• तेजस्वी यादव सब जानते थे, लेकिन मजबूर थे...,' आरजेडी से इस्पीफे के बाद मृत्युंजय तिवारी का छलका दर्द

    मृत्युंजय तिवारी का इस्तीफा राजद के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है. वह लंबे समय तक आरजेडी का प्रमुख चेहरा रहे हैं और मीडिया में पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते थे. ऐसे में उनका इस्तीफा बिहार की राजनीति में नई चर्चा का विषय बन गया है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि मृत्युंजय तिवारी आगे किस राजनीतिक राह का चुनाव करते हैं. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-

    पटना, 17 जुलाई 2026. "हमने पार्टी के लिए पूरी निष्ठा से काम किया, लेकिन अब सम्मान नहीं बचा. ऐसे माहौल में काम करना मेरे लिए संभव नहीं था." कुछ इसी निराशा और दर्द के साथ राजद के वरिष्ठ नेता और लंबे समय तक पार्टी के प्रवक्ता रहे मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया. उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल से मुलाकात कर पार्टी के प्रवक्ता समेत सभी पदों से इस्तीफा सौंप दिया.

    पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में वे अपना इस्तीफा सौंपा. तिवारी ने कहा कि अब पार्टी में उनके जैसे समर्पित और पुराने कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिल रहा था. इसी वजह से उन्होंने यह फैसला लिया.

    बता दें कि, मृत्युंजय तिवारी कई दशकों से आरजेडी से जुड़े रहे हैं. साल 2014 में उन्हें लालू प्रसाद यादव ने पार्टी का मीडिया प्रभारी और प्रवक्ता बनाया था. तब से वो  लगातार पार्टी का पक्ष मजबूती से रखते रहे. उन्होंने कहा कि कभी उन्होंने पार्टी विरोधी काम नहीं किया और हमेशा अनुशासन में रहकर संगठन के लिए काम किया.

    बड़े नेताओं को बोलने की आजादी नहीं

    मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि बीके 6 से 7 महीनों से वह लगातार खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे. उन्होंने कई सीनियर नेताओं के सामने अपनी बात भी रखी, लेकिन उनकी शिकायतों पर  कोई ध्यान नहीं दिया गया. तिवारी के मुताबिक, आरजेडी में कुछ ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ गया है, जिनके सामने बड़े नेता भी कुछ नहीं बोल पा रहे हैं.

    क्या है तेजस्वी की मजबूरी?

    मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि उन्होंने अपनी नाराजगी की पूरी जानकारी कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को भी दी थी. उन्होंने यह भी कहा कि तेजस्वी यादव उनकी बात समझते हैं, लेकिन उनकी क्या मजबूरी है, यह वह नहीं जानते. हालांकि, उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम लेने से इनकार किया. जब उनसे पूछा गया कि क्या उनका इशारा किसी खास नेता की ओर है, तो उन्होंने कहा कि समय आने पर सारी बातें सामने आएंगी. फिलहाल वह किसी का नाम नहीं लेना चाहते. तिवारी ने कहा कि पार्टी के बड़े नेता और पत्रकार भी जानते हैं कि उन्हें यह कदम क्यों उठाना पड़ा.

    लालू - राबड़ी के करीबी
    मृत्युंजय तिवारी ने यह भी याद दिलाया कि एक बार उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया था, लेकिन उसी दिन लालू प्रसाद यादव  और राबड़ी देवी ने उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंप दी थी. इस बार स्थिति कुछ अलग है और अब उनके लिए पार्टी में बने रहना संभव नहीं.

    क्या तेजस्वी से मुलाकात हुई?

    तेजस्वी यादव से आखिरी मुलाकात के सवाल पर उन्होंने बताया कि करीब एक महीने पहले तेजस्वी यादव  के बेटे के जन्मदिन पर उनकी मुलाकात हुई थी. इस्तीफा देने के बाद उनकी तेजस्वी यादव से कोई बात नहीं हुई है. उन्होंने यह भी कहा कि अभी तक तेजस्वी यादव का फोन भी नहीं आया है. भविष्य की राजनीति को लेकर मृत्युंजय तिवारी ने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया. उन्होंने कहा कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान इस्तीफे पर है. आगे क्या फैसला होगा, यह समय आने पर बताया जाएगा. उन्होंने किसी दूसरी पार्टी में  जाने की संभावना पर भी कोई टिप्पणी नहीं की.

    मैं जनता का सेवक...

    मृत्युंजय तिवारी ने कहा, " मैं जनता का सेवक हूं और आखिरी सांस तक  जनता की सेवा करता रहूंगा. " उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी से उन्होंने कभी कोई निजी लाभ नहीं  लिया. सबसे कठिन समय में भी वह राजद के साथ खड़े रहे और संगठन को मजबूत करने का काम किया.

    मृत्युंजय तिवारी का दावा - पार्टी में तेजस्वी यादव की नहीं सुनी जा रही
    आरजेडी से इस्तीफा देने के बाद मृत्युंजय तिवारी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे बीजेपी में नहीं जाएंगे. साथी यह भी कहा कि  वे अब आरजेडी में भी नहीं लौटेंगे. शुक्रवार (17 जुलाई) को मीडिया से बातचीत में बताया कि तेजस्वी यादव की पार्टी में नहीं सुनी जा रही है. उन्हें हाईजैक कर लिया गया है. मृत्युंजय तिवारी ने सलाह दी कि तेजस्वी यादव को सोचना होगा. दिशाहीन होकर काम नहीं चलता है. कुछ लोग खुद को इतना बड़ा नेता मानने लगे हैं कि तेजस्वी यादव की भी नहीं सुन रहे हैं. उन्होंने कहा कि राजद की दुर्गति हो रही है. मेरे इस्तीफे से हर कार्यकर्ता नाराज है.