• IPS अंजलि विश्वकर्मा यूपी कैडर छोड़कर छत्तीसगढ़ क्यों आ रही हैं? पढ़िए पूरी स्टोरी..

    उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर में एडीसीपी के पद पर तैनात अंजलि विश्वकर्मा यूपी कैडर छोड़कर अब छत्तीसगढ़ कैडर की आईपीएस अधिकारी बन गई हैं। गृह मंत्रालय ने उनके आवेदन पर उनका कैडर बदल दिया है। उत्तराखंड की मूल निवासी अंजलि का जितना शानदार कैरियर रहा है, उतनी ही रोचक उनकी लव स्टोरी है।

    रायपुर/कानपुर, 24 जुलाई 2026। 2021 बैच की भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी अंजली विश्वकर्मा ने उत्तर प्रदेश कैडर छोड़ दिया है। अब वे छत्तीसगढ़ कैडर में अपनी सेवाएं देंगी। गृह मंत्रालय ने उनके कैडर में बदलाव का आदेश जारी कर दिया है। उनका कैडर शादी के आधार पर बदला गया है। उनके पति आईपीएस उदित पुष्कर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के निवासी हैं और वे छत्तीसगढ़ में तैनात हैं। इसी आधार पर अंजली ने उनका कैडर यूपी से बदलकर छत्तीसगढ़ करने का आवेदन दिया था। इस पर 20 जुलाई को आदेश जारी कर दिया गया है। अब अंजलि और उनके पति एक ही कैडर में सेवाएं देंगे।

    अंजलि के पति IPS उदित पुष्कर रायपुर में तैनात
    अंजलि विश्वकर्मा और उदित पुष्कर दोनों ही सन 2021 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। पुष्कर इस समय रायपुर में राजभवन में राज्यपाल के परिसहाय, यानी Aide-de-Camp' (ADC) के पद पर तैनात हैं। फिलहाल यह तय नहीं है कि अंजलि को छत्तीसगढ़ में किस स्थान पर पोस्टिंग दी जाएगी। अंजलि विश्वकर्मा तेजतर्रार पुलिस अधिकारी हैं और उनका 5 साल का कैरियर शानदार रहा है। वे कानपुर में मार्च, 2025 से एडीशनल डीसीपी (साइबर क्राइम) के पद पर तैनात हैं।

    उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की रहने वालीं अंजलि विश्वकर्मा सन 2021 में भारतीय पुलिस सेवा में चयनित हुई थीं और दिसंबर, 2023 में उनकी सेवाएं कन्फर्म की गई थीं। एक जनवरी, 2025 को उनको सीनियर स्केल दिया गया था। उनको 26 जनवरी, 2026 को सेवा सम्मान (डीजी प्रशंसा डिस्क- सिल्वर) से नवाजा गया था।

    अंजलि ने सुलझाए कई जटिल केस
    अंजलि विश्वकर्मा को पहली पोस्टिंग झांसी में मिली थी। वहां उन्होंने लापता हुई एक 15 साल की बच्ची को इंस्टाग्राम रील में दिखाई दिए एक दरवाजे के छोटे से नंबर के आधार पर सैकड़ों किलोमीटर दूर खोज निकाला था। उन्होंने महाराष्ट्र के पिंपरी में बच्ची को सकुशल छुड़ा लिया था।

    सुरागों से साजिशों का पर्दाफाश
    कानपुर में इमरान हत्याकांड की जांच के दौरान में अपराध स्थल पर अंजलि को 'नाइट्राबेट' नाम की दवाई के रैपर मिले थे। वे इसी सुराग के जरिए हत्यारों तक पहुंचने में कामयाब हो गई थीं। उन्होंने एक ऐसे चाइल्ड ट्रैफिकिंग गिरोह का पर्दाफाश किया था जो कि बच्चों को 30 से 50 हजार रुपये में बेचता था। उन्होंने गिरोह के सदस्यों और अंकित आनंद सहित बच्चों को खरीदने वाले अन्य आरोपियों को धरदबोचा था।