अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका अपनी पसंद से खरीदेंगी साड़ी, खाते में सीधे भेजी जाएंगी राशि
'लूगरा चोरी' के आरोप के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने स्वयं साड़ी नहीं खरीदने का फैसला किया है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि अब साड़ी के पैसे आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के खाते में सीधे भेजे जाएंगे।
रायपुर, 24 जून 2026। पिछली बार महिला बाल विकास विभाग द्वारा राज्य की 100000 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को दी गई साड़ियों की गुणवत्ता को लेकर बवाल मचा था। इसको लेकर विपक्ष काफी हमलावर था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 'लूगरा चोर' तक कहा था। शिकायतों के बाद महिला एवं बाल विकास ने विभाग द्वारा खुद साड़ी नहीं खरीदने का निर्णय लिया गया है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी सुधार का निर्णय लेते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं के लिए साड़ी की संचालनालय स्तर पर होने वाली केंद्रीकृत खरीदी व्यवस्था को समाप्त कर दिया है।
अब साड़ी खरीदी के लिए निर्धारित राशि सीधे कर्मचारियों के बैंक खातों में अंतरित की जाएगी। हाल के दिनों में साड़ी खरीदी प्रक्रिया को लेकर सामने आए विभिन्न मुद्दों तथा प्राप्त सुझावों का गंभीरता से परीक्षण करने के बाद यह निर्णय लिया गया है। यह कदम न केवल व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को अपनी पसंद और आवश्यकता के अनुरूप साड़ी चयन करने की स्वतंत्रता भी प्रदान करेगा।
विभाग ने खरीदी थी दो लाख साड़ियां, पहले मास्टरमाइंड पर गिरी गाज और अब बदलाव
प्रदेश के 100000 से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को महिला एवं बाल विकास विभाग ने ड्रेस कोड में एकरूपता लाने के लिए करीब 2 लाख साड़ी खरीदकर बांटी थी। बताते हैं कि एक साड़ी खरीदने के लिए 588 रुपए खर्च किए गए थे लेकिन जब संचालनालय महिला एवं बाल विकास द्वारा साड़ी खरीद कर आंगनबाड़ी केंद्रों को भेजी गई। तो साड़ियों की लंबाई पर्याप्त नहीं थी। महिलाओं ने शिकायत की थी कि साड़ी की लंबाई 6 मीटर की बजाय 5.50 मीटर ही है जिससे ब्लाउज भी नहीं बनाए जा सकते और एक बार धोने पर पूरा कलर पानी में छोड़ दिया तथा दूसरी बार पहनने लायक नहीं थी। इसे गंभीरता से लेते हुए मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने पिछले दिनों पूरे मामले के मास्टरमाइंड को तत्काल हटा दिया था और विभाग में नई प्रणाली लागू किया है अब आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अपनी पसंद की साड़ी खुद खरीद सकेंगी।
डायरेक्ट बेनिफिट के माध्यम से राशि का ट्रांसफर
महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्पष्ट सोच है कि शासन की राशि अधिकतम रूप से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे लक्षित व्यक्ति तक पहुंचे, ताकि बिचौलियों और अनावश्यक प्रक्रियाओं की कोई गुंजाइश न रहे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी प्रदेश में अनेक पारदर्शी और तकनीक आधारित सुधार लागू कर सुशासन का नया मॉडल प्रस्तुत किया है। विभाग का यह निर्णय उसी सोच का विस्तार है।
साड़ी का रंग एवं डिज़ाइन विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी
मंत्री राजवाड़े ने विभाग को निर्देशित किया है कि साड़ी का डिज़ाइन पूर्ववत रखा जाए तथा अंतिम स्वरूप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं से परामर्श के बाद निर्धारित किया जाए। साड़ी का रंग एवं डिज़ाइन विभागीय स्तर पर निर्धारित कर उसकी जानकारी विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरे प्रदेश में एकरूपता बनी रहे। वहीं साड़ी के कपड़े जैसे कॉटन, सिंथेटिक अथवा अन्य विकल्पों का चयन स्थानीय स्तर पर स्वयं कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं कर सकेंगी।
प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि दी जाएगी
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार की बाल विकास सेवा योजना के अंतर्गत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं को उनकी पहचान और एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष दो यूनिफॉर्म प्रदान करने का प्रावधान है, जिसके लिए प्रति यूनिफॉर्म अधिकतम 500 रुपये की राशि निर्धारित है।