• छोटा पैकेट, बड़ा धमाका

    -डी. आर.साहू

    काम कम पब्लिसिटी ज्यादा
    राज्य में मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच एक प्रशासनिक बदलाव भी बचा हुआ है। दरअसल छह मई को जारी आदेश में दो से ढाई साल वाले कुछ कलेक्टर छूट गए थे। उन्हें बदले जाने की चर्चा है। उनमें से एक जिले के कलेक्टर महोदय पब्लिसिटी के लिए कब से जोर आजमाइश कर रहे हैं। इस बीच पुराने वाले साहब के दिल्ली जाने के कारण पब्लिसिटी में उनकी जगह नये साहब की नियुक्ति हो गई। कलेक्टर साहब के बारे में कहा जाता है कि वह स्वयं को संघ पृष्ठभूमि के बताते हैं तथा काम कम और पब्लिसिटी में ज्यादा में यकीन रखते हैं। उनकी इस क्वालिटी से सरकार भलीभांति वाकिफ़ है। उनको बैठाते तो वह सरकार की कम अपनी पब्लिसिटी में ज्यादा लग जाते।

    सूखे पाइपलाइन के बीच स्रोत की तलाश
    राज्य में भीषण गर्मी ने पेयजल की संकट को और गहरा दिया है। जल जीवन मिशन की पाइपलाइन लोगों के घरों तक तो पहुंच गई है, लेकिन पानी नहीं पहुंचा है। बताते हैं कि शीघ्र भुगतान लेने की होड़ में ठेकेदारों ने पाइपलाइन तो बिछा दिया, लेकिन जल स्रोत और जलापूर्ति पर ध्यान ही नहीं दिया। राज्य में सत्ता बदलने के बाद भी इस ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। चाहते तो डंडा चलाकर ठेकेदारों से अधूरे कामों को पूरा करा सकते थे, लेकिन हुक्मरान ने सूखे पाइपलाइन के बीच स्रोत ढूंढ ली। खबर है कि वहां केंद्र से 8000 करोड़ रुपये का बजट आया है और काफी लंबा चौड़ा भुगतान होना है। इसीलिए मंत्रालय वाले साहब को वहां डायरेक्टर का भी प्रभार दिया गया। 

    बादशाहत खतरे में
    पीडब्ल्यूडी का प्रभार लेते ही नये साहब एक्शन मोड में आ गए हैं। बस्तर से लेकर बलरामपुर तक सड़क पर उतरकर मुआयना कर रहे हैं। स्पॉट पर जाकर प्रोग्रेस की स्थिति देख रहे हैं और वहीं कामों की समीक्षा भी कर रहे हैं। पहली बार किसी साहब ने ठेकेदारों से उनकी परेशानी पूछी है। कई जगहों पर यह देखने में आया कि समय पर भुगतान नहीं होने के कारण काम आगे नहीं बढ़ पाया। फिर क्या था साहब ने हर महीने राज्य मुख्यालय से बिल भुगतान की प्रणाली को बदलकर तीन महीने की राशि ईई को देने का फरमान जारी कर दिया। एसी कमरे में बैठकर बिलों को सामने रखकर कैलकुलेटर और कैंची चलाने वाले नुमाइंदे, साहब के पीछे-पीछे तपती दोपहरी में पसीने से लथपथ होकर सड़कों की खाक छानते नजर आए। बताते हैं कि वह नये साहब के रौद्र रूप को देखकर सहमे हुए हैं। 

    देर ना हो जाए कहीं..
    नितिन नवीन के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के गठन के बाद राज्य में भी बदलाव की चर्चा है। बदलाव कितना व्यापक होगा या आंशिक यह बता पाना गासिफ होगा। इसका जवाब राजनीति के चाणक्य ही दे सकते हैं। बहरहाल राज्य में कई दावेदार सक्रिय हो गए हैं और नागपुर से लेकर दिल्ली तक लॉबिंग कर रहे हैं। पता चला है कि दो पूर्व मंत्री भी अंदर ही अंदर कब से अपने संपर्कों के जरिए जोर लगा रहे हैं। एक पंडित जी आखिरी पारी होने की दुहाई देकर महामहिम तक जोर आजमाइश करते देखे गए हैं।

    तू जहां- जहां चलेगा मेरा..
    मंत्रालय में एक साहब का विभाग बदलते ही मोहतरमा ने भी अपना विभाग बदलवा लिया। मंत्रालय के गलियारे में इसकी जमकर चर्चा हो रही है। प्रेम की दीवानी खुद को मोहन की मीरा बताती है। ठीक उसी तरह साहब के साथ-साथ चलती हैं, 'तू जहां-जहां चलेगा मेरा साया..।' 

    कुछ तो खिचड़ी पकी है?
    गुरुवार की रात मुख्यमंत्री ने अचानक मंत्रियों की मीटिंग बुलाई, राज्य में सियासी हलचलें तेज हो गई। अटकलों का दौर चालू हो गया। बताते हैं बिना एजेंडा बताएं रात 8:30 बजे सीएम हाउस पहुंचने के फरमान से एक मंत्री बेंगलुरु से आनन फानन में फ्लाइट लेकर रायपुर पहुंचे। वहीं एक मंत्री झारखंड से हेलीकॉप्टर लेकर राजधानी पहुंचे। एक माननीय को भी शाम 4 बजे सूचना मिली और वे हांफते हुए अंबिकापुर से रात 9:00 बजे सीधे सीएम हाउस पहुंचे। इसी तरह बाकी मंत्रियों का भी हाल रहा। बैठक के बाद यह कहा गया कि प्रभार जिलों में मंत्रियों के व्यवहार से जनता नाराज है। कई मंत्री पार्टी के पदाधिकारियों तक के फोन नहीं उठाते। मंत्रियों को सख्त हिदायत दी गई है। वहीं सूत्र बताते हैं बात कुछ और है, रात 2 बजे तक चली 5 घंटे की मैराथन बैठक में कुछ तो खिचड़ी पकी है जो आने वाले समय में दृष्टव्य हो जाएगा।

    पुछल्ला
    भाजपा की पिछली सरकार में मुख्यमंत्री सचिवालय में शिवराज सिंह, बैजेन्द्र कुमार और अमन सिंह जैसे दिग्गज अधिकारियों की फौज थी। उनके बीच रहकर प्रशासन और राजनीति के दांव-पेंच को भलीभांति सीखा जा सकता था। उस पाठशाला से निकले एक साहब बहुत सूझबूझ के साथ कदम आगे बढ़ा रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सत्ता और नौकरशाहों के बीच बड़ी खामोशी से ऐसी गोटी बिछाई कि बड़े-बड़े दिग्गजों के चारों खाने चित्त हो गए।

    बूझो तो जानें
      एक मोहतरमा का नाम बताइए जो शशिकला बनते-बनते रह गईं?

      एक माननीय ने नियम बना रखा है कि उनके द्वारा भूमिपूजन का नारियल तोड़ते ही शाम को ठेकेदार पूजा पाठ की सामग्री तय अनुपात में बंगले में छोड़ जाते हैं।

      लोगों को अपना पसंदीदा ब्रांड नहीं मिल रहा है, राज्यभर में नान-ब्रांड और ओवर रेटिंग का खेल चल रहा है, आका कौन है?

      फेरबदल की खबरों के बीच किस मंत्री की रातों की नींद उड़ी हुई है और वह हर आने वाले पत्रकार से एक ही सवाल पूछते हैं कि हमारे बारे में क्या खबर है?