लखनऊ- कानपुर एक्सप्रेसवे धंसने का मामला पहुंचा हाईकोर्ट, केंद्र और यूपी सरकार को नोटिस
लखनऊ- कानपुर एक्सप्रेसवे के घटिया निर्माण और सड़क धंसने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है. लखनऊ बेंच ने केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार, एनएचएआई और एमओआरटीएच को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
लखनऊ, 15 अगस्त 2026. लखनऊ- कानपुर एक्सप्रेसवे के घटिया निर्माण और बार-बार सड़क धंसने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में जनहित याचिका दाखिल की गई है. हाईकोर्ट में जस्टिस राजन राय और जस्टिस मंजिश शुक्ला की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई की. हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्रालय, एनएचएआई के साथ-साथ एमओआरटीएच से भी जवाब मांगा है. याचिका में सड़क निर्माण करने वाली कंपनी पीएनसी इंफ्राटेक को भी पार्टी बनाया गया है.
हाईकोर्ट में लगाई गई पीएलआई में देश के सबसे ज्यादा टोल लेने वाले एक्सप्रेसवे का बुरा हाल बताया गया है. याचिका में लखनऊ - कानपुर एक्सप्रेसवे को 4.37 रुपए प्रति किमी. के हिसाब से टोल लेने वाला देश का सबसे महंगा एक्सप्रेसवे बताया गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एडवोकेट मोतीलाल यादव ने लखनऊ - कानपुर एक्सप्रेसवे के घटिया निर्माण को लेकर याचिका दायर की है.
13 दिनों में ही धंस गया था एक्सप्रेसवे
बीते महीने 13 जुलाई को कानपुर - लखनऊ एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का बड़े जोर- शोर से उद्घाटन हुआ था. उस समय इसकी क्वालिटी की तुलना जर्मनी की वर्ल्ड क्लास सड़कों से की जा रही थी. हालांकि, उद्घाटन के महज 13 दिनों के भीतर ही यह एक्सप्रेसवे बड़े विवादों में घिर गया था. लगातार हो रही बारिश के बीच उन्नाव जिले के कोरारी के पास 6- लेन सड़क का एक बड़ा हिस्सा कई मीटर तक धंस गया था.
घटना के तुरंत बाद समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने धंसे हुए एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया. वीडियो वायरल होने के बाद मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने भाजपा सरकार और एनएचएआई के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए हमला बोला.
4200 करोड़ की लागत से बना था एक्सप्रेसवे
करीब 4200 करोड़ रुपए की लागत से बने 63 किमी लंबे इस 6 - लेन एलिवेटेड एक्सप्रेसवे का निर्माण पीएनसी कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था एवं निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इसे एनएचएआई को सौंप दिया गया था. मामले के तूल पकड़ने और वीडियो वायरल होने के बाद कंस्ट्रक्शन कंपनी पीएनसी तुरंत मौके पर मरम्मत कार्य में जुट गई थी. वहीं, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर बयान भी जारी की थी.