• डोंगरगांव के स्कूल में प्रार्थना सभा के दौरान मधुमक्खियों का हमला, 40 छात्र घायल, शिक्षिका ने लगा दी जान की बाजी

    डोंगरगांव: अचानक मधुमक्खियों के हमले से क्लास रूम में अफरा-तफरी मच गई। हमले में 72 विद्यार्थी प्रभावित हुए। इस दौरान शिक्षिका ने सूझबूझ दिखाते हुए सभी बच्चों को सुरक्षित बचा लिया..

    राजनांदगांव, 15 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के डोंगरगांव के बीजाभांठा शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल में एक बड़ा हादसा टल गया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बीजेभाठा में सुबह जब बच्चे रोज की तरह सामूहिक प्रार्थना कर रहे थे, तभी मधुमक्खियों के झुंड ने अचानक बच्चों पर धावा बोल दिया। किसी हलचल से भड़कीं इन मधुमक्खियों के हमले से स्कूल परिसर में देखते ही देखते अफरा-तफरी और चीख-पुकार मच गई। इस औचक हमले की चपेट में आने से लगभग 40 स्कूली बच्चे घायल हो गए हैं। 

    साहसिक कदम उठाते हुए शिक्षिका कनक मंडावी ने सभी बच्चों को स्कूल से सुरक्षित बाहर निकाला और तुरंत घायल छात्रों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव लेकर गईं। मधुमक्खियां के डंक मारने से वह खुद भी घायल हो गई थी और छात्रों के साथ खुद भी अस्पताल में भर्ती हुई। जबकि 40 बच्चों का स्कूल में ही प्राथमिक उपचार किया गया। गंभीर रूप से प्रभावित तीन छात्राओं विमला (10वीं), भनेश्वरी (12वीं) और नम्रता (11वीं) को सांस लेने में तकलीफ के कारण ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखना पड़ा।

    शिक्षिका ने सूझबूझ से लिया काम
    कक्षा शिक्षिका कनक मंडावी ने अपनी जान जोखिम में डालकर सूझबूझ दिखाई। खुद मधुमक्खियों के डंक का शिकार होने के बावजूद, उन्होंने अंतिम बच्चे के सुरक्षित बाहर निकलने तक क्लास नहीं छोड़ी। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम तीन एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंची। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग तुरंत एक्शन में आया।  जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के मुताबिक, समय पर इलाज मिलने से सभी बच्चों की स्थिति अब पूरी तरह सामान्य और खतरे से बाहर है। अधिकांश बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

    लंबे समय से था मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता
    बताया जा रहा है कि विद्यालय की नई इमारत के छज्जे पर लंबे समय से मधुमक्खियों का बड़ा छत्ता बना हुआ था। आशंका है कि किसी पक्षी की ओर से छत्ते को छेडऩे के बाद मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं और पूरे परिसर में फैल गईं। हालांकि यह केवल संभावना है, लेकिन यह सवाल अब भी बना हुआ है कि जब छत्ता पहले से मौजूद था तो उसे हटाने की पहल पहले क्यों नहीं की गई। घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया।

    घबरा गए थे बच्चे
    बच्चे काफी घबरा गए थे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र डोंगरगांव की बीएमओ डॉ. रागिनी चन्द्रे ने बताया कि मधुमक्खियों के काटने से बच्चे काफी घबरा गए थे। तीन बच्चों को सांस लेने में तकलीफ होने पर ऑक्सीजन दिया गया। अब सभी की हालत सामान्य है। अधिकांश बच्चों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है, जबकि एक छात्रा का उपचार देर शाम तक पूरा कर घर भेजा जाएगा।

    मधुमक्खी का छत्ता हटाया जा रहा: प्राचार्य
    प्राचार्य शोभा श्रीवास्तव ने बताया कि घटना के तुरंत बाद मधुमक्खियों का छत्ता हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। सुरक्षा की दृष्टि से संबंधित भवन में फिलहाल कक्षाएं संचालित नहीं की जाएंगी।

    कनक मंडावी ने साहसिक कदम उठाया
    इस पूरे घटनाक्रम में कक्षा शिक्षिका कनक मंडावी की बहादुरी भी सामने आई। मधुमक्खियों के हमले के बावजूद उन्होंने खुद की सुरक्षा की चिंता किए बिना सभी बच्चों को सुरक्षित कक्षा से बाहर निकाला। इस दौरान उन्हें भी मधुमक्खियों ने कई जगह डंक मारे, लेकिन उन्होंने तब तक कक्षा नहीं छोड़ी, जब तक अंतिम बच्चा सुरक्षित बाहर नहीं निकल गया। बाद में वह स्वयं भी बच्चों के साथ अस्पताल पहुंचीं और उनके उपचार में सहयोग करती रहीं।