• इंदौर में 'छात्रों की गूंज', राहुल बोले- सवाल न पूछे जाएं, इसलिए सिस्टम पैदा कर रहा अंधभक्त

    कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में लगाया आरोप- देश पर सिस्टम का कब्जा.

    इंदौर, 19 सितंबर 2026। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को इंदौर में 'छात्रों की गूंज' को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि सिस्टम पर छह लोगों का कब्ज़ा है. हर प्रोग्राम में हम स्टूडेंट्स के मुद्दे उठाते हैं...आज इंदौर में हमने तय किया है कि हम सिस्टम बनाम स्टूडेंट्स के मुद्दे पर बात करेंगे. राहुल गांधी के कार्यक्रम में काफ़ी संख्या में युवा आए थे, जिनमें से राहुल गांधी ने कुछ से मंच पर बुलाकर बात की.

    स्टूडेंट देश की नींव, शिक्षा उसका बुनियादी हक

    राहुल गांधी ने कहा, "स्टूडेंट देश की नींव होता है. स्टूडेंट देश को बनाता है. शिक्षा कोई लग्जरी नहीं है, बल्कि हर स्टूडेंट का हक है. किंडर से मिड डे मील, स्कूल, कॉलेज और रोजगार… ये आपका काम नहीं है. ये हिंदुस्तान की सरकार का काम है. सरकार को सिस्टम चलाना चाहिए, मगर देश में उलटा हो रहा है.

    राहुल गांधी ने कहा "मोदी सरकार के दौर में शिक्षा बजट में बड़ी कटौती कर दी गई. साल 2004 में शिक्षा के लिए बजट में 2.6% रकम दी जाती थी, जिसे 2014 तक बढ़ाकर 4.6 फीसदी किया गया. पिछले दस साल में यह बजट काटते-काटते 2.6 प्रतिशत कर दिया गया और शिक्षा पर 7.7 लाख करोड़ रुपये की कटौती कर दी गई."

    देश में शिक्षकों के 10 लाख पद खाली पड़े

    उन्होंने आरोप लगाया, "सरकार ने 1.5 करोड़ स्टूडेंट्स की स्कॉलरशिप काट दी. देश में शिक्षकों के 10 लाख पद खाली पड़े हैं. आपको यह जानकर हैरानी होगी कि देशभर में एक लाख स्कूल बंद हुए, लेकिन इनमें से 55 फीसदी स्कूल अकेले मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में बंद हुए. "फिर हॉस्टल का मुद्दा है. हर 100 छात्रों में से केवल 14 छात्रों को ही हॉस्टल में जगह मिल पाती है. यहां भी उन्होंने उदाहरण दिए, लेकिन मुख्य मुद्दा निजीकरण और खर्च में कटौती का है, जो 'सबका साथ, मेरा विकास' के नारे के विपरीत है. जब सरकार शिक्षा में कम निवेश करती है, तो छात्र को जोखिम में डाल दिया जाता है."

    देश के सिस्टम पर छह लोग बैठे हैं, और यही देश चलाते हैं

    राहुल गांधी ने आरोप लगाते हुए कहा, देश के सिस्टम पर छह लोग बैठे हैं, और यही देश चलाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सिस्टम चलाते हैं. अमित शाह स्टूडेंट्स पर बल प्रयोग कराते हैं. मोहन भागवत विचारधारा की बात करते हैं, उन्हें हज़ारों करोड़ रुपये स्कूल कॉलेज चलाने के लिए दिए जाते हैं. सिस्टम में बैठे लोग विपक्षी नेताओं की जासूसी कराते हैं और उद्योगपति सरकार को मार्केटिंग के लिए पैसे देते हैं.'

    उन्होंने कहा, "सिस्टम ने निचले स्तर पर हर जगह अपना एक आदमी बैठा रखा है. सचिन तेंदुलकर, कपिल देव के होते हुए भी वहां अमित शाह के बेटे को बैठा दिया गया. स्डूडेंट्स यही सवाल करते हैं कि ऐसा कैसे हुआ. संस्थाएं अपना काम क्यों नहीं करतीं. सिस्टम स्टूडेंट्स नहीं चाहते, सिस्टम 'अंधभक्त' चाहते हैं. वो नफ़रत फैलाते हैं और नफ़रत से बात करते हैं."