरोध करने पर ग्रामीणों के साथ मारपीट और फायरिंग की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मेयर संजीव सिंह ने मौके पर पहुंचकर कहा कि जब तक प्रशासन, कंपनी और ग्रामीणों के बीच त्रिपक्षीय मीटिंग नहीं हो जाती, तब तक वहां किसी भी नए कार्य या डंपिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी.
खौफनाक अतीत की परछाई
धनबाद की बस्तियों में जो आज गोलियां चल रही हैं, वे समाज में एक 'साइकोलॉजिकल टेरर ' (मानसिक खौफ) पैदा करने की कोशिश है. इसका सबसे वीभत्स रूप 31 जुलाई 2023 की आधी रात को झरिया के धनंजय यादव हत्याकांड में दिखा था. अपराधियों ने धनंजय के घर में घुसकर, हथियार के बल पर पत्नी और बेटियों को बंधक बना लिया और फिर एक बेबस पिता के सामने उसकी बेटियों की जान से करने की धमकी देकर, खुद धनंजय का गला रेत दिया. आज भी जब ग्रामीण अवैध खनन का विरोध करते हैं, तो अपराधी इसी तरह के खौफनाक इतिहास की धौंस दिखाकर उनकी आवाज को बंद करना चाहते हैं.