• छोटा पैकेट, बड़ा धमाका

    डी. आर. साहू

    एक फूल, दो माली

    प्रदेश के ब्यूरोक्रैट्स के बीच इन दिनों दो अफसरों के इश्क के किस्से सुर्खियों में है। अपने-अपने कैडर के दो वरिष्ठ अधिकारी एक पीआर कंसल्टेंसी चलाने वाली मोहतरमा के आगोश में डूबे हुए देखे जा रहे हैं। पता चला है कि दोनों महाशयों के बीच उसे अपना बनाने के लिए होड़ मची हुई है। एक चॉकलेटी आईएएस ने राज्य के ब्यूरोक्रैट्स के द्वारा दिए गए महंगे गिफ्टों का रिकॉर्ड ही तोड़ दिया है, बताते हैं कि उन्होंने इस दिलरुबा को मर्सिडीज़ गाड़ी भेंट की है। वहीं आईपीएस भाईसाहब ने राजधानी में तेजी से उभरता एक एक बिजनेस टावर में ऑफिस दिलवा दिया है, जिसका किराया लाखों में है। इसकी खबर लगते ही एक रिटायर्ड आईएएस ने कहा कि ऐसी कौन सी बला है, हम भी तो देखें, जिसके लिए हमारे दो अफसर दिल खोल कर लूटा रहे हैं।

    इस बार चूक गए  अरण्याधिकारी

    आखिरकार 9 साल बाद एक आईएफएस की मूल विभाग में वापसी हुई है। बताते हैं मंत्री कब से उन्हें हटाने के लिए जोर लगा रहे थे। 6 मई को संस्कृति विभाग से ही बस हटा पाए थे। हाल ही में  पर्यटन से भी उनकी विदाई हो गई। उस अरण्याधिकारी के बारे में बताया जाता है कि 2017 में जंगल से शहर आए तो खुद को बीजेपी सपोर्टर बताते रहे। 2018 में कांग्रेस आई तो हिमाचल के एक कांग्रेस नेता को पकड़कर अमरजीत भगत की गोद में जा बैठे। 2023 में वे रातों-रात केसरिया चोला उतारकर भगवाधारी बन गए और हिमाचल से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के एक राष्ट्रीय नेता की शरण में चले गए। इसके बाद अहंकार उनके सिर चढ़कर बोलने लगा। वह अपने आप को आईएएस अधिकारी से भी सुपीरियर बताने लगे। बताते हैं कि बाकी तो छोड़िए, मंत्री को भी कुछ नहीं समझते थे। यदि दिग्गज नेता इस बीच  एंजियोप्लास्टी के लिए एम्स में भर्ती नहीं हुए होते तो इस बार भी सूची जारी होने के पहले राज्य को फोन आ जाता।

    टू- प्लस वाले अधिकारियों के प्रभार बदले गए

    हाल ही में जीएडी ने 3 वर्ष से अधिक समय से एक ही सीट पर जमे अधिकारी- कर्मचारियों को बदले जाने का फरमान जारी किया है। उसके पश्चात मंगलवार को हुए फेरबदल में 2 वर्ष से ऊपर वाले आईएएस अधिकारियों को नई जिम्मेदारी दी गई। प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा को आदिम जाति विकास से नगरीय प्रशासन, निलेश क्षीरसागर को कलेक्टर कांकेर से संचालक नगरीय प्रशासन, अमृत विकास टोपनो को कलेक्टर सक्ती से मुंगेली भेजा गया। अभी भी कई विभागाध्यक्ष, सचिवों में पीएचई सचिव अब्दुल केसर हक, जल संसाधन सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो, खनिज सचिव पी. दयानंद, उद्योग सचिव रजत कुमार और रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह टू-प्लस में चल रहे हैं। कहा जा रहा है कि एक छोटी सूची और आ सकती है।

    समुद्र मंथन में क्या निकला..

    प्रतिबंध के बावजूद राज्य में तबादला महोत्सव का दौर चल रहा है। अरण्य में दो महीने के समुद्र मंथन के बाद सूची बाहर आई। पता चला है कि पहले मंथन मुख्यालय में हो रहा था फिर बाद में बंगले में शिफ्ट हो गया। राज्य के कोने-कोने से दावेदारों को राजधानी आमंत्रित किया गया। बोली प्रणाली से नाम तय किए जाने का हल्ला है। एक दावेदार ने बताया कि "सघन हरियाली वाले क्षेत्र के लिए मैंने ‘एक खोखा पूजा-पाठ की सामग्री’ भेंट करने पर हामी भरी थी। तीन दिन बाद पता चला कि उस जगह के लिए किसी दूसरे ने ‘डेढ़ खोखे सामग्री’ का कमिटमेंट कर दिया है और एक सप्ताह बाद खबर आई कि किसी तीसरे का नाम ‘पौने दो खोखे’ सामग्री की पेशकश के बाद लॉक कर दिया गया है।" बताया जाता है कि बेस प्राइस ही ‘एक खोखा सामग्री’ थी। जगह और दावेदारों के अनुसार ‘सामग्री’ बढ़ती गई। तभी तो फाइल बिजली की गति से दौड़ी और तीन दिन में ही पोस्टिंग आर्डर निकल गया। 

    तंत्र पर हावी डिप्टी कलेक्टरवाद

    डिप्टी कलेक्टर की पोस्टिंग जिले में लॉ एंड ऑर्डर और आपदा प्रबंधन के लिए की जाती है। दाऊजी के राज में इनका खूब विस्तार हुआ। पिछली सरकार में पूरे सिस्टम को ऑपरेट करने वाली एक चर्चित डिप्टी कलेक्टर ने अपनी सुविधा के लिए सभी मंत्रियों के निज स्थापना, मंत्रालय और विभागों में इन नॉन टेक्निकल डिप्टी कलेक्टर्स की पोस्टिंग की थी। सत्ता बदल गई, लेकिन यह परंपरा अब भी बरकरार है। जबकि साय सरकार के पास काफी अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारियों की अच्छी टीम है। अक्सर देखा गया है कि मंत्रियों को यहां बैठे इन नुमाइदों को जन सरोकारों से कोई लेना-देना नहीं होता है। मंत्री को एक और एक ग्यारह की सब्जबाग दिखाकर 20-20 मैच खेलते हैं। संघ के एक पदाधिकारी ने चैतू से कहा कि इन साहबानों ने कांग्रेस की लुटिया डूबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी, यहां भी नहीं चेते तो उससे भी बुरा हाल होगा।

    मंत्री के ओएसडी या सचिव का एजेंट

    कई डिप्टी कलेक्टर मंत्री दफ्तर की गोपनीयता को तार-तार करते देखे गए हैं। एक डिप्टी कलेक्टर विभागीय सचिव को मंत्री बंगले की पल-पल की रिपोर्टिंग करते रहते हैं कि मंत्री जी ने इस फाइल में यह लिखा है, मंत्री जी ने इतनी फाइल कर दी है, मंत्री जी अभी बाथरुम में हैं, मंत्री जी चेंबर में बैठ गए हैं, मंत्री जी इन-इन लोगों से मिल रहे हैं और उन्हें ये-ये कहा है। मंत्री जी खाना खाने चले गए हैं, आज इतने लोगों से मिले हैं, मंत्री जी बेड रूम में हैं आदि-आदि। विभागों के तकनीकी पहलू से अनभिज्ञ ये नुमाइंदे हर मीटिंग में मंत्री जी के बगल में बैठकर वरिष्ठ अधिकारियों के बीच अपना ज्ञान बघारते रहते हैं।

    30 साल के अनुभव पर भारी

    कई विभागों में अभी भी डिप्टी कलेक्टर्स को बैठा दिया गया है जैसे उद्योग महकमे में एक मोहतरमा से औद्योगिक मामलों के जानकार के रूप में राय ली जाती है। विभाग को 25-30 साल देने वाले अधिकारियों के प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान और अनुभव मानो उनके सामने फिसड्डी साबित हो रहे हों। विभागों के तकनीकी कार्यों को ये नॉन-टेक्निकल नुमाइंदे बड़े दंभ के साथ कर रहे हैं। मंत्रालय के अफ़सरान विभागों के अधिकारियों को हाशिये में रखकर इन नॉन-टेक्निकल नुमाइंदों को तरजीह देते हैं। बताते हैं कि वे मंत्रालय के साहबों की तीमारदारी की कला में ज्यादा निपुण होते हैं और स्वयं की तुलना आईएएस से करते हैं।

    एक तरफ घरवाली, एक तरफ बाहरवाली

    एक तरफ घरवाली और एक तरफ बाहरवाली के चक्कर में एक अधिकारी बुरे फंस गए थे। बताते हैं कि अधिकारी की मूल पोस्टिंग अंबिकापुर में है और उन्हें बलरामपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। शुरू-शुरू में वह हर दूसरे दिन परिवार के पास अंबिकापुर पहुंच जाते थे बाद में वह सप्ताह-सप्ताह भर घर नहीं आने लगे। पत्नी फोन पर पूछती तो बोलते काम बहुत ज्यादा है। पत्नी को शंका हुई और एक दिन वह सुबह-सुबह बलरामपुर पहुंच गई। पति को उसने उनके दफ्तर की महिला कर्मचारी के साथ रंगे हाथों पकड़ लिया। खूब बवाल हुआ।

    पुछल्ला

    नितिन नवीन की नई कार्यकारिणी में राज्य से सांसद रूप कुमारी चौधरी और दीपक महस्के को जगह मिली। इसकी घोषणा के बाद विजय शर्मा समेत अन्य मंत्रियों ने राहत की सांस ली। राज्य में फिलहाल मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों पर विराम लग गया है। महासमुंद के अघरिया समाज से आने वालीं रूप कुमारी चौधरी को राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिलने के बाद क्या समाज के अन्य नेताओं की भी भूमिका बढ़ेगी?

    बूझो तो जानें:-

    0 जांजगीर के बलौदा क्षेत्र में किस आईएएस का 45 एकड़ का फार्म हाउस है?

    0 सूबे के एक अधिकारी पहले अपने मोबाइल पर अश्लील वीडियो चलाकर छोड़ देते हैं फिर उसे महिला कर्मचारी से मंगाते हैं।

    0 तीन-चार खोखा पूजा पाठ की सामग्री अर्पित कर शैक्षणिक संस्थाओं के शिक्षापति बनने में क्या उत्तर प्रांत के विद्जन आगे हैं?

    0 महबूबा को तीन करोड़ रुपये का बंगला गिफ्ट करने वाले एक माननीय के किस्से क्या आपको भी ज्ञात है?