‘तू इधर उधर की न बात कर ये बता कि काफिला क्यूं लुटा’, TMC में मची उथलपुथल के बीच सायोनी घोष ने किया 'एक्स' पर पोस्ट
सायोनी घोष ने एक्स पोस्ट में शहाब जाफरी के शेर की आधी लाइन शेयर की। उन्होंने लिखा, ''तू इधर उधर की न बात कर ये बता कि क़ाफ़िला क्यूँ लुटा …..''
नई दिल्ली/कोलकाता, 18 सितंबर 2026।पश्चिम बंगाल विधानसभा उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर एक अहम फैसला लिया है। आयोग ने पार्टी के नाम और चिन्ह के स्वामित्व को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद के चलते ‘अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘जोड़ा फूल’ चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। इसी बीच, टीएमसी की बागी सांसद सायोनी घोष ने एक पोस्ट शेयर किया है।
तृणमूल कांग्रेस की बागी सांसद सायोनी घोष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में शहाब जाफरी के शेर की आधी लाइन शेयर की। उन्होंने लिखा,
”तू इधर उधर की न बात कर ये बता कि काफिला क्यूं लुटा …..।”
हालांकि, सायोनी घोष ने किसी भी दल या नेता का नाम नहीं लिया है।
राहुल गांधी ने बीजेपी और चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की
वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने बंगाल में आगामी विधानसभा उपचुनावों में टीएमसी को पार्टी के नाम और चिन्ह का उपयोग करने से रोकने के लिए चुनाव आयोग की कड़ी आलोचना की।
राहुल गांधी ने लिखा, “पहले शिवसेना, फिर एनसीपी और अब तृणमूल कांग्रेस। हर बार एक ही पैटर्न बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है। जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं। वोट चोरी। सरकार चोरी।
अब पार्टी चोरी – ये हमारे लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक बन गए हैं। चुनाव आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी जनादेश की रक्षा करना है, मगर उल्टा वो उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को ही पलट देते हैं। यह लड़ाई सिर्फ ममता बनर्जी जी की नहीं है। यह हर राजनीतिक दल, हर मतदाता की लड़ाई है जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है।”
चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश जारी किया
बता दें कि चुनाव आयोग ने पार्टी के नाम और चिन्ह के अधिकार को लेकर दोनों गुटों के बीच चल रहे विवाद के मद्देनजर यह अंतरिम आदेश जारी किया है। आयोग ने कहा कि यह मामला वर्तमान में चिन्ह निर्देश की धारा 15 के तहत विचाराधीन है। अंतिम निर्णय होने तक, दोनों दलों को उपचुनाव अलग-अलग नामों और चुनाव चिन्हों के साथ लड़ना होगा।
आयोग ने कहा कि उपचुनाव से पहले मुख्य विवाद को पूरी तरह से सुलझाने के लिए पर्याप्त समय नहीं है। आयोग ने यह भी कहा कि इस आदेश को किसी भी तरह से अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और रेजिनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के नाम और चिन्ह के संबंध में यह अंतरिम व्यवस्था लागू की है।
चुनाव के बाद गहराया संगठनात्मक विवाद
गौरतलब है कि विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर संगठनात्मक विवाद और भी गहरा गया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट और ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले विपक्षी गुट के बीच पार्टी पर नियंत्रण, संगठनात्मक संरचना और चुनाव चिन्ह के स्वामित्व को लेकर विवाद चल रहा है। दोनों ही गुट अपने-अपने वैध प्रतिनिधि होने का दावा कर रहे हैं। इसी विवाद के चलते दोनों गुटों ने चुनाव आयोग से संपर्क किया है।