• मेरठ से प्रयागराज 594 किमी का सफर 6 घंटे में,  सबसे लंबे ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन

    यूपी के 12 जिलों को जोड़ने वाली देश की सबसे लंबी ग्रीन फील्ड गंगा एक्सप्रेसवे बुधवार से प्रारंभ हो गया। मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी विशाल सिक्सलेन  गंगा एक्सप्रेसवे से अन्य एक्सप्रेस वे तथा हाईवे के जुड़ जाने से पूरे यूपी की कनेक्टिविटी को बढ़ गई है। वहीं प्रयागराज- मेरठ होकर चार धाम यात्रा जाने वाले यात्रियों का भी ट्रैवल टाइमिंग कम हो गया है।प्रधानमंत्री ने बुधवार को 36,230 करोड़ रुपये की लागत से बने गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया, जिससे मेरठ-प्रयागराज यात्रा का समय कम हो जाएगा।
     
    वाराणसी, 30 अप्रैल 2026। देश का सबसे लंबा ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे बुधवार से प्रारंभ हो गया। मेरठ- प्रयागराज 594 किमी विशाल सिक्सलेन एक्सप्रेसवे से यूपी के 12 जिले आपस में जुड़ गए हैं। अब 12 घंटे की बजाय 6 घंटे में प्रयागराज से मेरठ पहुंच जा सकता है। प्रयागराज- मेरठ होकर चार धाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों को काफी सुगम हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित थे। गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा एक्सप्रेसवे और भारत की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड राजमार्ग परियोजनाओं में से एक है। लगभग 36,230 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से निर्मित यह विशाल छह लेन का एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक 594 किलोमीटर तक फैला हुआ है। भविष्य में इसे आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है।
     
    मुख्य विवरण एक नज़र में
    लंबाई: 594 किमी
    लागत: 36,230 करोड़ रुपये
    लेन: छह (आठ तक बढ़ाई जा सकती हैं)
    डिजाइन गति: 120 किमी प्रति घंटा तक
    मार्ग: मेरठ से प्रयागराज
    12 जिले: यह एक्सप्रेसवेमेरठ, हापुड, बुलन्दशहर, अमरोहा, संभल, बदायूँ, शाहजहाँपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज से होकर गुजरता है।
     
    गंगा एक्सप्रेसवे का क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
    गंगा एक्सप्रेसवे से 12 जिलों को जोड़कर एक 'रेखीय आर्थिक क्षेत्र' बनने की उम्मीद है, जिससे औद्योगिक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निवेश आकर्षित होगा। यह एकीकृत दृष्टिकोण क्षेत्रीय असमानताओं को काफी हद तक कम कर सकता है और पूरे उत्तर प्रदेश में आर्थिक विकास को गति दे सकता है। एक्सप्रेसवे से माल परिवहन में तेजी आएगी, जिससे उद्योग अधिक कुशल बनेंगे और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
         
    इससे आम लोगों को कैसे फायदा होगा?
    आम यात्रियों के लिए सबसे बड़ा फायदा समय की बचत है। मेरठ और प्रयागराज के बीच की यात्रा, जिसमें वर्तमान में लगभग 10 से 12 घंटे लगते हैं, अब केवल 6 से 8 घंटे में पूरी हो जाएगी। यह सिर्फ एक राजमार्ग से कहीं अधिक है। गंगा एक्सप्रेसवे को महज एक सड़क के रूप में नहीं, बल्कि एक आर्थिक गलियारे के रूप में विकसित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मार्ग पर 12 एकीकृत विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (आईएमएलसी) स्थापित करने की योजना बनाई है।
     
    भूमि का निर्धारण: 6,507 एकड़
    प्राप्त निवेश प्रस्तावों की संख्या: 987
    प्रस्तावित निवेश: लगभग 47,000 करोड़ रुपये
    इन औद्योगिक केंद्रों से हजारों रोजगार सृजित होने और विनिर्माण, भंडारण, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रसंस्करण और ई-कॉमर्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
     
    गंगा एक्सप्रेसवे का रणनीतिक महत्व
    शाहजहाँपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी एक विशेष हवाई पट्टी का निर्माण किया गया है। इसका उपयोग लड़ाकू विमानों द्वारा आपातकालीन लैंडिंग के लिए किया जा सकता है, जिससे इस एक्सप्रेसवे को रणनीतिक रक्षा महत्व भी प्राप्त होता है।
     
    गंगा एक्सप्रेसवे कई प्रमुख राजमार्गों से निर्बाध रूप से जुड़ेगा, जिनमें शामिल हैं:
    ● यमुना एक्सप्रेसवे
    ● आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे
    ● जेवर लिंक एक्सप्रेसवे
    ● नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के कनेक्टिविटी मार्ग
    इससे उत्तर प्रदेश के बढ़ते एक्सप्रेसवे नेटवर्क को और मजबूती मिलेगी।
     
    गंगा एक्सप्रेसवे क्यों महत्वपूर्ण है?
    गंगा एक्सप्रेसवे पश्चिमी, मध्य और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ता है, जिससे क्षेत्रों के बीच विकास के अंतर को पाटने में मदद मिलती है। इससे उद्योग, पर्यटन, कृषि, रियल एस्टेट और लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।