• फर्जी IAS विप्रा की कहानी: खुद ही कर लिया अपना प्रमोशन,  एसयूवी पर लिखा एडीएम, हुई गिरफ्तार

    बरेली में खुद को आईएएस अफसर बताने वाली विप्रा शर्मा को उसकी दो बहनों के साथ पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. तीनों बहनों पर लाखों रुपए की ठगी का आरोप है. पुलिस ने इस फर्जी आईएएस विप्रा शर्मा से पूछताछ की तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आई. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-

    बरेली, 1 मई 2026. यूपी के बरेली में फर्जी  आईएएस बनी महाधुर्त ठगनी विप्रा शर्मा खुद को अफसरों जैसा ढालने के साथ ही बेरोजगार लोगों से ठगी करती रही. रुतबा बढ़ाने के चक्कर में प्रमोशन का ढिंढोरा पीटकर खुद ही एसडीएम से डीएम बन बैठी. एएसपी बरेली पंकज श्रीवास्तव एवं बारादरी थाना इंचार्ज  विजेंद्र सिंह ने पूछताछ की तो विप्रा शर्मा ने बताया कि उसके पिता कई साल पहले बरेली में सिंचाई विभाग के प्रशासनिक अधिकारी थे. गोल्डन ग्रीन पार्क में उन्होंने मकान बनाया. उसका बचपन यही बीता. विप्रा शर्मा ने रुहेलखंड यूनिवर्सिटी से इतिहास और अंग्रेजी में एमए किया एवं आगरा यूनिवर्सिटी से इतिहास में पीएचडी की है. ऐसा दावा विप्रा ने किया, लेकिन प्रमाण नहीं दे सकी.

    विप्रा ने बताया कि पिता चाहते थे बेटी प्रशासनिक अफसर बने, इसलिए उसने भी मेहनत से पढ़ाई की और वर्ष 2012 से 2020 तक चार बार परीक्षा दी लेकिन कामयाबी नहीं मिली तो खुद को अधिकारी मान लिया. बड़ी बहन शिखा ने विप्रा को एसडीएम बताना शुरू किया. विप्रा ने उन दिनों पुरानी काले रंग की एक कार खरीदी, जिस पर आगे एसडीएम लिखा था. उन दिनों उसने खुद को एसडीएम बात कर  बेरोजगारों से खूब ठगी की.

    लखनऊ जाकर भेजते थे डाक, वेतन भी ऑनलाइन भेजा 

    विप्रा की ठगी रकम तीनों बहनों के अलग-अलग बैंक खातों में  जमा होती थी. विप्रा ने ठगी के रुपए से सबसे पहले पवन बिहार में अपनी ममेरी बहन दीक्षा का आलीशान मकान तैयार कराया. इस मकान में ही तीनों बहनें  फर्जी नियुक्ति पत्र बनाती थी. तीनों बहनों ने बेहद शातिराना तरीके से ठगी की. इनमें से ही कोई लखनऊ जाकर डाक के जरिए नियुक्ति पत्र भेजती थी ताकि किसी को शक ना हो. तीनों बहनों ने पुलिस हिरासत में कबूला कि कुछ लोगों के खातों में उन्होंने कुछ महीने तक ऑनलाइन वेतन भी भेजा ताकि उनको सरकारी नौकरी का भरोसा हो जाए.

    सफेद एसयूबी खरीद कर बढ़ाया रुतबा, हूटर लगाया

    विप्रा शर्मा ने बताया कि दोनों बहनों ने काफी धन जमा कर लिया और फिर ठगी के धंधे में अपनी ममेरी बहन दीक्षा पाठक को भी शामिल कर लिया. दीक्षा कुंवारी है और उसके माता-पिता नहीं है. दीक्षा और शिखा ने लोगों को बताना शुरू किया कि विप्रा का प्रमोशन हो गया है और वह एसडीएम से डीएम वित्त राजस्व पद पर हो गया है. तैनाती स्थल के बारे में वह कभी गजरौला तो कभी अमरोहा बता देती थी. बताते हैं कि, ठगी के रुपए से इन्होंने करीब 27 लाख रुपए की एसयूवी खरीदी.  इस कार पर नीली बत्ती और हूटर लगाकर तीनों बहनें चलती थी. कार पर आगे एडीएम एफआर भी लिख रखा था.

    इंजीनियर पति से हो चुका था तलाक 

    एएसपी श्रीवास्तव ने बताया कि विप्रा शर्मा की शादी यूपी के बदायूं में एक केमिकल इंजीनियर से वर्ष 2017 में हुई थी, लेकिन शादी ज्यादा दिन टिक नहीं पाई. साल 2020 में उसने पति से तलाक ले लिया और पिता के घर ही रहने लगी. शिखा ने समाजशास्त्र में एमए किया है. उसकी शादी बरेली में ही हुई है और पति किसी कंपनी में मैनेजर हैं. दीक्षा ने शहर के एक निजी कॉलेज से एमएसी की है.

    युटुबर भी सिस्टर गैंग के संपर्क में, तहकीकात आरंभ

    पुलिस को शक है कि  इस गैंग में कुछ पुरुष सदस्य भी शामिल है. कुछ युटुबर भी उनके सहयोगी बताई जा रहे हैं. सूत्र बताते हैं कि इन्हीं में से एक से इनका रुपए के लेनदेन पर विवाद हो गया था. इसके बाद विप्रा और शिखा को कुछ लोगों ने ब्लैकमेल कर वसूली  भी की. ऑनलाइन लेनदेन में भी इस तरह की गतिविधियां स्पष्ट हुई है.

    ऐसे पकड़ी गई तीनों बहनें 

    8 वर्ष तक सिविल सेवाओं की तैयारी के बावजूद कामयाबी नहीं मिली  तो विप्रा शर्मा खुद को आईएएस अधिकारी समझने लगी. खुद को एडीएम बताकर उन्होंने बेरोजगार युवाओं से कई लाख रुपये ठगी कर ली. पुलिस ने ठगी के आरोप में तीनों बहनों को गिरफ्तार कर लिया है और उससे 4.5 लाख रुपए कैश, उप्र. सरकार लिखी लग्जरी वाहन, सात चेक बुक, चार मोबाइल फोन बरामद किए हैं. इसके साथ ही उनके 6 बैंक खातों में जमा राशि 55 लाख रुपए  फ्रिज भी कर दिए हैं.

    एएसपी पंकज श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि प्रीति लॉयल और तीन अन्य लोगों ने बारादरी थाने में शिखा पाठक तथा उसकी बहन विप्रा शर्मा आदि के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. प्रीति लॉयल के मुताबिक, शिखा ने उससे संपर्क बढ़ाया और कहा कि मेरी बहन डॉ. विप्रा को गजरेला में तैनात अपर जिलाधिकारी एवं वित्त राजस्व पद पर किया गया है. दोनों बहनों ने सचिवालय में ऊंची पहुंच का दावा कर कई बेरोजगारों को कंप्यूटर ऑपरेटर और विभिन्न विभागों में चतुर्थ श्रेणी की सरकारी नौकरी दिलाने का ढांचा दिया और मोटी रकम वसूली की. प्रीति लॉयल ने अपने परिचित आदिल खान, संतोष कुमार और मुशाहिद को भी इस बारे में बताया.

    सरकारी नौकरी के लालच में इन सभी ने कई किस्तों में करीब 11 लाख  रुपए इन बहनों को दिए. इसके बाद विप्रा शर्मा ने आयुक्त एवं वित्त सचिव राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश लखनऊ अनुभाग- 4 में तैनाती का फर्जी नियुक्ति पत्र बनाकर चार बेरोजगार लोगों को ईमेल, डाक और व्हाट्सएप के जरिए भेज दिया. जब यह लोग नौकरी करने लखनऊ के विभूति खंड पहुंचे तो पता चला कि  नियुक्ति पत्र फर्जी है. बाद में प्रीति की शिकायत पर बारादरी पुलिस ने एक रिपोर्ट दर्ज कर तहकीकात शुरू की और छानबीन में पता चला कि खुद को आईएएस बात कर विप्रा शर्मा अपनी वाहन पर 
    एडीएम एफआर लिखवाकर एवं वाहन में नीली बत्ती लगाकर खूब रौब दिखाती रही. पुलिस ने ग्रेटर ग्रीन पार्क निवासी डॉ. विप्रा शर्मा, शिखा शर्मा और  पवन विहार निवासी ममीदी बहन दीक्षा पाठक को गिरफ्तार का जेल भेज दिया है. मामले की आगे जांच  जारी है.