• इस दुनिया में मां से बड़ा कोई योद्धा नहीं होता; 12 घंटे तक पेड़ पर बैठी रही मां, गोद में था एकलौता बेटा

    इस दुनिया में मां से बड़ा कोई योद्धा नहीं होता। इसे सच कर दिखाया असम में बाढ़ पीड़ित एक मां ने। बाढ़ से बचने के लिए मां ने अपने इकलौते बेटे को सीने से लगाकर 12 घंटे भूखी-प्यासी पेड़ पर बैठी रही।

    सिवसागर, 30 जुलाई 2026। असम बाढ़ की दिल दहला देने वाली कहानी सामने आई है। जब चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी था, तब एक मां ने अपने बेटे की जान बचाने के लिए पूरी रात एक पेड़ की शाखा पर बिताई। न खाने को कुछ था, न पीने का पानी और न ही किसी मदद की उम्मीद। असम के सिवसागर जिले की रहने वाली रेखामोनी गोगोई ने अपने इकलौते बेटे को सीने से लगाकर लगभग 12 घंटे तक मौत से जंग लड़ी।

    दरअसल पड़ोसी राज्य नागालैंड में भारी बारिश के कारण ऊपरी असम के सिवसागर जिले में अचानक बाढ़ का पानी घुस गया।  जिससे देखते ही देखते सब कुछ जलमग्न हो गया। बचने का कोई रास्ता नहीं दिखा, तो रेखामोनी नाम की महिला अपने बेटे को सीने से चिपकाकर पेड़ पर चढ़ गई।  अंधेरे और खौफ के बीच उन्होंने बिना अन्न-जल के 12 घंटे मौत से जंग लड़ी।शादी के 12 साल बाद मिले अपने इकलौते बेटे को बचाने के लिए उन्होंने हार नहीं मानी।

    इस दर्दनाक समय के दौरान मासूम बेटे ने भूख से तड़पते हुए कहा, "मां, अगर कुछ नहीं है तो पेड़ के पत्ते खा लेंगे।" सुबह SDRF की टीम ने मां-बेटे समेत अन्य महिलाओं को सुरक्षित बचा लिया। यह घटना सिर्फ बाढ़ की त्रासदी नहीं, बल्कि एक मां के अटूट साहस, ममता और हिम्मत की मिसाल बन गई है। इस मां के साहस को सलाम !