समय, समाज और मनुष्यता की बदलती संवेदनाओं का सशक्त आख्यान है 'मिट्टी की कीमत' : डॉ रामानंद शर्मा
समाचार संपादक देहाती विश्वनाथ की खास रिपोर्ट:
शिमला, 12 अगस्त 2026. हिंदी कथा - साहित्य में समय-समय पर ऐसे रचनाकार सामने आते रहे हैं, जिन्होंने समाज के बदलते यथार्थ को अपनी लेखनी के माध्यम से जीवंत रूप में अभिव्यक्त किया है. इसी कड़ी में प्रसिद्ध लेखक, कहानीकार डॉ. लीलाधर दोचानिया द्वारा लिखित कहानी - संग्रह " मिट्टी की कीमत" इसी परंपरा की एक प्रभावशाली संकलन है. यह संग्रह केवल कहानियों का संकलन नहीं, बल्कि बदलते भारतीय समाज, ग्रामीण जीवन, मानवीय संबंधों, संघर्षों और संवेदनाओं का संजीव दस्तावेज है. इस संग्रह की विशेषता, इसकी सहज भाषा, प्रभावी शिल्प और जीवन के यथार्थ से गहरा जुड़ाव कहा जा सकता है.
लेखक ने गांव और शहर के बीच बढ़ती दूरी, बदलती जीवन- शैली, पारिवारिक संबंधों के विघटन के साथ-साथ सामाजिक विसंगतियों तथा मानवीय मूल्यों के क्षरण को अत्यंत सहजता के साथ प्रस्तुत किया है. प्रत्येक कहानी पाठक को केवल घटनाओं से नहीं, बल्कि अपने आसपास कि समाज और स्वयं के भीतर झांकने के लिए भी प्रेरित करती हैं. इस संग्रह का शीर्षक कहानी " मिट्टी की कीमत" विशेष रूप से उल्लेखनीय है. यह कहानी केवल भूमि या मिट्टी के आर्थिक मूल्य की चर्चा नहीं करती, बल्कि अपनी जड़ों, संस्कृति, स्मृतियों और मानवीय रिश्तों के वास्तविक महत्वपूर्ण रेखांकित करती है.
लेखक ने अत्यंत मार्मिक ढंग से यह संदेश दिया है कि आधुनिकता की दौड़ में यदि मनुष्य अपनी मिट्टी और संस्कारों से कट जाता है, तो उसकी सबसे बड़ी हानि वही होती है जिसे धन से कभी नहीं खरीदा जा सकता.
डॉ. दोचानिया की लेखनी की सबसे बड़ी शक्ति उनकी सादगी और ईमानदारी है. वे अनावश्यक शब्दाडंबर से दूर रहकर जीवन की छोटी-छोटी घटनाओं के माध्यम से बड़े सामाजिक प्रश्न उठाते रहे हैं. उनकी भाषा सहज, प्रवाहपूर्ण और पाठकों के हृदय तक सीधे पहुंचने वाली है. यही कारण है कि इस संग्रह की कहानियां केवल पद ही नहीं जाती, बल्कि लंबे समय तक स्मृति में बनी रहती है.
यह कहानी - संग्रह वर्तमान समय के सामाजिक संक्रमण, मानवीय संवेदनाओं और जीवन -मूल्यों को समझने के इच्छुक प्रत्येक पाठक के लिए उपयोगी और संग्रहणीय कृति है. शोधार्थियों, साहित्य प्रेमियों और नई पीढ़ी के पाठकों के लिए भी यह पुस्तक विचार और विमर्श का एक सशक्त आधार प्रस्तुत करती है. निसंदेह, " मिट्टी की कीमत" समकालीन हिंदी कहानी- साहित्य ने अपनी सार्थक उपस्थिति दर्ज करने वाला एक महत्वपूर्ण कहानी - संग्रह है. डॉ. लीलाधर दोचानिया ने अपनी सृजनात्मक दृष्टि और सामाजिक प्रतिबद्धता के माध्यम से पाठकों को एक ऐसी कृति दी है, जो संवेदना, विचार और साहित्यिक गरिमा - तीनों स्तरों पर प्रभाव छोड़ती है. लेखक को इस उत्कृष्ट कृति के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं. आशा है कि उनकी यह पुस्तक साहित्य-- जगत में व्यापक रूप से सराही जाएगी और पाठकों के बीच अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगी.
समीक्षक - डॉ रामानंद शर्मा, प्रधान संपादक, आईना ए शेखावाटी.