16 जुलाई से शुरू होगी रथ यात्रा, तीन विशाल रथों पर सवार होंगे भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा
16 जुलाई से जगन्नाथ रथ यात्रा का शुभारंभ होने वाला है. पुरी में लाखों की भीड़ में तीन विशाल रथ निकलेंगे, जिन पर भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा सवार होंगे. लेकिन प्रश्न यह है कि कैसे पता चलेगा कि कि रथ में भगवान जगन्नाथ है और कि रथ में उनके भाई-बहन? समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ के साथ संवाददाता अभय बनर्जी की रिपोर्ट:-
पुरी, 14 जुलाई 2026. 16 जुलाई दिन गुरुवार से पुरी में भगवान जगन्नाथ का रथ यात्रा का शुभारंभ होने वाला है. हर साल असर शुक्ल द्वितीया तिथि को भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ नगर भ्रमण पर निकलते हैं. भगवान जगन्नाथ और उनके भाई - बहन के लिए तीन विशाल रथ बनाए जाते हैं, उन पर सवार होकर वे गुंडिचा मंदिर तक जाते हैं और फिर वहां से वापस अपने मंदिर में आते हैं.
इस यात्रा में शामिल होने के लिए देश और दुनिया से भगवान जगन्नाथ के भक्त लाखों की संख्या में आते हैं. मोटे - मोटे रस्सों से इन रथों को खिंचा जाता है. इस भगवत सेवा में लोग आकर स्वयं को धन्य मानते हैं. लाखों की भीड़ में तीनों रथ दूर से ही दिखाई देते हैं. लेकिन किस रथ में जगन्नाथ जी हैं और किस रथ में उनके भाई-- बहन इसे सभी नहीं जान सकते. इसके लिए रथों पर विशेष संकेत होते हैं, जो इनको जानता है, वही समझ सकता है कि जगन्नाथ जी कि रथ में हैं?
रंग और विशेष ध्वज से पहचानें जगन्नाथ जी का रथ
भगवान जगन्नाथ का रथ लाल और पीले रंग का होता है, जिस पर त्रिलोक्यमोहिनी ध्वज लहराता है. इस पर हनुमान जी का प्रतीक लगा होता है और इस रथ में 16 पहिए लगे होते हैं एवं तीनों रथों में सबसे बड़ा होता है. इसका नाम नंदीघोष है. इसे गरुड़ध्वज भी कहा जाता है. इस विशाल रथ पर सवार होकर भगवान जगन्नाथ अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर जाते हैं. लाल और पीले रंग के रथ को दूर से देखकर आप जान सकते हैं कि इसमें भगवान जगन्नाथ सवार है.
लाल और हरे रंग का होता है बलभद्र जी का रथ
भगवान जगन्नाथ जी के बड़े भाई बलभद्र जी का रथ लाल और हरे रंग का होता है. यह जगन्नाथ जी के रथ से थोड़ा छोटा होता है और इसमें 14 पहिए लगे होते हैं. इसे तालध्वज कहा जाता है. इस रथ पर उनानी ध्वज लगा होता है, जिस पर ताड़ के पेड़ का प्रतीक चिन्ह होता है.
सबसे छोटा रथ बहन सुभद्रा का
इस रथ यात्रा में जगन्नाथ जी की बहन सुभद्रा का रथ तीनों में सबसे छोटा होता है. यह रथ लाल और काले रंग का होता है, जिसमें 12 पहिए लगे होते हैं. उनके रथ का नाम दर्पदलन है. इस पर नंदबिका ध्वज लहराता है, जिस पर कमल का प्रतीक चिन्ह होता है. अब जगन्नाथ रथ यात्रा में शामिल होने वाले तीनों रथों को उनके रंग के आधार पर दूर से ही पहचान सकते हैं. यदि आप जगन्नाथ जी के रथ यात्रा में शामिल होते हैं और जगन्नाथ जी के रथ तक नहीं भी पहुंचते हैं तो दूर से ही उनके दर्शन करके आशीर्वाद ले सकते हैं.
कब से कब तक चलेगी रथ यात्रा?
जगन्नाथ रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू होगी. तीनों रथों को खींचकर गुंडिचा मंदिर ले जाया जाएगा. फिर 24 जुलाई शुक्रवार को बहुदा यात्रा यानी उल्टी रथ यात्रा प्रारंभ होगी. इसमें तीनों रथों को खींचकर वापस जगन्नाथ मंदिर लाया जाएगा और इसके साथ ही 27 जुलाई सोमवार को नीलाद्री बीजे अनुष्ठान के साथ ही रथ यात्रा का समापन होगा.