हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों ने दीक्षांत समारोह में चीफ जस्टिस सूर्यकांत को चीफ गेस्ट बनाने का किया विरोध
हैदराबाद की एनएएलएसएआर यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह का मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई है. छात्रों ने उनके हालिया बयानों और छात्र आंदोलन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के रुख का हवाला देते हुए यूनिवर्सिटी के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
हैदराबाद, 10 अगस्त 2026. यहां के नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को अपने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मुख्य न्यायाधीश को मुख्य अतिथि बनाने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है.
हालांकि, यूनिवर्सिटी ने फिलहाल दीक्षांत समारोह की दीक्षांत समारोह की तारीख की घोषणा नहीं की है और न ही मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी की आधिकारिक पुष्टि की है. लेकिन छात्रों के बीच उनके चीफ गेस्ट बनाए जाने की पुख्ता जानकारी पहले से है. दरअसल, इस यूनिवर्सिटी में चीफ जस्टिस का दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होना एक पुरानी परंपरा रही है. छात्रों का विरोध मुख्य न्यायाधीश के हालिया बयानों और दिल्ली में छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई के संदर्भ में उनकी अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ के रुख को लेकर है.
पिछले महीने 23 जुलाई को 2026 बैच के छात्रों ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, प्रोफेसरों और प्रशासन को पत्र लिखकर चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया को दीक्षांत समारोह का चीफ गेस्ट बनाए जाने के फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया था. छात्रों के मुताबिक अभी तक यूनिवर्सिटी द्वारा छात्रों के पत्र की पुष्टि नहीं की गई है और न ही इस पर अपना रूप बताया है.
पुलिस कार्रवाई पर मुख्य न्यायाधीश के रुख से नाराजगी
छात्रों के विरोध का एक कारण अभी-अभी हाल ही में दिल्ली में हुए 'कॉकरोच जनता पार्टी ' (सीजेपी ) के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस बर्बरता पर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी है. बीते 20 जुलाई को इसी यूनिवर्सिटी परिसर में इस विरोध की झलक पहली बार दिखाई दी थी, जब छात्रों ने नीट प्रदर्शनकारियों द्वारा जंतर- मंतर पर अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम बांगचुक के प्रति एकजुटता जताई थी. इसके दो दिन बाद छात्रों ने सामूहिक प्रदर्शन किया था. इसी दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के संसद मार्च के दौरान कथित पुलिस बर्बरता के खिलाफ चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करने से मना कर दिया था.
मुख्य न्यायाधीश की कुछ टिप्पणियां भी इस दौरान चर्चा में रही. उनके 'वी आर नॉट इंटरेस्टेड इन वीडियोज, वी डोंट हैव टाइम टू वॉच देम' और 'डोंट वेस्ट आवर टाइम एंड डोंट वेस्ट योर टाइम' जैसे कथित बयानों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. छात्रों ने अपने पत्र में इन्हीं बयानों और हालिया घटनाक्रम का हवाला देते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से मुख्य न्यायाधीश को मुख्य अतिथि बनाने के फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा है.