जंतर - मंतर पर छात्र नेताओं के साथ अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक, कहा - 'खुशी से नहीं, मजबूरी में बैठा हूं.'
विरोध प्रदर्शन को किसान संगठनों, खाप पंचायतों के साथ-साथ समाजवादी समागम का भी समर्थन प्राप्त हुआ है. वहीं सोनम वांगचुक ने आंदोलन में पर्यावरण के मुद्दे को भी जोड़ा है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
नई दिल्ली, 29 जून 2026. जंतर- मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी ) के नेतृत्व में चल रहे धरने के 9 वें दिन आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है. 8 दिन तक चले विरोध प्रदर्शन के बाद रविवार को पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. अनशन शुरू करने से पहले सोनम वांगचुक, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके और आंदोलन से जुड़े कार्यकर्ता राजघाट पहुंचे, जहां उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित कर उनका आशीर्वाद लिया. बाद में वे सभी जंतर मंतर पहुंचे और भूख हड़ताल की शुरुआत की. इस दौरान किसान संगठनों, हाफ पंचायतों, समाजवादी समागम के नेताओं और बड़ी संख्या में छात्रों ने दिल्ली के जंतर मंतर पर चल रहे आंदोलन को अपना समर्थन जताया.
गांधी के रास्ते पर चलने का संकल्प
भूख हड़ताल शुरू करने से पहले आंदोलनकारी राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की. इसके बाद जंतर मंतर पहुंच कर सोनम वांगचुक और 6 छात्र नेताओं ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी. आंदोलनकारियों का कहना है कि यह संघर्ष शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को खत्म करने एवं नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) को वापस लाने की मांग को लेकर किया जा रहा है.
सरकार ने जवाब नहीं दिया
भूख हड़ताल शुरू करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा कि वे जिनेवा से सीधे दिल्ली पहुंचे हैं. पहले ही सरकार को संदेश दिया गया था कि अगर शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रतिरोध हमें करना पड़ेगा. उन्होंने कहा, " मैं खुशी से नहीं, मजबूरी में अनशन पर बैठा हूं. लोकतंत्र में जब सरकार कोई जवाब नहीं देती, तब शांतिपूर्ण प्रतिरोध ही आखरी रास्ता बचता है. पूरे तन, मन और धन की शक्ति से मैं शिक्षा और पर्यावरण दोनों मुद्दों के समर्थन में यह अनशन कर रहा हूं.
40 साल से शिक्षा के लिए काम कर रहा हूं
सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा मेरे जीवन का सबसे बड़ा मिशन रहा है. इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बावजूद कभी इंजीनियर की नौकरी नहीं की. देश की अधिकांश समस्याओं का समाधान शिक्षा सुधार से ही निकलेगा. जब युवाओं और छात्रों ने शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाई, तो चुप रहना मेरे लिए संभव नहीं था. इसी वजह से कॉकरोच जनता पार्टी में आंदोलन का हिस्सा बना हूं.
शिक्षा के साथ पर्यावरण भी बड़ा सवाल
सोनम वांगचुक ने कहा कि शिक्षा केवल बच्चों का भविष्य नहीं बनाती, बल्कि देश की दिशा भी तय करती है. उन्होंने कहा कि हिमालय और लद्दाख का पर्यावरण पूरे देश की साझा जिम्मेदारी है, क्योंकि करोड़ों लोग वहां से निकलने वाले जल स्रोतों पर निर्भर हैं. "अगर सांस लेने के लिए स्वच्छ हवा और पीने के लिए साफ पानी चाहिए, तो पर्यावरण के सवालों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता. इन दोनों मुद्दों पर सरकार की चुप्पी ने मुझे अनशन पर बैठने के लिए मजबूर किया है. भीषण गर्मी के बावजूद हजारों लोग आंदोलन में शामिल है. इतनी कठिन परिस्थितियों में भी छात्रों और नागरिकों का संघर्ष लोकतंत्र में जनता की ताकत को दिखाता है."
छात्रों को न्याय मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि यह भूख हड़ताल उन 20 से अधिक छात्रों को न्याय दिलाने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर शुरू की गई है. भारतीय किसान यूनियन और समाजवादी समागम सहित कई खाप पंचायतों ने आंदोलन को समर्थन दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि जंतर मंतर पर आने के दौरान 500 से अधिक किसानों को नजरबंद कर लिया गया, ताकि वह यहां जो पहुंच सके. अब आंदोलन कब तक चलेगा, यह पूरी तरह सरकार के रुख पर निर्भर करेगा.
6 छात्र नेताओं ने भी शुरू किया भूख हड़ताल
सोनम वांगचुक के आह्वान पर 6 छात्र नेताओं ने भी भूख हड़ताल शुरू की है. इनमें एआईएसए की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा, जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव दानिश अली, एआईएसए यूपी के अध्यक्ष मनीष, दिल्ली विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष दीपक, जेएनयू बराक हॉस्टल के अध्यक्ष हृषिकेश और अंबेडकर विश्वविद्यालय छात्र परिषद के पूर्व सदस्य आमीन ने भी अनशन शुरू कर दी है. उन्होंने कहा कि वे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, एनटीए को खत्म करने और नई शिक्षा नीति को वापस लेने की मांग पूरी होने तक सोनम वांगचुक के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करेंगे.
सोनम वांगचुक का अनशन शुरू, समाजवादी समागम का समर्थन
समाजवादी समागम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति ने देश के गौरव और लोकतांत्रिक राष्ट्र निर्माण के लिए दिल्ली के जंतर मंतर चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलन और शिक्षा में सुधार के लिए सोनम वांगचुक और नौजवानों के द्वारा अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का समर्थन करने का निर्णय लिया है. समाजवादी समागम भारत के समाजवादियों की रचनात्मक पहल है और उनकी सोच है कि 18 वर्ष की आयु के सभी युवजनों को रोजगार का अधिकार मिलना चाहिए. क्योंकि रोजगार रहित नई अर्थनीति से नौजवानों को अंधकारमय भविष्य का सामना करना पड़ रहा है. दूसरी तरफ वैश्विक पूंजीवाद के दबाव से शुरू शिक्षा का व्यवसायीकरण बंद करके नई पीढ़ी को प्राथमिक से लेकर स्नातकोत्तर स्तर तक निशुल्क शिक्षा का अवसर दिया जाए और इसके लिए देश के बजट का 6% शिक्षा के लिए आवंटित हो.
वहीं, प्रतियोगी परीक्षाएं भ्रष्टाचार मुक्त हो और पेपर लीक करने के दोषियों को दंडित किया जाए. इसका शुभारंभ गैर जिम्मेदार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से किया जाए. समाजवादी समागम नौजवानों में देश को बचाने की बेचैनी का स्वागत करता है और देश के किसानों द्वारा नौजवानों के समर्थन में सामने आने की सराहना करता है. वहीं समाजवादी समागम मजदूर संगठनों से नौजवानों को समर्थन देने की अपील करते हुए शिक्षकों और अभिभावकों को भी सोनम वांगचुक को समर्थन देने का अनुरोध करते हैं. जारी किए गए अपीलीय पत्र में समाजवादी समागम के अध्यक्ष प्रो. आनंद कुमार, उपाध्यक्ष रामबाबू अग्रवाल,
टी. गोपाल सिंह, हरीश खन्ना, शशि शेखर प्रसाद एवं महामंत्री अनिल ठाकुर व कोषाध्यक्ष महेंद्र शर्मा प्रमुख नाम है.