एनडीए को हराने के लिए एकजुट इंडिया ब्लॉक, राहुल गांधी ने विपक्षी नेताओं के साथ की मीटिंग
हाल ही में हुई इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सहयोगी दलों के नेताओं के सामने हम संबोधन किया और फ्यूचर स्ट्रेटेजी पर फोकस किया. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट:-
नई दिल्ली, 15 जून 2026. हाल ही में हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक में लोकसभा नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सहयोगी दलों के नेताओं के सामने अहम उद्बोधन दिया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना भाषण का ऑडियो जारी किया. इसमें उन्होंने विपक्षी दलों से मतभेद को भुलाकर "प्रतिरोध की राजनीति " अपनाने का आह्वान किया. राहुल ने कहा कि राजनीतिक परिस्थितियों में पारंपरिक चुनावी रणनीतियां पर्याप्त नहीं है.
इंडिया ब्लॉक की बैठक को राहुल गांधी ने किया संबोधित
इस मीटिंग के दौरान राहुल गांधी ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि कांग्रेस पार्टी बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ किसी भी तरह के समझौते की कल्पना नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि कांग्रेस का मूल चरित्र एक "प्रतिरोध आंदोलन" का रहा है. पार्टी संविधान तथा लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करती रहेगी.
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के बारे में जो बातें कही गई, उनका जवाब देना मेरा काम नहीं है. मेरा काम तो शैव परंपरा की तरह सब कुछ अपने भीतर समाहित कर लेना है. जैसे नीलकंठ शिव ने विषपान किया था. मेरे या कांग्रेस पार्टी के खिलाफ आपके मन में जो भी आलोचना है. हम उसे मुस्कुराते हुए स्वीकार करेंगे.
सूत्र बताते हैं कि राहुल गांधी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि विपक्ष को यह समझने की जरूरत है कि 2024 के लोकसभा चुनाव का राजनीतिक संदेश भाजपा के खिलाफ था. उन्होंने दावा किया कि "हम 2024 का चुनाव हारे नहीं थे". विपक्षी दलों को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए. इस बैठक में राहुल गांधी ने विपक्षी दलों के नेताओं को आश्वासन दिया. उन्होंने कांग्रेस गठबंधन को एकजुट रखने के लिए हर निंदा और असहमति को स्वीकार करने को राजी हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की भूमिका सभी सहयोगी दलों को "प्रेम और स्नेह " के साथ जोड़कर रखने की है.
राहुल गांधी ने विपक्ष के नेताओं के साथ की मीटिंग
राहुल गांधी ने कहा कि आने वाले समय में विपक्ष को "रेजिस्टेंस मोड " में काम करना होगा. उन्होंने भारत जोड़ो यात्रा, शिक्षा और सामाजिक मुद्दों पर आंदोलनों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता के बीच लगातार संघर्ष और प्रतिरोध ही सबसे प्रभावी राजनीतिक हथियार साबित होगा.
राहुल गांधी ने कहा कि मेरे लिए यह कोई राजनीतिक कर्तव्य नहीं रह गया है. यह एक धार्मिक और आध्यात्मिक कर्तव्य है. इस समूह को एकजुट रखने और सफल बनाने के लिए मुझे जितना भी अपमान सहना पड़े, मैं सहने को तैयार हूं. राहुल ने कहा ममता जी लगभग 90% आश्वस्त है कि उनका चुनाव उनसे छीना गया. उद्धव जी लगभग 40%, तेजस्वी जी भी लगभग 40% आश्वस्त हैं. मैं कहता हूं-- हंड्रेड प्रतिशत चुनाव चोरी किए जा रहे हैं. यह भी समझिए कि सोशल मीडिया पर प्रभाव रातों-रात नहीं बनता. मेरे यूट्यूब पर एक करोड़ फॉलोअर्स हैं, लेकिन मेरा अकाउंट पूरी तरह दबाया जा रहा है. राहुल के मुताबिक, पूरा तंत्र, मीडिया, सोशल मीडिया, कानूनी व्यवस्था, नौकरशाही और खुफिया एजेंसियां, इस सरकार को सत्ता में बनाए रखने के लिए एक दिशा में काम कर रहे हैं.
राहुल गांधी ने कहा कि लोग पूछते हैं कि नीतीश जी क्यों चले गए. वह मेरे कारण नहीं था, न ही कांग्रेस के कारण. राहुल गांधी ने कथित तौर पर आरोप लगाया कि भाजपा ने राज्य की प्रमुख संस्थानों पर प्रभाव स्थापित कर लिया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष को यह मानकर चलना चाहिए कि राजनीतिक संघर्ष अब केवल चुनावी मैदान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा का भी सवाल है. इसके अलावा कांग्रेस नेता ने विपक्षी नेताओं से हताश और निराशा छोड़ने एवं भाजपा को चुनौती देने के लिए एकजुट रणनीति बनाने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष साथ खड़ा रहता है तो आने वाले चुनावों में बीजेपी को पराजित किया जा सकता है. इंडिया गठबंधन की बैठक में राहुल गांधी का यह संबोधन विपक्षी खेमे के लिए एक रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है.