मणिपुर में फिर सुलगी हिंसा, 85 एफआईआर दर्ज, 24 की गई जान, पांच इलाके बने बारूद..
मणिपुर में मई 2023 से, इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेई समुदाय और आसपास के पहाड़ों में रहने वाले कुकी समुदाय के बीच जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की विशेष रिपोर्ट..
इंफाल, 16 जुलाई 2026. पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में एक बार फिर अशांति फैली हुई है. अंदर ही अंदर यह राज्य जातीय हिंसा से उबल रहा है. आलम यह है कि बीते करीब 7 महीनों में यानी जनवरी 2026 से जुलाई के दूसरे हफ्ते तक राज्य में नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़प और तनाव से जुड़ी 85 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जबकि इन हिंसक झड़पों में 24 लोगों की जान भी जा चुकी है. इतना ही नहीं यह जातीय हिंसा भीषण रूप अख्तियार कर लिया है और तनाव राजधानी इंफाल से सटे पांच बड़े इलाकों में फैल चुका है. दरअसल, राज्य में पहले हुए मैतेई - कुकी संघर्ष के बाद, अब नागा और कुकी सशस्त्र समूहों के बीच हिंसक टकराव, अपहरण, आगजनी और आर्थिक नाकेबंदी की घटनाएं बढ़ गई है और उसका यह सिलसिला जारी है.
राज्य के पहाड़ी जिलों में नागा और कुकी समुदायों के बीच हिंसक झड़पें 2026 की शुरुआत से ही तेज हो गई है, जिससे राज्य में एक नया जातीय संकट पैदा हो गया है. बीते 6 महीने से अधिक समय में, पुलिस ने राज्य में कानून - व्यवस्था बनाए रखने और जातीय हिंसा पर काबू पाने के लिए 214 से अधिक छापे मारे हैं एवं 75 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से 19 लोगों को हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार भी किया जा चुका है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जनवरी से मध्य जुलाई के बीच हुई हिंसा में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई है, जबकि 47 लोग घायल भी हुए हैं.
पांच बड़े इलाकों की हिंसाग्रस्त के तौर पर पहचान
मणिपुर प्रशासन ने पांच बड़े इलाकों को हिंसाग्रस्त के तौर पर पहचान की है, जो इस बात की तस्दीक करता है कि यह जातीय संघर्ष अब छोटे और स्थानीय पैमाने पर भड़का आक्रोश न रहकर व्यापक आकार ले चुका है. सरकारी डेटा के आधार पर रिपोर्ट में कहा गया है कि घटनाओं का क्रम एक स्पष्ट पैटर्न दिखाता है, जिसमें जनवरी का महीना शांतिपूर्ण रहा और कोई हताहत नहीं हुआ. जबकि पहली घटना फरवरी में उखरूल में दर्ज की गई, जिसमें एक व्यक्ति घायल हुआ. मार्च में हिंसा तेजी से बढी और अप्रैल में भी जारी रही, फिर मई और जून में यह अपने चरम पर पहुंच गई, जब कई जिलों से एक साथ मौत और चोटिल होने की खबरें आई. हालांकि, जुलाई में केवल एक व्यक्ति के चोटिल होने की सूचना मिली है, लेकिन कुल आंकड़े बताते हैं कि बीते 6 महीनों में यह संघर्ष कई पहाड़ी जिलों में फैल चुका.
कहां- कहां फैला संघर्ष?
उच्च स्तरीय सूत्रों के मुताबिक, तनाव वाले क्षेत्रों में
उखरूल - इंफाल रोड, कांगपोकपी - इंफाल- कोहिमा रोड, कामजोंग में म्यांमार सीमा के पास के गांव और तामेंगलोंग के आसपास सीमावर्ती गांव शामिल है. हाईवे, जिलों की सीमाओं के आसपास घटनाओं का होना यह बताता है कि हिंसा वाले ये इलाके सुरक्षा और कनेक्टिविटी के नजरिए से भी रणनीतिक महत्वपूर्ण है. 2 जुलाई 2026 को भी कामजोंग जिला में भारत-म्यांमार सीमा के पास दोनों गुटों के बीच भारी गोलीबारी हुई, जिसमें 20 से अधिक घरों को आग के हवाले कर दिया गया.
उखरूल मुख्य हॉटस्पॉट
विवाद की शुरुआत फरवरी 2026 में उखरूल जिला के लितान गांव में एक मामूली विवाद के बाद हुई थी, बाद में जिसने बड़े टकराव का रूप ले लिया. फरवरी से मई तक यहां कई घटनाएं हुई, दिन में लगातार मौतें और चोटिल के मामले सामने आए. यहां 40 प्राथमिकी दर्ज की गई और 150 से अधिक छापे मारे गए. इसके अलावा उखरूल में 42 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया और उनमें से 13 को गिरफ्तार भी किया गया.
केंद्र से समाधान की गुहार
इस बीच मणिपुर से एक कुकी संगठन ने सोमवार (13 जुलाई) को दावा किया कि इस साल उग्रवादी गुटों ने आदिवासी समुदायों के कम से कम 15 लोगों की हत्या की है और 14 गांव में लगभग 55 घरों को आग के हवाले कर दिया है. इस संगठन ने कानून के तहत समान सुरक्षा की केंद्र से गुहार लगाई है.