नीतीश की हाथी चाल से एनडीए में खलबली, जदयू की नई मांग ने बढ़ाई बीजेपी की धड़कन
बिहार एनडीए में जदयू की नई मांग ने हलचल पैदा कर दी है. विधानसभा अध्यक्ष पद और अधिक मंत्रालयों की दावेदारी के साथ नीतीश कुमार की पार्टी ने 'बड़े भाई ' की भूमिका में वापसी के संकेत दिए हैं. जदयू के इस रुख ने भाजपा नेतृत्व को गहरे मंथन पर मजबूर कर दिया है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट:-
पटना, 22 अप्रैल 2026. बिहार की सियासी बिसात पर जदयू की हाथी चाल से एनडीए की राजनीति उबाल पर है. डिमांड भी ऐसा कि सब कुछ उथल-पुथल के संकेत मिले. सूत्रों की माने तो दावा भाजपा नेतृत्व को हिला देने वाला है. अब तक सब कुछ मीठा - मीठा के बाद जदयू की डिमांड ने अब एनडीए की राजनीति में टकराहट के बीज बो डाले. जेडीयू विधानमंडल की बैठक में ऐसा क्या हुआ कि भाजपा नेतृत्व के बीच गहरा मंथन की शुरुआत हो गई. आखिर जदयू की डिमांड से बीजेपी से क्या कुछ छीनने वाला है?
जेडीयू से ज्यादा मंत्री की डिमांड!
यह खबर तो पहले भी थी कि जदयू नेतृत्व ने दो डिप्टी सीएम के साथ-साथ कुछ और डिमांड की थी. पहले तो चल यह रहा था कि पूर्व से चले आ रहे विभागों की अदला बदली होगी. बीजेपी को जदयू वाले और जेडीयू को बीजेपी वाले विभाग देने होंगे. मगर, इस डिमांड का तो पटाक्षेप हो गया. इस अनसुनी डिमांड के बाद जदयू की तरफ से अधिक मंत्रियों के डिमांड आ गई है. यह मांग जदयू विधायक दल की बैठक में और वह भी जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की मौजूदगी में आया.
इसी 20 अप्रैल सोमवार को पटना में आयोजित जदयू की मीटिंग के बाद इस बात का खुलासा हुआ. वो भी पूर्व मंत्री और नीतीश कुमार के करीबी नेता श्रवण कुमार के बयान के बाद. बिहार सरकार में मंत्री रहे. श्रवण कुमार ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने स्पष्ट किया कि पिछली बार की तुलना में इस बार की सरकार में जदयू कोटे से अधिक मंत्री बनाए जाएंगे. यह आश्वासन भी नीतीश कुमार की तरफ से मिला है. हालांकि, बीजेपी के भीतर सवाल संख्या के साथ-साथ विभाग का भी है. पता नहीं किस विभाग पर जदयू की नजर है. लेकिन इस बात के खुलासे के बाद एक नए विवाद के जन्म लेने के आसार जरूर हैं.
विधानसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर नजर
जनता दल ( यूनाइटेड) की नजर विधानसभा अध्यक्ष पद की कुर्सी पर भी है. इस पद के बहाने राजनीतिक मजबूती के साथ जेडीयू आगे की रणनीति को अंजाम देना चाहती है. फिलहाल बीजेपी ने प्रेम कुमार को विधानसभा अध्यक्ष बनाकर जातीय संतुलन की नींव रखी है.
पार्टी अब रक्षात्मक के बजाय आक्रामक रुख अपनाकर अपनी मांगों को मनवाने का प्रयास करेगी. बिहार विधानसभा अध्यक्ष पद को प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाकर बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश है.
◆ 33 संभावित मंत्रियों की सूची में जेडीयू अपना पलड़ा भारी रखना चाहती है.
अनजाने भय के साथ बीजेपी
जदयू विधायक दल की बैठक के बाद बीजेपी रणनीतिकारों के बीच एक अनजाना भय घर कर गया है. वो भी इसलिए कि सोमवार की विधायक दल की बैठक से जो बातें राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा रही है, उसे मीटिंग में नीतीश कुमार भी मौजूद थे.