• नीट पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा प्रहार, एनटीए - सीबीआई को नोटिस, 29 मई को अगली सुनवाई

    नीट पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने  केंद्र सरकार, एनटीए और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा की बेंच ने कहा कि संस्थाओं ने अब तक सबक नहीं सीखा है. अदालत ने एनटीए से मॉनिटरिंग कमेटी पर जवाब मांगा है. इस मामले की अब अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट:- 

    नई दिल्ली, 25 मई 2026. नीट -  यूजी पेपर लीक मामले में सोमवार( 25 मई ) को सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार, एनटीए और सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. जस्टिस  पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक आराधे की स्पेशल बेंच ने फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन अरे यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट की नई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर चिंता जताई. अदालत ने दो टूक शब्दों में कहा कि ऐसा लगता है जैसे संबंधित जांच और परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं ने पिछले विवादों से 'अब तक कोई सबक नहीं सीखा है.'

    कोर्ट रूम में तीखी टिप्पणियों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से सवाल किया कि साल 2024 के नीट विवाद के बाद गठित की गई मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर अब तक क्या अमल किया गया है. कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को नीट यूजी पेपर पर विस्तृत काउंटर एफिडेविट ( जवाब-  दावा ) दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है. याचिका कर्ताओं ने कोर्ट के सामने एनटीए को पूरी तरह भंग करने, किसी पूर्व जज की निगरानी में एसआईटी  से जांच करने और इस राष्ट्रीय परीक्षा को पूरी तरह कंप्यूटर आधारित (सीबीटी ) मोड में शिफ्ट करने की मांग उठाई है, जिस पर अब अगली सुनवाई इसी शुक्रवार को होगी.

    प्रश्न पत्रों के मल्टीपल सेट्स का ढोंग 

    नीट पेपर लीक मामला एनटीए हमेशा दावा करती है कि वे  लीक से बचने के लिए प्रश्न पत्रों के कई सेट 
    ( ए, बी, सी, डी ) तैयार रखते हैं और अंतिम समय पर सेट तय होता है. लेकिन इस बार आरोपियों को सभी संभावित सेट्स की जानकारी पहले से ही मिल चुकी थी. 

    डिजिटल लॉकर का सिस्टम फेल 
    एनटीए का दावा था कि प्रश्न पत्रों को बेहद सुरक्षित डिजिटल लॉकर्स और जीपीएस- ट्रैक्ड ट्रैकों के जरिए परीक्षा केंद्रों तक भेजा जाता है, लेकिन जमीनी हकीकत यह निकली कि पेपर इन सेंटर्स पर पहुंचने से पहले ही आरोपियों के मोबाइल फोन पर तैर रहा था.

    ट्रांसलेटर का कोई बैकग्राउंड चेक नहीं

    इसमें सबसे बड़ी प्रशासनिक लापरवाही यह सामने आई है कि एनटीए  ने मनीषा हवालदार और पीवी कुलकर्णी जैसे लोगों को परीक्षा का महत्वपूर्ण काम सौंपने से पहले उनका कोई कड़ा इंटेलिजेंस या पुलिस बैकग्राउंड वेरिफिकेशन नहीं करवाया था.