• राम मंदिर चढ़ावा चोरी:  चंपत राय समेत तीन बड़े नाम एसआईटी के रडार पर, केस में किसी को क्लीनचिट नहीं

    राम मंदिर चढ़ावा  चोरी मामले में एसआईटी की शुरुआती जांच में चंपत राय और अनिल मिश्रा को भी क्लीनचिट नहीं दी गई है. ये लोग लापरवाही, मंदिर प्रबंधन और निगरानी में नाकाम होने के आधार पर आरोपी है. चोरी में संलिप्तता, कमिशन एवं जमीन खरीद- फरोख्त के लगे आरोपों की छानबीन जारी है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह विशेष रिपोर्ट:-

    लखनऊ, 30 जून 2026. राम मंदिर प्रकरण में एसआईटी ने अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट में किसी को भी क्लीनचिट नहीं दी है. लापरवाही, मंदिर प्रबंधन और निगरानी तंत्र फेल होने के सबूतों के आधार पर कई पदाधिकारियों को दोषी पाया गया है. इसमें चंपत  राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव का नाम भी शामिल है. वहीं कमीशन और जमीन की खरीद- फरोख्त में गड़बड़ी के आरोपों की जांच फिलहाल की जा रही है. विस्तृत  जांच पूरी होने के बाद सभी आरोपियों की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी और उसी के आधार पर कार्रवाई भी होगी.

    एसआईटी ने  अपनी शुरुआती जांच रिपोर्ट 23 जून को शासन को सौंपी थी, जिसमें कई सिफारिश भी शामिल थी, जिसका संज्ञान लेकर केस दर्ज कराया गया था. सूत्र बताते हैं कि एसआईटी ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों - चंपत राय, अनिल मिश्र के अलावा निर्माण सहायक गोपाल राव की भूमिका के बारे में भी तथ्य दिए हैं.

    पदाधिकारियों को पाया गया दोषी 

    इसमें स्पष्ट किया गया है कि मंदिर प्रबंधन से जुड़े किसी भी पदाधिकारी, कर्मचारी आदि को क्लीनचिट नहीं दी गई है. वहीं जिस तरह से गिनती के दौरान करोड़ों का चढ़ावा चोरी हुआ, वह प्रबंधन की नाकामी है. इसलिए इसके जिम्मेदार  इन पदाधिकारियों को दोषी पाया गया है. हालांकि, एसआईटी रिपोर्ट आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक नहीं की गई है, इसलिए विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार करना होगा.

    चढ़ावा चोरी में किसकी संलिप्तता... इसकी जांच जारी

    चढ़ावा चोरी केस की विवेचना  सीओ अयोध्या कर रहे हैं. उनके साथ पूरी टीम लगाई गई है. जबकि आरोपियों के बैंक खाते खंगालने से लेकर गिनती में लगे एक-एक कर्मचारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है. इसमें पदाधिकारियों की भी भूमिका की जांच की जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि जिसकी भी संलिप्तता पाई जाएगी, उस पर कार्रवाई तय है.

    कमिशन को लेकर मिल रहे सबूत...

    मामले में सीधे तौर पर अनिल मिश्र पर 40% कमीशन के आरोप लगे थे. वहीं जमीन की खरीद - फरोख्त को लेकर चंपत राय पर भी आरोप है. इन आरोपों की एसआईटी तेजी से जांच कर रही है. कई गवाहों के बयान भी हो चुके हैं. गोपाल राव पर भी कई आरोप हैं. इसलिए वह भी जांच के  दायरे में हैं.