• 13 साल का इंतजार खत्म:  झीरम घाटी कांड में 10 आरोपी दोषी, कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में हुई थी टारगेट किलिंग

    झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में 13 साल बाद एनआईए की विशेष अदालत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है. इस हमले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता समेत 32 लोगों की हत्या हुई थी और 30 से अधिक लोग घायल हुए थे. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-

    रायपुर, 5 सितंबर 2026. छत्तीसगढ़ के चर्चित 2013 झीरम घाटी नक्सली हमला मामले में 13 साल बाद बड़ा फैसला आया है. एनआईए की विशेष अदालत ने शनिवार को मामले में ट्रायल का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया. इस नक्सली हमले में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता समेत 32 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 30 से अधिक लोग घायल हुए थे. अदालत दोषियों की सजा पर 16 सितंबर को फैसला सुनाएगी.
    एनआईए मामलों के विशेष न्यायाधीश अजय सिंह राजपूत ने सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया.

    बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी के मुताबिक, शुरुआत में 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चल रहा था, लेकिन इनमें से एक की बाद में मौत हो गई. दोषी करार दिए गए लोगों में दो महिलाएं भी शामिल हैं.

    मामले की सुनवाई के दौरान पूर्व 101 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. दोषियों में प्रमिला मोडियाम, चैतू लेकाम, सुमित्रा पुनेम मोडियाम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी, आयता मरकाम, मड़कामी देवा, जोगा मकामी,बंजामी सन्ना और महादेव नाग शामिल हैं. बचाव पक्ष ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की बात कही है.

    वकील अरविंद चौधरी ने कहा कि अभी फैसले की कॉपी नहीं मिली है. आदेश की प्रति मिलने के बाद ही अपील के आधार स्पष्ट किए जाएंगे. वहीं दोषी कोसा कवासी के भाई गुड्डू कवासी ने दावा किया कि कोसा और मुक्का मंडावी को गलत तरीके से मामले में फसाया गया है. उनका दावा है कि हमले के समय दोनों गांव में शादी की तैयारियों में व्यस्त थे.

    क्या है मामला
    25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने 'परिवर्तन यात्रा' निकाली थी. बस्तर जिले के झीरम घाटी में नेशनल हाईवे से गुजर रहे कांग्रेस नेताओं के काफिले पर नक्सलियों ने घात लगाकर हमला कर दिया था. इस हमले में कांग्रेस के नेताओं, सुरक्षा कर्मियों और आम नागरिकों समेत 32 लोग मारे गए थे और 30 से अधिक लोग घायल हुए थे. मारे गए प्रमुख नेताओं में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल और उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता तथा पूर्व विधायक उदय मुदलियार शामिल थे. जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल भी हमले में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी भी मौत हो गई थी. इस हमले ने छत्तीसगढ़ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को लगभग खत्म कर दिया था.

    एनआईए को सौंपी गई थी जांच 

    तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने हमले के दो दिन के भीतर किसकी जांच एनआईए को सौंप दी थी. राज्य सरकार ने घटना की जांच के लिए तत्कालीन छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग भी बनाया था.