• राम मंदिर चंदा चोरी : कौन हैं राम मंदिर एसआईटी के प्रमुख विजय विश्वास पंत, क्यों लगा था 420 का आरोप?


    विजय विश्वास पंत  वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं और लखनऊ के मौजूदा मंडल आयुक्त हैं. उन्हें राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का प्रमुख बनाया गया है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ खास रिपोर्ट:-

    लखनऊ, 12 जुलाई 2026. अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले की जांच विशेष जांच दल  (एसआईटी ) कर रही है. एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर आठ लोगों और एक अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है. इस बीच  एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत का नाम भी चर्चा में है, क्योंकि उनके खिलाफ मेरठ में दर्ज एक पुराने धोखाधड़ी के मामले का  जिक्र फिर से होने लगा है.

    कौन है एसआईटी प्रमुख विजय विश्वास पंत?

    विजय विश्वास पंत  वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं  और मौजूदा लखनऊ के मंडल आयुक्त हैं. उन्हें राम मंदिर चढ़ावा  चोरी मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी का प्रमुख बनाया गया है. इससे पहले वे उत्तर प्रदेश के कई अहम प्रशासनिक पदों पर भी कार्य कर चुके हैं.

    क्यों लगा था 420  का आरोप?

    दरअसल, विजय विश्वास पंत का नाम मेरठ की एक पुराने विवाद में सामने आया था. यह मामला साल 2015 में दर्ज हुआ था, जिसमें मेरठ के दुर्गा इलेक्ट्रिकल के संचालक शिवकुमार ने उनके समेत 14 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी (धारा 420) और जालसाजी ( धारा 465) का मुकदमा दर्ज कराया था. शिकायतकर्ता के मुताबिक, साल 2007 में उन्होंने ग्राम विकास अंबेडकर योजना के तहत बिजली लाइन बिछाने का काम किया था. काम पूरा होने के बाद भुगतान के लिए बिल प्रस्तुत किए गए, लेकिन कथित रूप से अधिकारियों ने कमीशन की मांग की. मांग पूरी नहीं होने पर भुगतान रोक दिया गया और रिकॉर्ड में काम को अधूरा दिखा दिया गया.

    शिवकुमार का आरोप था कि बाद में जब विजय विश्वास पंत पश्चिमांचल विद्युत वितरण  निगम के प्रबंध निर्देशक (एमडी ) बने, तब उन्होंने मामले की जांच कराई, जिसमें कुछ अधिकारी दोषी पाए गए, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई और भुगतान भी जारी नहीं कराया गया. इसके बाद उन्होंने पंत सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया.

    जांच कहां तक पहुंची?
    इस मामले की जांच मेरठ पुलिस ने की थी. पुलिस ने बाद में अंतिम रिपोर्ट (एफआर ) दाखिल कर दी थी. हालांकि, शिकायतकर्ता ने जांच पर सवाल उठाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया. बाद में मेरठ की अदालत ने साल 2021 में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को निरस्त करते हुए जांच पर आपत्ति जताई थी.

    किन धाराओं में दर्ज हुआ था केस?

    विजय विश्वास पंत के खिलाफ  दर्ज एफआईआर में 
    भा. दं. संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी ) और 465 (जालसाजी ) शामिल थी. धारा 420 में अधिकतम 7 वर्ष और धारा 465 में  अधिकतम 2 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है. हालांकि, किसी भी एफआईआर का दर्ज होना अपने आप में दोष सिद्ध होना नहीं होता और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होता है.

    अखिलेश भी उठा चुके हैं सवाल

    हाल ही में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाए. अखिलेश यादव ने  आरोप लगाया कि जिस सीट के प्रमुख इस मामले की जांच कर रहे हैं, उनके खिलाफ ही भा. दं. संहिता की धारा 420 के तहत मुकदमा दर्ज है. सपा नेता ने कहा कि ऐसे में निष्पक्ष जांच की  उम्मीद कैसे की जा सकती है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि चढ़ावा चोरी के मामले में केवल, लीपापोती की जा रही है.