• युवा कवियित्री एवं मनोविज्ञानी मारिषा समा पिंगुआ को पीएचडी

    दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए (मनोविज्ञान) प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण मारिषा समा पिंगुआ का 23 वर्ष की उम्र में  अंग्रेजी कविताओं का संग्रह प्रकाशित हो गया। कविता संग्रह 'Pearled Raindrops' अमेजन पर काफी चर्चित रही। उन्होंने अचानकमार अभयारण्य क्षेत्र के बैगा बाहुल्य गांवों  में जाकर वहां के जनजीवन का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने बहुत ही सूक्ष्मता के साथ अपना शोध कार्य पूरा किया  । 

    रायपुर, 19 जून 2026. ISBM यूनिवर्सिटी ने रायपुर की मारीषा समा पिंगुआ  को डॉक्टरेट (पीएचडी) की उपाधि दी है। मारीषा समा पिंगुआ ने अपना शोध प्रबंध "छत्तीसगढ़ की आदिवासी और गैर-आदिवासी महिलाओं में आत्म-सम्मान और प्रेरणा: एक मनो-सामाजिक तुलनात्मक अध्ययन"  ("Self-Esteem and Motivation Among Tribal and Non-Tribal Women of Chhattisgarh: A Psycho-Social Comparative Study")  विषय पर किया है। उनके इस शोध कार्य की मूल्यांकनकर्ताओं द्वारा अत्यधिक सराहना की गई है ।

    दिल्ली विश्वविद्यालय से एमए (मनोविज्ञान) प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण मारिषा समा पिंगुआ का 23 वर्ष की उम्र में  अंग्रेजी कविताओं का संग्रह प्रकाशित हो गया। कविता संग्रह 'Pearled Raindrops' अमेजन पर काफी चर्चित रही। 2021 में इस किताब के विमोचन के अवसर पर पूर्व अपर मुख्य सचिव एवं लेखक बीकेएस रे ने कहा था- 'मारिषा की कविता रचना नैसर्गिक है। गद्य की विधा को तो अभ्यास करते-करते सीखा भी जा सकता है। लेकिन कविता अंतरात्मा से निकलती है।'   

    मारिषा अपने कॉलेज के दिनों से कविता लिखती आ रही है। उन्हें पेंटिंग का भी बहुत शौक है। अपने पेंटिंग्स में उन्होंने कई खूबसूरत कलाकृति को उकेरा है।मनोविज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने NET  भी क्वालीफाई कर रखा है। कई विषयों के मनोवैज्ञानिक अध्ययन के लिए वह रिसर्च कार्य करती रहती हैं। उन्होंने कई कविता और उपन्यास राइटिंग कंपटीशन में भी भाग लिया है।

    मारीषा समा पिंगुआ वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनोज कुमार पिंगुआ की सुपुत्री है, जो वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन में अपर मुख्य सचिव, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के पद पर पदस्थ हैं। उनके पिता मनोज पिंगुआ बताते हैं कि मारिषा बचपन से ही मल्टी टैलेंटेड हैं। पढ़ाई के साथ-साथ कविता लेखन और पेंटिंग्स के प्रति शुरू से ही उनका रुझान रहा है। मारीषा समा पिंगुआ ने डॉक्टरेट (पीएचडी) उपाधि प्राप्त होने पर अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और विश्वविद्यालय की गाईड डॉ. शांता मिश्रा एवं सहयोगी संकाय सदस्यों को दिया है।