• मोहम्मद अहसान बने अनिल पंडित! हाईकोर्ट ने सनातन धर्म अपनाने की दी इजाजत

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में मोहम्मद अहसान को इस्लाम छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की इजाजत दे दी है. कोर्ट ने प्रयागराज प्रशासन को 28 दिनों में आदेश पारित करने का निर्देश दिया है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ यह विशेष रिपोर्ट:-

    इलाहाबाद, 30 मई 2026. याचिकाकर्ता ने सनातन धर्म अपनाने की वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद अनुमति के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी. लेकिन इसको स्वीकार नहीं किया जा रहा था. इस बीच  हाईकोर्ट के जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ल की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया है. मोहम्मद अहसान ने 2024 में यह याचिका दायर की थी, वह सीएमपी डिग्री कॉलेज, प्रयागराज में अंग्रेजी विभागीय सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं एवं उनकी पत्नी भी एक शिक्षाविद हैं और बलिया स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में अंग्रेजी की व्याख्याता है.

    वैवाहिक पहचान अनिश्चितता के घेरे में 

    याचिकाकर्ता मोहम्मद अहसान वर्ष 2022 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े हुए हैं. प्रशासनिक अस्वीकार्यता के कारण दंपति को विवाह पंजीकरण, पहचान पत्र, शासकीय अभिलेखों और अन्य वैधानिक अधिकारों के संबंध में गंभीर कठिनाइयां एवं मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ रहा था. उनके वैवाहिक पहचान भी अनिश्चितता के घेरे में आ गए थे.

    याचिकाकर्ता ने अपना नाम अनिल पंडित भी रख लिया था लेकिन प्रशासन इसे स्वीकार नहीं कर रहा था. जबकि अब अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने पर धर्म परिवर्तन को रोक नहीं जा सकता, यह धार्मिक स्वतंत्रता का मामला है. साथ ही उत्तर प्रदेश धर्म परिवर्तन अधिनियम 2021 के तहत यह अनुमति दी गई है.

    प्रशासनिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर नहीं

    कोर्ट ने इस्लाम धर्म छोड़कर सनातन धर्म अपनाने की प्राधिकारी से अनुमति मिलने के बाद 28 दिनों में जिला प्रशासन प्रयागराज को आदेश पारित करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा है कि यदि अधिनियम की धारा 8 व 9 के तहत आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का अनुपालन कर लिया गया है, को अधिकारी किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान बाधित नहीं कर सकते.

    कोर्ट ने याचिकाकर्ता को सभी दस्तावेजों में नाम परिवर्तित की कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है. कोर्ट के निर्देश पर जिला प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि धर्म परिवर्तन आवेदन यानी याचिका स्वीकार कर लिया गया है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बहस की और कहा कि प्रशासनिक अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता से ऊपर नहीं हो सकते.