गुरु पूर्णिमा पर 'गीत चाँदनी ' की कवि गोष्ठी श्रद्धा, साहित्य व संस्कृति के रूप में संपन्न
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की रिपोर्ट:-हैदराबाद, 1 अगस्त 2026. प्रतिष्ठित एवं सक्रिय साहित्यिक संस्था ' गीत चाँदनी ' (काव्य यात्रा ) के
45 वें वर्ष की 502 वीं आयोजित होने वाली मासिक कवि गोष्ठी गुरु पूर्णिमा के मौके पर यहां के नामपल्ली रेलवे स्टेशन, प्लेटफार्म संख्या--1 पर स्थित बालवीर हनुमान मंदिर के दिव्य एवं आध्यात्मिक वातावरण में महंत महामंडलेश्वर प्रभुदास महाराज के सानिध्य में संपन्न होने की खबर है. आयोजित कार्यक्रम में अनेक साहित्यकारों, कवियों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों के साथ-साथ साहित्य प्रेमियों की मौजूदगी रही.
कार्यक्रम का संचालन 'गीत चाँदनी ' के कार्यदर्शी एवं विशिष्ट कवि गोविंद अक्षय ने अपने उद्बोधन में संस्था की बरसों की सतत साहित्यिक यात्रा, उसकी उपलब्धियों एवं कवि गोष्ठियों की परंपरा पर विस्तार से प्रकाश डाला. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के अध्यक्ष व गीतकार चंपालाल बैद ने की. प्रथम सत्र की विदुषी साहित्यकार डॉ. प्रेमलता श्रीवास्तव, कवयित्री आशा ठाकुर, विद्या दवे श्रीमाली ने गुरु पूर्णिमा के धार्मिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक व सामाजिक महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए. इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आत्म - मंथन का दिवस है.
कवयित्री विद्या दवे श्रीमाली ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में माता-पिता प्रथम गुरु होते हैं, जो जीवन की प्रारंभिक शिक्षा व संस्कार प्रदान करते हैं. तत्पश्चात शिक्षक एवं सद्गुरु जीवन को सही दिशा देते हैं. इस मौके पर विशेष अतिथि एसके जैन लौंगपुरिया तथा अंजनी कुमार गोयल ने नेवी अपने विचार व्यक्त किए. वहीं, कवयित्री आशा ठाकुर ने कहा कि गीत चाँदनी की साहित्यिक गतिविधियां रचनाकारों को निरंतर प्रेरणा देती है. उन्होंने सभी को गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं दी.
इस दौरान आयोजित बहुभाषी कवियों ने देश की समसामयिक परिस्थितियों, राष्ट्रीय चेतना, गुरु महिमा, मानवीय मूल्यों, सामाजिक सरोकारों तथा जीवन के विविध पक्षों पर आधारित गीत - गजल, मुक्तक, हास्य -व्यंग्य, भक्ति रस एवं नई कविताओं का प्रस्तुति देकर श्रोताओं को आनंदित किया. आशा ठाकुर द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से आरंभ हुआ.
इस काव्य - पाठ में डॉ प्रेमलता श्रीवास्तव, चंपालाल बैद, गोविंद अक्षय, आशा ठाकुर, अंजनी कुमार गोयल, डॉ रेखा देवी वर्मा, कवि राजकुमार यादव, पुष्पा वर्मा, संत कुमार मंडल जागृति, जितेंद्र कुमार चंचल, एसके जैन लौंगपुरिया, विद्या दवे श्रीमाली, रामलिंग हिरोडे, निधि झा, नागेश्वर राव, मंजुला यादव, ममता मिश्रा, दिनेश अग्रवाल शशि एवं सत्यनारायण काकड़ा समेत अनेक कवि मौजूद रहे.
अंत में महंत महामंडलेश्वर प्रभु दास जी महाराज ने अपने आशीर्वचन में कहा कि भारत की पहचान उसकी गुरु शिष्य परंपरा से है. गुरु ही व्यक्ति के चरित्र, व्यक्तित्व एवं जीवन का निर्माण करता है. उन्होंने सभी उपस्थित कवियों, रचनाकारों, विशिष्ट अतिथियों एवं साहित्यकारों को शाल भेंटकर सम्मानित किया तथा गुरु पूर्णिमा की मंगल कामनाएं दी. डॉ. प्रेमलता श्रीवास्तव द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के बाद कार्यक्रम का समापन हुआ.