अमानक बीज और खाद की कालाबाजारी पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है: नेताम
मंत्री नेताम ने शुक्रवार को कृषि विभाग में अपने ढ़ाई वर्ष के कार्यकाल की उपलब्धियों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस ली। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में उर्वरकों का 98 प्रतिशत भंडारण है। किसानों के हित में कोई भी बाधा डाला जाएगा तो हम कार्रवाई करेंगे। आगे पढ़िए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कृषि मंत्री नेताम ने और क्या कहा..
रायपुर, 1 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी, तकनीक आधारित और किसान केंद्रित बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज एवं उर्वरकों की उपलब्धता, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन तथा कृषि अधोसंरचना के विकास के माध्यम से प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई गति मिल रही है।
कृषि विकास एवं किसान कल्याण तथा जैव प्रौद्योगिकी, पशुधन विकास, मत्स्य पालन एवं उद्यानिकी मंत्री रामविचार नेताम ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभागीय उपलब्धियों एवं आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए उपरोक्त बातें कही। इस दौरान मंत्री नेताम ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता किसानों की आय में वृद्धि, खेती की लागत में कमी तथा कृषि को आधुनिक और टिकाऊ बनाना है। राज्य में कृषि एवं उससे जुड़े सभी क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किए जा रहे हैं, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई देने लगे हैं। पॉम ऑयल की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 70 हजार रुपए दे रहे हैं। राज्य और केंद्र मिलाकर इसके लिए करीब लागत के बराबर की राशि की व्यवस्था कर रहे हैं।
बस्तर में पशुपालन और उद्यानिकी के माध्यम से रोजगार देंगे
कृषि मंत्री ने कहा कि बस्तर में हम लोगों के लिए काफी चुनौतियां हैं। पहले बस्तर का पूरा भूभाग लहूलुहान था। पीएम मोदी के मार्गदर्शन, गृह मंत्री अमित शाह के फौलादी इरादे और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जो सामूहिक प्रयास हुए उससे आज बस्तर शांति का टापू बन गया है। वहां व्यापक पैमाने पर काम करने की जरूरत है। अब वहां के नौजवानों और हमारी माता-बहनों को रोजगार देने की बारी है। उन्हें पशुपालन और उद्यानिकी से जोड़कर रोजगार मुहैया करा सकते हैं। कृषि विभाग की पूरी टीम तीन-चार दिनों के बस्तर प्रवास पर थी इस दौरान हमने जाकर वहां के किसानों से बात की और उनकी समस्याएं सुनी तथा हमारे अधिकारियों ने अधिक उत्पादन लेने के बारे में उनका मार्गदर्शन भी किया। केवीके अर्थात कृषि विज्ञान केंद्र के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण देने की योजना तैयार की जा रही है। इस दौरान कोंडागांव के बोरगांव की स्वसहायता समूह की हमारी दीदियों ने मक्के की खेती में फ़र्टिलाइज़र डालने के लिए ड्रोन की मांग की।
रामविचार नेताम ने बताया कि मैदानी क्षेत्र में धान की उपज अधिक लेते हैं। वहां बंपर उत्पादन होता है। हमारे किसानों ने कहा कि हम गर्मी धान की फसल नहीं लेंगे। उन्होंने गर्मी में मक्का, मूंग, उड़द और मूंगफली की खेती की। धान और केला ऐसी फसल है जिसे सर्वाधिक पानी की जरूरत पड़ती है। गर्मी धान की फसल लेने के कारण गर्मी में गांवों के तालाबों को निस्तार के लिए पानी नहीं मिल पाता है। फूलों और फल की खेती की ओर भी किसानों का रुझान बढ़ रहा है।
मंत्री नेताम ने आगे कहा कि किसान जिस फसल से फायदा होता है उसी की खेती करता है। उन्हें धान के बदले दलहन- तिलहन फसल लेने की सलाह हमारे अधिकारी लगातार दे रहे हैं ताकि वे अधिक लाभ उठा सके। कोरबा के बांगो डैम में मत्स्य पालन के साथ-साथ पर्यटन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। फसलों के एमएसपी घोषित होने पर उत्पादन करते समय किसानों के मन से डर खत्म हो जाता है कि फसल को अच्छी कीमत मिलेगी या नहीं।
प्रदेश में पर्याप्त खाद और बीज की उपलब्धता
कृषि मंत्री ने कहा कि पूरे प्रदेश में एक वातावरण बनाया गया कि बीज और खाद की उपलब्धता नहीं हो रही है। इस बार एग्रीटेक के माध्यम से वितरण की व्यवस्था बनाई गई है। 1 एकड़ और 5 एकड़ अर्थात बड़े किसान दोनों को एक साथ उर्वरक दिया जा रहा है। एक बार में ही किसान पूरा खाद खेतों में नहीं डालते हैं इसलिए उन्हें चरणबद्ध खाद दिया जा रहा है। यूरिया के विकल्प नैनो यूरिया और डीएपी के विकल्प नैनो एनपीके देकर उपलब्धता बरकरार रखा गया है। अमानत खाद व बीज देने की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है। पूरे प्रदेश भर में अन्नदाताओं के लिए विभाग सक्रियता से काम कर रहा है। खाद्य वितरण में अनियमितता पाए जाने पर 11 एफआईआर दर्ज कराई गई है। 68000 बोरी खाद जप्त की गई है।
इससे पहले कृषि उत्पादन आयुक्त सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से पत्रकारों को बताया कि खरीफ सीजन 2026 के लिए अप्रैल से सितंबर तक 15.55 लाख मीट्रिक टन रासायनिक उर्वरकों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 30 जुलाई 2026 तक 15.16 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का भंडारण किया जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 98 प्रतिशत है। किसानों द्वारा अब तक 10.23 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का उठाव किया जा चुका है तथा लगभग 4.93 लाख मीट्रिक टन उर्वरक शेष उपलब्ध है।
यूरिया का लक्ष्य से अधिक 102 प्रतिशत भंडारण किया गया है, जबकि डीएपी, एनपीके, एमओपी एवं एसएसपी सहित सभी प्रमुख उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। विभाग द्वारा कालाबाजारी, जमाखोरी तथा अवैध भंडारण पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। 30 जुलाई तक 5,466 निरीक्षण किए गए, जिनमें अनेक मामलों में एफआईआर, लाइसेंस निलंबन, निरस्तीकरण तथा उर्वरक जब्ती जैसी कार्रवाई की गई। प्रदेश में खरीफ 2026 के लिए लगभग 4.95 लाख क्विंटल बीज की मांग के विरुद्ध 4.85 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण किया गया है, जो लगभग 98 प्रतिशत उपलब्धता को दर्शाता है।
कृषक उन्नति योजना से किसानों को मिली बड़ी आर्थिक ताकत
परदेशी ने बताया कि राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी कृषक उन्नति योजना के तहत किसानों को डीबीटी के माध्यम से सीधे बैंक खातों में सहायता राशि उपलब्ध कराई जा रही है। खरीफ 2023 से खरीफ 2025 तक लगभग 25.52 लाख किसानों को 35,892.90 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की गई है। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए धान के स्थान पर अन्य फसल लेने वाले किसानों को प्रति एकड़ मिलने वाली प्रोत्साहन राशि 11 हजार रुपये से बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी गई है।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से लाखों किसानों को लाभ
कृषि उत्पादन आयुक्त ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत प्रदेश के 24.63 लाख किसानों को 23वीं किस्त के रूप में 493 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की गई। अब तक किसानों को 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि उपलब्ध कराई जा चुकी है। एग्रीस्टैक और ई-केवाईसी के माध्यम से योजना को और अधिक पारदर्शी बनाया गया है।
बढ़ रहा है कृषि का रकबा, 83 प्रतिशत बोनी पूर्ण
इस वर्ष खरीफ में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरुद्ध अब तक लगभग 83 प्रतिशत क्षेत्र में बोनी पूरी हो चुकी है। प्रदेश में औसत वर्षा भी सामान्य से अधिक दर्ज की गई है, जिससे खरीफ फसलों की स्थिति संतोषजनक बनी हुई है।
इस मौके पर संचालक कृषि राहुल देव, पशुधन विकास विभाग के चंद्रकांत वर्मा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के एमडी अजय अग्रवाल, उद्यानिकी विभाग संचालक लोकेश चंद्राकर, मत्स्य विभाग के संचालक एनएस नाग, छत्तीसगढ़ राज्य मण्डी बोर्ड के एमडी महेन्द्र सवन्नी, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल, महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति के डॉ. विनित सक्सेना, कृषि अभियांत्रिकी के अपर संचालक जी. के. पीड़िया, मंडी बोर्ड के अपर संचालक अशोक कुंभज तथा सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।