• पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बने शुभेंदु अधिकारी, पीएम मोदी और अमित शाह से लिया आशीर्वाद

    शुभेंदु को साल 2020 तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नंबर दो माना जाता था, लेकिन पार्टी में अभिषेक बनर्जी के बढ़ते  प्रभाव ने उनको धीरे-धीरे हाशिए पर पहुंचा दिया. बाद में 2021 के चुनाव के ठीक पहले उन्होंने बीजेपी का दामन थामा था. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट:-

    कोलकाता, 9 मई 2026. पश्चिम बंगाल में शनिवार को एक नए  राजनीतिक युग की शुरुआत हुई, जब शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. वह प्रदेश में इस शीर्ष पद पर आसीन होने वाले  पहले भाजपा नेता हैं.15 वर्षों तक बंगाल में ममता बनर्जी का शासन रहा. अब बंगाल को आगे ले जाने की जिम्मेदारी शुभेंदु की है. अधिकारी के अलावा पांच भाजपा विधायकों ने भी कैबिनेट मंत्री पद की शपथ ली है. शपथ लेने वालों में - दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तोनिया, छुदिराम टुडू और निशीथ प्रमाणिक का नाम है.

    शपथ ग्रहण समारोह कोलकाता के विख्यात  ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सुबह 11 बजे शुरू हुआ. यह परेड ग्राउंड जनसभाओं के माध्यम से बंगाल की राजनीतिक परिदृश्य का केंद्र रहा है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए. भाजपा ने समारोह के लिए रविंद्र जयंती (9 मई, रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती) का दिन चुना. यह बीजेपी को चुनने वाले मतदाताओं के लिए एक सांस्कृतिक संकेत है.

    पीएम मोदी ने पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मंत्रिमंडल का अभिवादन किया 
    शपथ ग्रहण समारोह के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के नव नियुक्त मंत्रिमंडल का अभिवादन किया. वहीं राज्य के राज्यपाल आरएन रवि ने मुख्यमंत्री शुभेंदु समेत सभी पांचो मंत्रियों को  पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई.

    पीएम मोदी ने वहां मौजूद माखनलाल सरकार के पैर छुए 

    पीएम नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में भाजपा के सबसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं में से एक माखनलाल सरकार का अभिनंदन किया और उनका आशीर्वाद लिया. 1952 में, माखनलाल सरकार को कश्मीर में तब गिरफ्तार किया गया था जब वे  वहां भारतीय तिरंगा फहराने के आंदोलन के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ थे. 98 साल की आयु में, माखनलाल सरकार आजादी के बाद राष्ट्रवादी आंदोलन से जुड़े हुए रहे हैं.