• केन -  बेतवा लिंक परियोजना से उजड़े 50 हजार लोग: 'न्याय दो या मार दो '  नारे के साथ 'चिता आंदोलन' फिर शुरू

    मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों की महत्वाकांक्षी  केन - बेतवा लिंक परियोजना के अलावा अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित लोगों ने अप्रैल में भी प्रदर्शन किया था. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-

    भोपाल/ छतरपुर / पन्ना, 7 जुलाई 2026. मध्य प्रदेश के  छतरपुर और  पन्ना जिलों की  महत्वाकांक्षी  केन- बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित लोगों का 'चीता आंदोलन ' एक बार फिर शुरू हो गया है. दरअसल, अप्रैल में प्रशासन के आश्वासनों पर यह आंदोलन स्थगित कर दिया गया था. लेकिन मांग पूरी नहीं होने पर यह आंदोलन अब एक बार फिर से "न्याय दो या मार दो " के नारे के साथ पन्ना जिले के  कुपी गांव के पास बराना नदी के किनारे फिर से शुरू हो गया है. इस आंदोलन का नेतृत्व आदिवासी महिलाएं कर रही हैं.

    उनका आरोप है कि सरकार और प्रशासन ने  पुनर्वास, मुआवजे और पैकेज से जुड़े एक भी वादे पूरे नहीं किए. उल्टे मानसून के दौरान लोगों के घर उजाड़ दिए गए, जिससे अनेक गरीब परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं. केन - बेतवा लिंक परियोजना के अलावा मझगाय माध्यम, रूँझ, नैगुवा सिंचाई और एनटीपीसी की परियोजनाओं का भी विरोध किया जा रहा है.

    जबरन बेदखली मंजूर नहीं! विस्थापन- विहीन विकास लागू करें सरकार - डॉ सुनीलम 
    इसी क्रम में बीते दिनों भूमि अधिकार आंदोलन की राज्य स्तरीय बैठक भोपाल स्थित गांधी भवन में हुई. जहां गुजरात से आए आदिवासी समन्वय मंच के अशोक चौधरी, राजस्थान से कुसुम रावत, संयुक्त किसान मोर्चा के विशिष्ट किसान नेता डॉ. सुनीलम, किसान संघर्ष समिति के आराधना भार्गव, राष्ट्रीय प्रवक्ता शिव सिंह, जन स्वास्थ्य अभियान ( इंडिया) के अमूल्य निधि, नर्मदा बचाओ आंदोलन के  भगवान सेप्टा, बारंगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राजकुमार सिंह सहित अनेक  विशिष्ट व्यक्तियों की मौजूदगी में भूमि अधिग्रहण, बांध, खनन, औद्योगिक परियोजनाओं, वनाधिकार और आजीविका पर चर्चा की गई और आगामी दिनों में प्रदेश व्यापी आंदोलन की घोषणा की गई.

    दूसरी ओर  विशिष्ट सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलन के नेता अमित भटनागर ने प्रशासन की कार्य शैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इस मौके पर डॉ. सुनीलम ने कहा कि प्रशासन के भ्रष्ट और तानाशाही रवैये के कारण 50 हजार लोग बेघर हो गए हैं, वे लोग अपने जंगल, जमीन, आजीविका, जल और संस्कृति से बेदखल हुए हैं, उनकी लड़ाई हम लड़ते रहेंगे. डॉ. सुनीलम और अमित भटनागर ने केन - बेतवा लिंक परियोजना के कारण 46 लाख  पेड़ पन्ना रिजर्व टाइगर, केन नदी आदि के विनाश को पर्यावरण की अपूरणीय क्षति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.

    वहीं, आंदोलन के दूसरे नेता दिव्या अहिरवार और लक्ष्मी आदिवासी ने कहा कि बीते अप्रैल में चले   हमारे चीता आंदोलन के बाद प्रशासन ने हमारी मांगे पूरी करने के जितने वादे किए थे उसमें से एक भी पालन नहीं किया गया. उल्टे लोगों में भय का माहौल पैदा करने के लिए फर्जी मुकदमे, गैर कानूनी बेदखली, बिजली बाधित, स्कूल तोड़ने जैसे अवैधानिक और अमानवीय कृत्य किए जा रहे हैं. लोक प्रशासन के अन्याय और भ्रष्ट नीति के खिलाफ आवाज ना उठे, इसके लिए पुलिस प्रशासन लोगों पर हर तरह के जुल्म ढा रहे हैं.

    इस बारे में डॉ. सुनीलम का कहना है कि अधिकांश प्रभावित परिवारों को अब तक न तो मकानों का मुआवजा मिला है और न ही पुनर्वास पैकेज की पूरी राशि. ऐसे में विस्थापित हुए लोग ना घर के रहे और न ही उनके पास नया ठिकाना बनाने के लिए पर्याप्त संसाधन है.