विधायक कॉलोनी बनाने रायपुर के नकटी गांव पर प्रशासन का एक्शन, 1600 लोग हुए बेघर
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सोमवार को एयरपोर्ट के पास नकटी गांव में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. 48 घंटे की मोहलत खत्म होने के बाद भारी पुलिस बल, 14 बुलडोजर और प्रशासनिक टीम नकटी गांव पहुंच गई और विधायक निवास परियोजना के लिए 85 मकानों को ध्वस्त कर दिया. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट:-
रायपुर, 29 जून 2026. रायपुर एयरपोर्ट के पास गांव नकटी में प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है. हालांकि गांव खाली करने के लिए प्रशासन द्वारा गांव वालों को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया गया था. वहीं, समय सीमा समाप्त हो जाने पर प्रशासन भारी पुलिस बल और मशीनों के साथ नकटी गांव पहुंचा और पूरे गांव पर बुलडोजर चला दिया. सोमवार सुबह से नकटी गांव में तनाव पूर्ण माहौल बना हुआ है ग्रामीण इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन कार्रवाई जारी रखी है. जिस गांव में करीब 1600 लोगों की आबादी रहती हैं, वहां अब 85 मकानों को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
14 बुलडोजर, 1000 जवान
प्रशासन ने इस कार्रवाई के लिए पुख्ता इंतजाम किए हैं. मौके पर करीब 1000 पुलिस फोर्स तैनात किए गए हैं. इनके अलावा 14 बुलडोजर, 250 कोटवार और लगभग 300 टीम प्रहरी भी कार्रवाई में लगाए गए हैं. नकटी गांव के चारों तरफ सुरक्षा घेरा बनाया गया है ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा ना हो. बड़ी संख्या में राजस्व और प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहकर पूरी कार्रवाई की मॉनिटरिंग कर रहे हैं.
विधायक निवास बनाने खाली हो रही जमीन
प्रशासन का कहना है कि नकटी गांव कि जिस जमीन पर कार्रवाई हो रही है, वहां प्रस्तावित विधायक निवास परियोजना को शासन की स्वीकृति मिल चुकी है. इसी परियोजना के लिए जमीन खाली कराई जा रही है. प्रशासन का दावा है कि नियम के मुताबिक, नोटिस देने और समय सीमा पूरी होने के बाद ही कार्रवाई शुरू की गई है. अधिकारियों का कहना है कि सरकारी जमीन को परियोजना के लिए मुक्त करना जरूरी है.
पुश्तैनी जमीन पर चला बुलडोजर?
दूसरी तरफ ग्रामीण प्रशासन की इस कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि यह जमीन उनके पूर्वजों के समय से उनके कब्जे में हैं और वे बरसों से यहां रह रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी बात सुने बिना प्रशासन जबरन कब्जा कर रहा है. कई परिवारों ने कार्रवाई रोकने की मांग करते हुए प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई. मौके पर मौजूद महिलाएं और बुजुर्गों ने विरोध दर्ज कराया.
पीएम आवास देकर चला रहे बुलडोजर
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन मकानों को उजाड़ा जा रहा है, उनमें से कई घर कुछ साल पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने थे. कई लोगों ने बैंक से कर्ज लेकर अपने घर तैयार किए थे और अब नहीं घरों को तोड़ा जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकार ने उन्हें पक्का घर बनाने के लिए सहायता दी, वहीं दूसरी तरफ अब उन्हीं घरों को उजाड़ा जा रहा है. इस विरोधाभास को लेकर गांव वालों में भारी नाराजगी है.
प्रशासन का दावा
इधर, जिला प्रशासन का दावा है कि नकटी के 75 प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था शुरू कर दी गई है. प्रशासन के मुताबिक, परिवारों को नया रायपुर के सेक्टर 30 स्थित ईडब्ल्यूएस आवासों में अस्थाई और स्थाई तौर पर बसाने की व्यवस्था की जा रही है. आवंटन की प्रक्रिया भी जारी है तीन दिन पहले नकटी के प्रभावित परिवारों ने रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की थी. उन्होंने गांव वालों को आश्वासन दिया था कि पुनर्वास की व्यवस्था किए बिना मकानों को नहीं तोड़ा जाएगा और जरूरत पड़ी तो वे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सीधी चर्चा करेंगे. आज की तोड़फोड़ की कार्रवाई से भड़के लोगों ने बृजमोहन अग्रवाल को लबरा कहा।
विकास बनाम विस्थापन... आगे क्या होगा?
नकटी गांव की कार्रवाई ने विकास परियोजनाओं और विस्थापन के मुद्दे को फिर से चर्चा में ला दिया है. एक तरफ जहां सरकार विधायक निवास जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को आगे बढ़ना चाहती है, वहीं, दूसरी तरफ सैकडों परिवार अपने आशियाने बनाने की लड़ाई लड़ रहे हैं. हालांकि, प्रशासन की कार्रवाई जारी है और पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. वहीं बुलडोजर की कार्रवाई के बीच कई भावुक तस्वीरें भी सामने आई है। अपने आशियाना को बचाने के लिए महिलाएं बुलडोजर को रोकने का असफल प्रयास करती नजर आईं। वे पुरखों के समय के मकान टूटने से रो रही थीं। वहीं एक मासूम टूटे हुए घर के मलबे में अपने दादा की गोद में बैठकर बिलख रहा था।