• 27 वर्षों बाद ज्येष्ठ महीने में अधिक मास, किस देवता की करें आराधना

    इस वर्ष  ज्येष्ठ ( जेठ) के मास में अधिक मास पड़ रहा है. यह बहुत ही शुभ संयोग है , इससे पहले 1999 में ऐसा ही संयोग पड़ा था, जब इस मास में अधिक मास पड़ा था. बता दें कि अधिक मास को ही मलमास कहते हैं. संपूर्ण जानकारी दे रहे हैं विंध्याचल ब्राह्मण सेवा संघ के अध्यक्ष पंडित सुनील पाण्डेय.. पढ़िए, समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की आध्यात्मिक रिपोर्ट:-

    हैदराबाद, 14 मई 2026. इस वर्ष ज्येष्ठ ( जेठ ) के मास में अधिक मास पड़ रहा है . यह बहुत ही शुभ संयोग है, इससे पहले 1999 में ऐसा ही संयोग पड़ा था. पंडित सुनील पाण्डेय बताते हैं कि अधिक मास को ही पुरुषोत्तम मास कहते हैं. इसमें वर्ष में एक महीना अधिक होता है. जिस वर्ष यह मास होता है, उस वर्ष भी त्योहार 15 से 20 दिन लेट होते हैं. इस वर्ष ज्येष्ठ मास आधा मांगलिक कार्यों के लिए बहुत ही शुभ है. लेकिन आधे में मांगलिक कार्य नहीं होंगे. वर्ष 2026 के 11 वर्षों बाद 2037 में फिर से ज्येष्ठ अधिक मास होने का संयोग लेकर आएगा. इसके पहले वर्ष 1999 में मई - जून माह में  ज्येष्ठ अधिक मास पड़ा था

    कब से लगेगा पुरुषोत्तम  मास, इस मास में क्या कार्य करें 

    इस वर्ष पुरुषोत्तम  मास 17 मई से लगेगा. इस मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व है, इसके साथ ही इस मास में सूर्य की पूजा करनी चाहिए. पुरुषोत्तम मास में रोज भागवत पुराण का पाठ करना चाहिए और विष्णु पुराण को सुनना चाहिए. इस मास में भगवान विष्णु की आराधना अधिक फल देती है. तीन कार्य इस मास में बहुत जरूरी है. पंडित सुनील पाण्डेय बताते हैं कि सुबह सवेरे उठकर भगवान विष्णु की पूजा, भगवान विष्णु के अवतार बाल गोपाल को अभिषेक करने और उन्हें माखन मिश्री अर्पित करने से और इसके साथ ही तुलसी जी की सेवा करने से, उन्हें सुहाग का सामान अर्पित करने से, सुबह शाम दीप जलाने से और आराधना करने से इस मास में अधिक फल देने वाली बताई गई है. ऐसा शास्त्रों में वर्णित है.

    इस मास में सुबह उठकर भगवान भास्कर को जल अर्पित करने से एवं शाम के समय पीपल के पेड़ में दीपक जलाने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं. हालांकि, पवित्र नदियों में स्नान भी इस मास में अधिक फल देता है. इतना ही नहीं, स्नान के बाद  पितरों के लिए दान पुण्य एवं भगवान शिव का भी पंचामृत से अभिषेक करना उत्तम फल देता है. इस मास में जूते, छाता, घड़ा, तिल ' गुड़ एवं अनाज और कपड़ों का दान भी उत्तम माना गया है. वही गाय की सेवा भी इस मास में अधिक फल देती है.

    क्या है पुरुषोत्तम मास 
    पंडित सुनील पाण्डेय बताते हैं कि सौर वर्ष ( लगभग 365 दिन और 5 घंटे) तथा चंद्र वर्ष ( लगभग 358 दिन ) के बीच करीब आठ दिनों के अंतर को पूरा करने के लिए अधिक मास की व्यवस्था भारतीय पंचांगों में  है. प्रत्येक 3 वर्ष में हिंदी माह का कोई एक माह अधिक मास ही पुरुषोत्तम मास होता है. अधिक मास में मांगलिक कार्य भले नहीं हो, लेकिन इस महीने में पूजा - पाठ, तीर्थ यात्रा एवं कथा आदि का विशेष महत्व माना जाता है.

    हिरण कश्यप के वध के लिए भगवान विष्णु को बनना पड़ा...

    2 मई से 31 मई 2026 तक ज्येष्ठ मास रहेगा तथा 1 जून से 29 जून तक ज्येष्ठ अधिक मास रहेगा। हिंदू पंचांग में करीब हर 3 वर्ष में एक बार एक अतिरिक्त महीना आता है, जिसे अधिक मास या मलमास कहते हैं. इस 13 महीने उत्पत्ति की पौराणिक कथा भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार और आदित्य राज हिरण कश्यप के वध से ही जुड़ी है.

    अधिक मास का संदेश 
    अधिक मास की कथा हमें सिखाती है कि जब अधर्म चरम पर पहुंचता है, तो भगवान स्वयं रक्षा के लिए अवतरित होते हैं. इस पवित्र मास में की गई साधना  न सिर्फ इस जन्म में, बल्कि आने वाले जन्मों में भी शुभ फल देती है.

    अधिक मास में ना करें यह काम 

    ● अधिक मास में मांगलिक कार्यों को करने से मना किया गया है, इस दौरान विवाह, मुंडन, उपनयन संस्कार और सगाई जैसे मांगलिक कार्य भूलकर  न करें.

    ● अगर आप नए कारोबार को शुरू करने की योजना बना रहे हैं, तो अधिक मास के समापन के बाद करें.

    ● अधिक मास के दौरान शुरू किए गए काम और सफल होने की संभावना रहती है. 

    ● अधिक मास में नए घर की नींव रखना या नए घर में प्रवेश करना शुभ नहीं होता है.

    ● अधिक मास में मांस, मदिरा, लहसुन और प्याज जैसी तामसिक चीजों का सेवन वर्जित है.

    ● इस अधिक मास में सात्विक जीवन जीने की पंडित सुनील पाण्डेय द्वारा सलाह दी गई है.