• श्री काशीविद्वद्धर्म परिषद अपनी योजना के तहत निरंतर सक्रिय - प्रो. कमलाकांत

    समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ के साथ हैदराबाद से वरिष्ठ पत्रकार  टी. रमेश बाबू की यह विशेष रिपोर्ट:
    हैदराबाद, 23 जून 2026. सनातन वैदिक धर्म एवं संस्कृति से समाज को समर्पित भावना के साथ निरंतर जोड़ने के प्रयास से काशी विश्वनाथ की पवित्र नगरी काशी में श्री काशीविद्वद्धर्म परिषद जो श्री श्री 1008 मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के द्वारा संस्थापित है, अपने संकल्पों के साथ आगे बढ़ रही है. न्यास के वृहद योजना के अंतर्गत परिषद अपने कार्य क्षेत्र में सराहनीय कार्य कर रही है और समाज को समय-समय पर जागृत करने वाले विशिष्ट संत एवं विद्वानों का अभिनंदन करके अपने कार्य क्षेत्र के विस्तार के साथ ही  समाज को मूल से जोड़ने का एक सराहनीय प्रयास भी कर रहा है. हाल ही में पुष्कर जैसे तीर्थ क्षेत्र में  शत 100 गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ के अनुष्ठान को सविधि पूर्वक पूर्णाहुति करके काशी आगमन पर श्री काशीविद्वद्धर्म परिषद द्वारा महामंडलेश्वर यज्ञ सम्राट स्वामी श्री प्रखर जी महाराज का भाव अभिनंदन कार्यक्रम किया गया.

    अभिनंदन समारोह के मंच संचालन कर रहे श्री श्री 1008 मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास के मुख्य न्यासी तथा गुरुकुल एवं मंदिर सेवा योजना के प्रमुख जम्मू- कश्मीर प्रांत  डॉ. अभिषेक कुमार उपाध्याय ने बताया कि आज कुछ तथा कथित विद्वानों एवं  धर्म ध्वजा को धारण किए संतो द्वारा समाज को दिग्भ्रमित करने का निंदनीय प्रयास किया जा रहा है जो आगे बहुत ही घातक सिद्ध होने वाला है. उन्हीं सभी सज्जनों को सदमार्ग पर लाने के लिए अनवरत अपने ज्ञानमयी एवं शास्त्र दृष्टि से उनके सुधार कैसे हो सके, इस प्रकार के सकारात्मक प्रयासों के लिए परम श्रद्धेय हंसवंशावतंस श्रीमन्महामहिम विद्या मार्तंड श्रीमज्जगद्गुरु निग्रहाचार्य स्वामि श्रीभागवतानंदगुरु को परिषद द्वारा काशी के मूर्धन्य विद्वानों, संतो, महापुरुषों एवं विशिष्ट महानुभावों की गरिमामय उपस्थिति में अभिनंदन करने का निर्णय वास्तव में एक  महत्वपूर्ण कार्य है. इस सम्मान से स्वामी जी को सम्मानित करके परिषद स्वयं को गौरवान्वित अनुभव कर रही है. न केवल स्वामी जी का सम्मान बल्कि सदमार्ग पर दृढ़ता के साथ बढ़ने के लिए परिषद सदैव आपके साथ हैं ऐसा एक बुलंद शंखनाद भी है. अब समय आ गया है कि, समाज को दिग्भ्रमित करने वाले कालनेमियों को पहचान कर उचित विधि व्यवस्था से सही मार्ग पर लाने का, नहीं तो हमारी आगामी पीढ़ी को भविष्य में बहुत कुछ झेलना पड़ेगा. 

    परिषद के द्वारा किए जा रहे अभिनंदन समारोह के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के पूर्व मीमांसा विभाग के निवर्तमान अध्यक्ष एवं श्री काशीविद्वद्धर्मपरिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. कमलकांत त्रिपाठी ने बताया कि ऐसे तो बहुत सी परिषद काशी में है लेकिन उनका दायरा केवल सत्ता एवं धन की लोलुपता के साथ सिमट गया है. ऐसे ही कुछ तथाकथित अन्य परिषद के विद्वानों द्वारा विगत कुछ दिन पहले भगवान वेदव्यास को ब्रह्मणेतर घोषित करने का एक निंदनीय प्रयास किया गया जिसे हमने जोरदार समाधान के साथ समाज को एक लघु ग्रंथ रूप में समाधान एवं सामंजस्य करके निर्णय दिया.

    इस अवसर पर  न्यास के सम्मानित न्यासी एवं परिषद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रो. सुधाकर मिश्र ने कहा कि श्री श्री 1008 मौनी बाबा चैरिटेबल ट्रस्ट न्यास द्वारा इस परिषद को संचालित करने का निर्णय काशी सहित देशभर में लगातार चल रहे अनेक धार्मिक समस्याओं के समाधान हेतु एक ठोस  कार्यवाही एवं निर्णय की दृष्टि से वरिष्ठ विद्वानों के परामर्श से किया गया जो आगे भी अनवरत अपने संकल्पों के साथ कार्य करेगी. अभी बहुत कुछ करणीय कार्य हैं जिसे क्रियान्वित करने में परिषद निरंतर प्रयास कर रही है. हमारा उद्देश्य केवल बोलना नहीं वास्तव में जो कार्य करना है उसे निष्ठा पूर्वक सेवा भाव से करना है.

    कार्यक्रम के मध्य में प्रो. धर्म दत्त चतुर्वेदी ने अभिनंदन पत्र का वाचन करके शास्त्रीय पद्धति से महाराज का गुणगान किया. अपने अभिनंदन कार्यक्रम में वक्तव्य देते हुए   श्रीमज्जगदगुरु निग्रहाचार्य स्वामी श्री भागवतानंदगुरु यह बताया कि काशी में धर्म संस्कृति एवं परंपरा निष्ठ मूर्धन्य विद्वानों से पल्लवित परिषद द्वारा अभिनंदन पाकर मन गदगद हुआ. यह काशी नगरी है अब यहां बाबा श्री काशी विश्वनाथ की कृपा से सम्मान और आशीर्वाद प्राप्त होता है और हमारे ऊपर उनका अनुग्रह इन विद्वानों की कृपा से हुआ.

    काशी के ब्राह्मण, विद्वान एवं संत विश्व का सदैव मार्गदर्शन करते रहे हैं लेकिन आज कुछ छिछोरेपन से ग्रसित एवं सत्ता के मद में चर विद्वान एवं संत का चोला व पदवी धारण करके काशी की गरिमा को धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं. लेकिन जब-जब  काशी में ऐसी विकृति आती है तब- तब बाबा काशी विश्वनाथ अपने मानस पुत्रों को भेजते हैं. पूर्व में परम श्रद्ध्ये धर्म सम्राट स्वामी श्री करपात्री जी महाराज के रहते किसी विद्वान एवं संत में ऐसे कृत्य करने का साहस नहीं हुआ लेकिन आज स्थिति कुछ और ही दिख रही है. ( शेष अगले अंक में)