1.5 करोड़ की एलपीजी चुराई, पूर्व मंत्री के दामाद, जिला खाद्य अधिकारी समेत 4 गिरफ्तार
मिली जानकारी के अनुसार महासमुंद के जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव, गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर, ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर ने मिलकर 1.5 करोड़ रुपए की LPG गैस चुराई।
महासमुंद, 9 मई 2026। महासमुंद पुलिस ने एक बड़ी गैस चोरी का पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने सीधे महासमुंद के जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव और पूर्व राज्य मंत्री पूनम चंद्राकर केदारनाथ एवं गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर को गिरफ्तार किया है। वहीं ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार है।
पुलिस जांच में पता चला है कि महासमुंद के जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव, गैस एजेंसी संचालक पंकज चंद्राकर, ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर ने मिलकर 1.5 करोड़ रुपए की LPG गैस चुराई। दरअसल दिसंबर 2025 में पुलिस ने 90 मीट्रिक टन LPG ले जा रही 6 गैस कैप्सूल गाड़ियों को जब्त किया था और इसे थाने में खड़ी कर दी गई।
अब पुलिस ने तीनों मुख्य आरोपियों अजय यादव (जिला खाद्य अधिकारी), मनीष यादव (सहायक खाद्य अधिकारी) और पंकज चंद्राकर (एजेंसी संचालक) को गिरफ्तार कर लिया है। पंकज पूर्व राज्य मंत्री पूनम चंद्राकर के बड़े भाई धन्नजय चंद्राकर का दामाद है। वहीं जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव इससे पहले प्रदेश के खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के ओएसडी नियुक्त थे। ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हैं। जिनकी तलाश की जा रही है।
बिना वजन किए एलपीजी से भरे वाहनों को सौंपें थे
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ है कि, खाद्य अधिकारी अजय यादव, सहायक खाद्य अधिकारी मनीष यादव और गौरव गैस एजेंसी के संचालक पंकज चंद्राकर ने एक सोची-समझी साजिश रची थी। सिंघोड़ा थाना से लेकर अभनपुर तक 200 किमी में दर्जनों धर्मकांटा थे उसके बाद भी बिना तौल किए गैस से भरे 6 बड़े कैप्सूल (टैंकर) को सीधे अभनपुर स्थित ठाकुर पेट्रोकेमिकल को सौंप दिया। बाजार में इस गैस की कीमत करीब 1.5 करोड़ रुपए से अधिक आंकी जा रही है। टैंकर से गैस निकाल कर बेचने के बाद 5 गाड़ियों का वजन 6 अप्रैल को और 1 गाड़ी का वजन 8 अप्रैल को कराया गया और बताया गया कि टैंकर खाली था।
ठाकुर पेट्रोकेमिकल के मालिक फरार
पुलिस को इस पूरे खेल में अभनपुर के ठाकुर पेट्रोकेमिकल के संचालकों की संलिप्तता के पुख्ता सबूत मिले हैं। हालांकि, पुलिस की दबिश से पहले ही फर्म के मालिक संतोष ठाकुर और सार्थक ठाकुर फरार हो गए हैं। पुलिस की टीमें उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं।
क्या है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। थाने में किसी भी हादसे के खतरा देखते हुए, इन ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के लिए महासमुंद पुलिस ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजा।इसके बाद कलेक्टर ने खाद्य विभाग को ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के निर्देश दिए। इसी आदेश के तहत 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर से संपर्क किया और 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए कहा।
खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी और मनीष यादव की मौजूदगी में संतोष ठाकुर को ये 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए सौंप दिए। संतोष अपने स्टाफ की मदद से सभी गाड़ियां सिंघोड़ा थाना से रायपुर के अभनपुर के ग्राम उरला स्थित अपने प्लांट ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ले गया।
8 दिनों में प्लांट के बुलेट टैंकों में खाली किया गैस
इन 8 दिनों में एक-एक कर कैप्सूल ट्रकों को प्लांट के अंदर मौजूद बुलेट टैंकों में खाली किया गया। जब वे टैंक भी भर गए तो गैस को कंपनी के मालिकाना और वहां चल रहे दो निजी टैंकरों में भर दिया गया। इसके बावजूद चोरी की गई गैस बची रह गई, जो तय क्षमता से ज्यादा थी। इसके बाद रायपुर की अलग-अलग एजेंसियों और प्लांटों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेजी गई।
वजन में देरी का मुख्य कारण यह रहा कि कैप्सूल ट्रकों को समय पर खाली नहीं किया गया और प्लांट में एक साथ 6 कैप्सूल खाली करने की कैपेसिटी भी नहीं थी।इसके बाद कंपनी मालिक ने प्रशासन को बताया कि सभी एलपीजी कैप्सूल ट्रक खाली हैं। इसके बाद जब पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरा घोटाला सामने आया।
इतनी बड़ी मात्रा में लीकेज असंभव
इस पूरे मामले में जब राष्ट्रीय स्तर के एक्सपर्ट की मदद से जांच की गई तो पाया गया कि कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित था और इतनी बड़ी मात्रा में गैस का लीकेज होना संभव नहीं था। इससे साफ हुआ कि गैस जानबूझकर किसी ने निकाली है। एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि बिना किसी बड़ी दुर्घटना के 3 महीने में एक कैप्सूल से 20 टन गैस का निकल जाना संभव ही नहीं है।
दस्तावेज में जितनी गैस खरीदी उससे 3 गुना बेची
जब्त दस्तावेजों की जांच में पता चला कि जितनी गैस खरीदी गई थी, उससे कई गुना ज्यादा बिक्री दिखाई गई है। 3 दिन की जांच और दस्तावेजों की चेकिंग में बड़ी गड़बड़ी सामने आई। रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रोकेमिकल कंपनी ने सिर्फ 47 टन एलपीजी गैस खरीदी थी, लेकिन कागजों में 107 टन गैस की बिक्री दिखाई गई। यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई, जो असल में खरीदी ही नहीं गई थी। इसके अलावा कच्चे रजिस्टर में भी और थोक बिक्री का रिकॉर्ड मिला है, जिससे घोटाले का पता चला।
कंपनी का स्टाफ गिरफ्तार, मालिक डायरेक्टर फरार
इससे पहले पुलिस ने कंपनी के स्टाफ निखिल वैष्णव (41) को गिरफ्तार किया था, जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर (मालिक) और अन्य डायरेक्टर के साथ प्लांट मैनेजर फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है। इसके अलावा पुलिस ने 7 एलपीजी टैंकर, 4 बड़े बुलेट टैंक, 100 गैस सिलेंडर, कंप्यूटर, DVR और कई दस्तावेज जब्त किए थे।