• छोटा पैकेट, बड़ा धमाका

    डी. आर.  साहू

    वेदांता हादसे में अनिल अग्रवाल के नाम पर बवाल
    प्रदेश के कारखानों में दुर्घटना से हो रहे मौतों की संख्या में वृद्धि पर नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने विधानसभा में चिंता जाहिर करते हुए उद्योग मंत्री को जोरदार घेरा। वहीं सक्ती के वेदांता हादसे पर विधायक रामकुमार यादव ने सरकार पर झूठ बोलने का आरोप लगाया कि  दुर्घटना के 3 महीने बीतने के बाद भी पीड़ित परिवारों को अभी तक  मुआवजा नहीं मिला है। डॉ. चरण दास महंत ने उद्योग मंत्री से पूछा कि वेदांता प्लांट हादसा में उसके चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम किस कारण जोड़ा गया है? क्या प्रदेश के सभी फैक्ट्री दुर्घटना में दर्ज एफआईआर में उसके संचालकों का नाम शामिल किया जाएगा। मंत्री लखन लाल देवांगन कड़ी कार्रवाई की बात करते रहे लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। इस पर तंज कसते हुए भूपेश बघेल ने कहा कि क्या चहेते को नीलामी में फैक्ट्री दिलाने के लिए एफआईआर में अनिल अग्रवाल का नाम दबाव डालने के लिए जोड़ा गया है?

    लगता है दिनभर चढ़ी रहती है..
    अविश्वास प्रस्ताव पर सदन में तीखी नोक झोक देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत जब अविश्वास प्रस्ताव पेश कर रहे थे तब सत्ता पक्ष के विधायक अजय चंद्राकर ने टीका- टिप्पणी करते हुए कहा कि महंत जी अविश्वास प्रस्ताव भी ला रहे हैं और प्रश्न भी पूछ रहे हैं। अजय चंद्राकर के रोक-टोक से नाराज होकर चरणदास महंत ने जोरदार पलटवार किया और बोले- आप हमेशा गड़बड़ करते हो, लगता है दिनभर आपको चढ़ी रहती है। अविश्वास प्रस्ताव में क्या है यह तो बताने दो। यह सुनकर अजय चंद्राकर चुप बैठ जाते हैं और सदन ठहाकों से गूंज उठता है। 

    इस बार क्रीज़ ट्रांसपोर्ट की है..

    झाड़ियों में छिपकर डेढ़ साल में ही जंगल को चट करने वाले एक नुमाइंदे अब फ्रंट में आकर खेलने लगे हैं। लेकिन इस बार क्रीज़ ट्रांसपोर्ट की है। शुरुआती डेढ़ साल वे बैक ऑफिस से ही काम करते रहे, सामने नहीं आए। एक साल से वहां से भी अदृश्य हो गए थे। अरण्य के अफ़सर उनके भयादोहन के किस्से अभी तक भूल नहीं पाए हैं। कुबेर का खजाना लेकर चलने वाले पूर्ववर्ती अरण्य प्रमुख भी इस नुमाइंदे के बड़े पेट के आगे हाथ जोड़ लिए थे। शिक्षा विभाग से रिटायरमेंट के 5 साल बाद भी इस कलाकार की भूख नहीं मिटी है। गुलाम भारत में जैसे अंग्रेज भारतीयों के खून भी निकाल लेते थे। उसी तरह ये भी अधिकारियों के खून चूसने तक पर उतारू हो आते हैं। 

    जब थैला भरते- भरते हांफने लगे नेताजी.. 
    वहीं राज्य के एक सहकारी बैंक में दो-दो कंसलटेंट नियुक्त करने की तैयारी चल रही है। बताया जाता है कि एक जिला बैंक के सीईओ और एक मुख्यालय के ओएसडी को सेवानिवृत्ति के बाद हर माह लाखों रुपए की तनख्वाह पर बैठाने की तैयारी की जा रही है। बताते हैं कि प्रस्ताव रजिस्ट्रार को भेजा जा चुका है। इसकी इनसाइड स्टोरी कुछ अलग ही है। चर्चा है कि रिटायर्ड सीईओ ने नेताजी को आश्वासन दिया है कि वह हर महीने जिला बैंकों से उनके लिए बड़ी सामग्री इकट्ठा करेंगे। वहीं ओएसडी साहब आईटी सेक्टर से कुछ करेंगे। बताया जाता है कि मुख्यालय के हर अधिकारी नेताजी के थैले में कुछ ना कुछ डाल चुके हैं चाहे गणेश चंदा के नाम पर ही क्यों न हो लेकिन नेताजी का थैला है कि भरने का नाम ही नहीं ले रहा है। इसलिए नेताजी रिटायर्ड अधिकारियों को भी सहयोग करने के लिए बुला रहे हैं।

    जंगल में मंगल
    'इश्क छुपता नहीं छिपाने से' समीर का यह गाना आपने सुना होगा। इन दिनों अरण्य की हरी वादियों में इसकी गूंज कुछ अधिक ही सुनाई दे रही है। दरअसल वहां के एक साहब अपनी रासलीला में इतने मगन हैं कि उन्हें दुनियादारी की बिलकुल भी परवाह नहीं है। पता चला है कि वे अपनी सहकर्मी के साथ अक्सर हवाई यात्रा पर निकल जाते हैं और परम-आनंद की अनुभूति कर लौट जाते हैं। साहब अपनी प्रेमिका को खुश करने के लिए दफ्तर के अन्य मातहतों को आए दिन फटकार लगाते रहते हैं। बहरहाल साहब के इश्क की चर्चा महकमे से होकर मंत्रालय तक पहुंच गई है।

    ऐसे हुई रसिक बलमा की छुट्टी...

    एक अखिल भारतीय सेवा स्तर के अधिकारी रिटायरमेंट के महज 25 दिन पहले ही हटा दिए गये। बताते हैं कि अपने स्टेनो को दौरे में भेज कर उसके घर पहुंच जाते थे। एक बार साहब का मोबाइल खराब हुआ तो उसे सुधरवाने के लिए स्टेनो को भेजा। स्टेनो ने रिपेयर शॉप से उन्हें फोन कर पासवर्ड मांगा। साहब ने दे भी दिया। स्टेनो का जब व्हाट्सएप चैटिंग पर ध्यान गया तो वह दंग रह गया। उसकी ही पत्नी के साथ साहब ने हर तरह की अश्लील चैट की थी। उसे समझते देर नहीं लगी कि क्यों उसे साहब दौरे पर भेजते थे। ओएसडी भी सत्ता- संगठन से जुड़ा हुआ व्यक्ति था। महानदी भवन पहुंचकर उन्होंने सारे अश्लील चैट के स्क्रीनशॉट बड़े साहब को दिखाएं और अपने दांपत्य जीवन को बचाने की गुहार लगाई। फिर सरकार ने वहां से रसिक बलमा की छुट्टी कर दी।

    पुछल्ला
    सूबे के एक ओएसडी, सेक्रेटरी के साथ गठजोड़ कर माननीय को डूबाने की पूरी तैयारी कर बैठे हैं। मानो सेक्रेटरी के एजेंडे को पूरा करने के लिए ही बंगले में नियुक्त हो। माननीय की आंखों में पट्टी बांधकर धृतराष्ट्र बने बैठे हैं। किसी दिन नैय्या डूबेगी, तब आंखों से पट्टी खुलेगी।

    बूझो तो जानें..
    0 महिला मातहत को गोवा की सैर कराने वाले एक आईएएस का नाम क्या आपको पता है?

    0 किस माननीय की धर्मपत्नी रात दो बजे पति को रंगे हाथों पकड़ने सरकारी बंगले पहुंच जाती है।

    0 खुद 16 आने और माननीय को चार आने दिलवाकर एक सचिव खूब ढिंढोरा पीट रहे हैं। 

    0 बरसात आते ही किस सूखे विभाग में तबादले की हरियाली आ गई है?