• पिछले चिंतन शिविरों के समुद्र मंथन से निकले ई-ऑफिस, सीएम हेल्पलाइन 1076 और सेवा सेतू - CM

    मंत्रियों की पाठशाला: आईआईएम में आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर 3.0 में  मंत्रिगणों ने समूह आधारित विचार-मंथन के माध्यम से विभिन्न सुझावों पर विस्तार से चर्चा कर विकसित छत्तीसगढ़ की संभावना को मूर्त रूप देने हेतु विचार किया।

    रायपुर, 5 जुलाई 2026। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की दीर्घकालिक रणनीति, सुशासन को और अधिक प्रभावी बनाने तथा भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप प्रशासनिक क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय 'चिंतन शिविर 3.0' का सफलतापूर्वक समापन हुआ। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रिपरिषद के सदस्यों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों तथा देश के प्रतिष्ठित नीति विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और विषय विशेषज्ञों ने शासन, विकास और जनसेवा के विभिन्न आयामों पर व्यापक विचार-विमर्श किया।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि चिंतन शिविर अब केवल विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं रह गया है, बल्कि शासन व्यवस्था में ठोस सुधारों का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित और नागरिकों की आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील प्रशासन विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिंतन शिविर 3.0 से प्राप्त सुझाव विकसित छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा को नई दिशा देंगे तथा इन्हें शीघ्र ही नीतिगत एवं प्रशासनिक पहलों के रूप में लागू किया जाएगा।

    दूसरे दिन आयोजित 'सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन' विषयक सत्र में वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एवं पर्यटन नीति विशेषज्ञ सुमन बिल्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, जनजातीय और सांस्कृतिक पर्यटन के क्षेत्र में देश का अग्रणी हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट पर्यटन गंतव्य बनने की अपार क्षमता रखता है। उन्होंने पर्यटन अवसंरचना, सामुदायिक भागीदारी, निवेश, उत्तरदायी पर्यटन और सुशासन आधारित पर्यटन मॉडल पर बल दिया। 

    'सबका प्रयास के माध्यम से विकासपरक राजनीति' विषय पर लोकसभा सदस्य शशांक मणि त्रिपाठी ने कहा कि जिला ही विकास का वास्तविक केंद्र (District is the Fulcrum of Growth) होना चाहिए। उन्होंने प्रत्येक जिले के लिए विकासोन्मुख योजना, स्थानीय आर्थिक क्षमता के अनुरूप विकास रणनीति तथा जिला-स्तर पर सकल घरेलू उत्पाद (District GDP) आधारित नियोजन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने 'अमृत प्रयास', 'बनयान रिवोल्यूशन' और सहभागी शासन की अवधारणा प्रस्तुत करते हुए कहा कि जिला-केंद्रित विकास मॉडल उद्यमिता, रोजगार, कृषि परिवर्तन, स्थानीय नवाचार और जन-क्षमता के विकास को नई गति देगा तथा विशेष रूप से टियर-2 और टियर-3 क्षेत्रों के लिए परिवर्तनकारी सिद्ध होगा।

    समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सुशासन, प्रभावी नीति-क्रियान्वयन, नेतृत्व विकास तथा लोक प्रशासन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार रखे। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले दो चिंतन शिविरों में प्राप्त सुझावों को राज्य सरकार ने सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया है। मंत्रालय में ई-ऑफिस प्रणाली लागू होने से फाइलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध हुई है। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 के माध्यम से आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान की प्रभावी व्यवस्था स्थापित हुई है, वहीं सेवा सेतु के माध्यम से 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराकर नागरिक सेवाओं को सरल, सुगम और पारदर्शी बनाया गया है। 

    'इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज़' विषय पर नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी, ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन तथा डेटा-आधारित प्रशासन की संभावनाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। 

    'कृषि से समृद्धि' विषयक सत्र में कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद तथा कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने प्राकृतिक खेती, जलवायु-अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण, मूल्य संवर्धन, आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजार संपर्क पर आधारित कृषि मॉडल प्रस्तुत किए। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा कृषि को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए। 

    चिंतन शिविर में  मंत्रिगणों ने समूह आधारित विचार-मंथन के माध्यम से विभिन्न सुझावों पर विस्तार से चर्चा कर विकसित छत्तीसगढ़ की संभावना को मूर्त रूप देने हेतु विचार किया।