तेलंगाना में वोटर लिस्ट से 73 लाख नाम हटाए गए, कांग्रेस ने उठाए चुनाव आयोग पर सवाल
तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने विशेष गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर ) के तहत प्रारूप वोटर लिस्ट से 73 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग की जमकर आलोचना की. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ विशेष रिपोर्ट:-
हैदराबाद, 20 अगस्त 2026. तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एसआईआर के नाम पर चुनाव आयोग तेलंगाना में भी मनमाने तरीके से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं. महेश कुमार गौड़ ने दावा किया कि 2014 से केंद्र की भाजपा सरकार संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है. उन्होंने कहा कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय( ईडी ) की तरह चुनाव आयोग भी बीजेपी का सहयोगी संगठन बन गया है. टीपीसीसी अध्यक्ष गौड़ ने कहा कि चुनाव आयोग के नियमों के कारण गरीब लोग अपने मताधिकार से वंचित हो रहे हैं. उन्होंने सवाल किया, "आपको इस देश में जन्मे नागरिकों के वोट सूची से नाम हटाने का अधिकार किसने दिया? "
कांग्रेस नेता ने 73 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की आलोचना करते हुए पूछा कि अलग-अलग श्रेणियों में रखे गए अन्य 92 लाख लोग अभी भी मतदाता सूची में क्यों जुड़े हुए हैं. महेश गौड़ ने कहा कि परिसीमन और मतदान केदो में बदलाव के कारण कई परिवारों के पास वर्ष 2002 के एसआईआर से जुड़े रिकॉर्ड नहीं है. उन्होंने पूछा कि लोग इतने पुराने दस्तावेज कहां से लाएंगे, जबकि वे सभी भारत में जन्मे हैं और कई बार मतदान भी कर चुके हैं. उन्होंने कहा कि मतदाताओं के पास 2002 के एसआईआर का विवरण हो या न हो, लेकिन उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रत्येक पात्र मतदाता के मतदान अधिकार की रक्षा करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उन्होंने यह भी मांग की कि सभी मामलों की गहन जांच के लिए चुनाव आयोग एसआईआर की समय सीमा बढ़ाएं. उन्होंने आरोप लगाया कि बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ ) ने घर-घर जाकर गणना फार्म वितरित नहीं उनका दावा है कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनमें अधिकांश गरीब और प्रवासी मजदूर हैं.
बता दें कि चुनाव आयोग ने बीते दिनों प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित की थी. इसमें 73.3 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिन्हें अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में रखा गया था. इसके अलावा, 92.8 लाख मतदाताओं को भी चिन्हित किया गया है, जिनके गणना विवरण में विसंगतियां पाई गई हैं या जिनका रिकॉर्ड पूरी तरह मैप नहीं हो सका है. प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक, प्रारूप सूची से हटाए गए 73.3 लाख मतदाताओं में से करीब 43 लाख हैदराबाद एवं उससे सटे हुए जिला रंगारेड्डी और मेडचल - मल्काजगीरी जिलों के हैं.