' सिर्फ जिंदा लाशें बची हैं..,' सांसदों की बगावत के बीच राज ठाकरे ने उद्धव का किया समर्थन
राज ठाकरे ने शिवसेना (यूबीटी ) के 6 सांसदों की बगावत के बीच चचेरे भाई उद्धव ठाकरे का समर्थन किया, आरोप लगाया कि राजनीतिक फायदे के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों को बांटा जा रहा है. समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की यह खास रिपोर्ट:-
मुंबई, 20 जून 2026. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे ने शनिवार को शिवसेना (यूबीटी ) के छह लोकसभा सांसदों की बगावत के बीच अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे का खुलकर समर्थन किया. उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक फायदे के लिए चुने हुए प्रतिनिधियों को बांटने की कोशिश की जा रही है. मुंबई में एक सभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि यहां सांसदों को तोड़ने की कोशिशें चल रही है, सत्ता के लिए राजनीति जोरों पर हैं. मेरा मानना है कि राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं से अधिक जनता को इन सब बातों पर ध्यान रखनी चाहिए. यह पुरानी कहावत है कि जब स्वाभिमान खत्म हो जाता है, तो सिर्फ जिंदा लाशें ही बचती हैं.
सत्ता की होड़ में बुनियादी मुद्दे भूले
मनसे प्रमुख ने कहा कि सत्ता पर कब्जा करने की होड़ में राजनीतिक दल महाराष्ट्र और देश के सामने मौजूद बड़े और अहम मुद्दों को भूल रहे हैं. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "विधायकों और सांसदों के अपहरण के इस खेल में, हम अपनी बुनियादी चीजें भूल रहे हैं. हम महाराष्ट्र की परंपरा, इसके इतिहास और राष्ट्र की परंपरा को भूल रहे हैं."
राज ठाकरे ने राजनीतिक दलों पर जन समर्थन के जरिए चुनाव लड़ने के बजाय विरोधियों को कमजोर करने के हथकंडे अपनाने का भी आरोप लगाया. पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी रणनीतियों को समझने की नसीहत देते हुए राज ठाकरे ने कहा, "हमारा आंदोलन घरों तक पहुंचता है, लेकिन बैलट बॉक्स तक नहीं पहुंचते, आप इसे क्या कहेंगे? क्या हमें इस बात का एहसास भी है कि हमारे चारों ओर कोई साजिश रची जा रही है? "
चोरों के हाथ में नहीं जाने दूंगा पार्टी
राज ठाकरे की यह टिप्पणी उद्धव ठाकरे की उस प्रतिक्रिया के ठीक 1 दिन बाद आई है, जिसमें उद्धव ने शिवसेना( यूबीटी ) में हुई ताजा बगावत पर अपना रूख स्पष्ट किया था. शिवसेना के 60 वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में उद्धव ठाकरे ने कहा था कि चुनौतियों के बावजूद वह दृढ़ हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कार्यकर्ताओं का उन पर भरोसा उठ गया है तो वह पार्टी प्रमुख का पद छोड़ने को भी तैयार हैं. उन्होंने कहा था, "मुझे बहुत खुशी होगी अगर पार्टी के भीतर से ही कोई अगला शिवसेना अध्यक्ष बनता है, लेकिन मैं इस पार्टी को चोरों के हाथों में नहीं जाने दूंगा."
क्या है शिवसेना ( यूबीटी ) में बगावत का पूरा मामला?
शिवसेना ( यूबीटी ) में यह ताजा संकट पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों की बगावत से शुरू हुआ है इन सांसदों ने पार्टी व्हिप जारी होने के बावजूद नई दिल्ली में बुलाई गई. एक महत्वपूर्ण संसदीय दल की बैठक से दूरी बना ली. बैठक से दूरी बनाने वाले इन 6 सांसदों में नागेश आष्टिकर, संजय जाधव, संजय देशमुख, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिंबालकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल है.
वहीं, बैठक में शामिल होने वाले राज्यसभा सांसद संजय राउत के साथ केवल तीन लोकसभा सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे प्रमुख नाम है. इन चारों वफादार नेताओं को बाद में मुंबई में पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम में सम्मानित किया गया. पार्टी ने बगावती तेवर दिखाने वाले इन गैर हाजिर सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है. उन्हें 24 घंटे के भीतर अपनी अनुपस्थिति का स्पष्टीकरण देने को कहा गया है और ऐसा न करने पर उनके खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई है.